दुनिया भर में H5N1 बर्ड फ्लू का खतरा लगातार बढ़ रहा है. अब इस घातक वायरस ने ऑस्ट्रेलिया के सब-अंटार्कटिक क्षेत्र में तबाही मचा दी है. हीर्ड द्वीप पर पता चला है कि H5N1 बर्ड फ्लू ने 13,359 एलिफैंट सील के बच्चों को मार डाला. यह संख्या वहां के कुल 17,364 बच्चों में से 75 प्रतिशत से ज्यादा है. एक पूरी पीढ़ी के बच्चों का भारी नुकसान हुआ है.
यह घटना ऑस्ट्रेलिया के लिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह देश के किसी क्षेत्र में H5N1 वायरस का पहला पुष्ट मामला है. वैज्ञानिकों को डर है कि यह वायरस अन्य जानवरों और पक्षियों तक फैल सकता है.
हीर्ड द्वीप ऑस्ट्रेलिया का दूरस्थ द्वीप है, जो अंटार्कटिका के पास स्थित है. यहां दक्षिणी एलिफैंट सील की बड़ी कॉलोनी रहती है. अगस्त 2025 के आसपास यह घातक वायरस संभवतः आसपास के द्वीपों से यहां पहुंचा.
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जल्द ही वायरस ने एलिफैंट सील के बच्चों में तेजी से फैलना शुरू कर दिया. कुल मिलाकर एक ब्रीडिंग सीजन के 75 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई. यह एक बहुत बड़ा नुकसान है.
H5N1 बर्ड फ्लू वायरस क्या है?
H5N1 एक प्रकार का एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है, जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू कहा जाता है. यह मुख्य रूप से पक्षियों में फैलता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह स्तनधारियों (मैमल्स) में भी तेजी से फैल रहा है.
यह वायरस बेहद घातक है. संक्रमित जानवरों में तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, नर्वस सिस्टम का प्रभावित होना और अचानक मौत हो सकती है. पहले यह मुख्य रूप से मुर्गियों और जंगली पक्षियों तक सीमित था, लेकिन अब यह फोक, सील, डॉल्फिन और अन्य समुद्री जानवरों में भी फैल चुका है.
ऑस्ट्रेलियन अंटार्कटिक प्रोग्राम के वैज्ञानिकों ने इस आपदा का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया. उन्होंने ड्रोन से 120 बार सर्वे किया. इसके अलावा ग्राउंड टीम भी द्वीप पर उतरी और सीधे जांच की.
मृत बच्चों के सैंपल लिए गए. लैब टेस्ट में H5N1 वायरस की पुष्टि हुई. वायरस सिर्फ एलिफैंट सील में ही नहीं, बल्कि पेंग्विन और अन्य वाइल्डलाइफ में भी पाया गया. इससे साफ है कि वायरस पूरे ईकोसिस्टम में फैल चुका है.
इतना बड़ा नुकसान क्यों चिंताजनक है?
एलिफैंट सील समुद्री ईकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ये बड़े समुद्री शिकारी हैं जो मछलियों और स्क्विड को खाते हैं. अगर इनकी आबादी में इतनी तेज कमी आई तो पूरा फूड चेन प्रभावित हो सकता है.
हीर्ड द्वीप जैसी जगहों पर जानवरों की आबादी पहले से ही सीमित होती है. एक पीढ़ी के 75% बच्चों का नुकसान लंबे समय तक इनकी आबादी को प्रभावित करेगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर वायरस आगे फैला तो अन्य प्रजातियों के लिए भी खतरा बढ़ जाएगा.
H5N1 बर्ड फ्लू पिछले कुछ सालों से दुनिया भर में चिंता का विषय बना हुआ है. अमेरिका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में यह वायरस पोल्ट्री फार्म्स, जंगली पक्षियों और कई स्तनधारी जानवरों में फैल चुका है.
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कुछ मामलों में यह इंसानों में भी पहुंचा है, हालांकि इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता अभी सीमित है. लेकिन वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर वायरस म्यूटेट हुआ तो यह बड़े पैमाने पर महामारी बन सकता है.
ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक अब अन्य द्वीपों और मुख्य भूमि पर निगरानी बढ़ा रहे हैं. उनका लक्ष्य है कि वायरस को और आगे फैलने से रोका जाए.
हीर्ड द्वीप जैसी दूरस्थ जगहों पर भी वायरस पहुंचना दिखाता है कि H5N1 अब वैश्विक स्तर पर बहुत तेजी से फैल रहा है. जलवायु परिवर्तन, पक्षियों के प्रवास और मानवीय गतिविधियां इस फैलाव को बढ़ावा दे रही हैं.
13,000 से ज्यादा एलिफैंट सील बच्चों की मौत H5N1 बर्ड फ्लू की भयावह शक्ति को दिखाती है. यह घटना सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें वाइल्डलाइफ में फैल रहे इस वायरस पर लगातार नजर रखनी होगी. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह अन्य समुद्री जानवरों, पक्षियों और संभवतः इंसानों तक पहुंच सकता है.
आजतक साइंस डेस्क