'वैसे स्मॉग टावर काम के नहीं... लेकिन लगानी हो तो पूरी दिल्ली में लगाने पड़ेंगे 47 हजार टावर'

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (DPCC) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से कहा है कि दिल्ली की हवा साफ करने के लिए कम से कम 47 हजार स्मॉग टावर्स की जरूरत पड़ेगी. क्योंकि एक टावर सिर्फ अपने आसपास के 100 मीटर के इलाके को साफ कर सकता है. जबकि दिल्ली का क्षेत्रफल 1483 वर्ग किलोमीटर है.

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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को दी नई रिपोर्ट. (सभी फोटोः PTI) दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को दी नई रिपोर्ट. (सभी फोटोः PTI)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 12:57 PM IST

दिल्ली की हवा साफ करने के लिए कम से कम 40 हजार स्मॉग टावर की जरूरत और होगी. कुल 47,229 टावर चाहिए. इसकी लागत आएगी 12 हजार करोड़ रुपए. ये बात दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (DPCC) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से कही है. फिर मुद्दा ये भी है कि दिल्ली के सारे वर्तमान स्मॉग टावर काम नहीं कर रहे हैं. 

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में छपी खबर के मुताबिक डीपीसीसी ने एनजीटी को बताया कि स्मॉग टावर दिल्ली का प्रदूषण कम करने में पूरी तरह से प्रभावी नहीं हैं. दिल्ली आज भी मौसम के सहारे ही प्रदूषण के खत्म होने का इंतजार कर रहा है. ये स्मॉग टावर कनॉट प्लेस में हैं. दूसरा आनंद विहार में. इनसे प्रदूषण कम करने में कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा है. 

डीपीसीसी की वरिष्ठ वैज्ञानिक नानिदा मोतराई ने कहा कि IIT Bombay की स्टडी के मुताबिक स्मॉग टावर प्रदूषण कम करने का सही तरीका नहीं है. वे बहुत प्रभावी नहीं होते. डीपीसीसी ने 8 नवंबर 2023 को यह जानकारियां देते हुए एक एफिडेविट फाइल की थी. आनंद विहार का टावर तो बंद है. काम नहीं करता. 

पूरी दिल्ली में हजारों स्मॉग टावर लगेंगे कहां? 

एक स्मॉग टावर को चलाने का खर्च 15 लाख रुपए आता है. इससे 100 मीटर के दायरे में सिर्फ 17 फीसदी प्रदूषण कम होता है. पूरी दिल्ली का क्षेत्रफल 1483 वर्ग किलोमीटर है. यानी दिल्ली की हवा साफ करने के लिए कुल 47,229 स्मॉग टावर की जरूरत पड़ेगी. जिसकी कुल लागत आएगी 11,80,725 करोड़ रुपए. 

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केंद्र सरकार के स्मॉग टावर एक्सपेरिमेंटल

एक टावर बनाने में 25 करोड़ रुपए लगते हैं. हर महीने उसे चलाने का खर्च 15 लाख रुपए आता है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 13 जनवरी 2020 को दिल्ली में कुछ स्मॉग टावर्स लगाए थे. इनका संचालन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय करता है. डीपीसीसी ने कहा कि ये स्मॉग टावर प्रयोग के तौर पर लगाए गए थे. इनके नतीजे हौसला बढ़ाने वाले नहीं हैं. 

एक स्मॉग टावर कितना प्रदूषण कम करता है

- अपने आसपास 20 मीटर के इलाके में 48-56% प्रदूषण कम करता है. 
- 21-99 मीटर के इलाके में 34-30% प्रदूषम कम करता है. 
- 109 से 199 मीटर की दूरी तक 12-13% प्रदूषण कम करता है. 
- 300 से 500 मीटर तक 16 फीसदी प्रदूषण कम करता है. 

आनंद विहार के स्मॉग टावर का कोई फायदा नहीं

आनंद विहार में स्मॉग टावर से कोई फायदा नहीं हुआ. यह दिल्ली का सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला इलाका है. इस स्मॉग टावर से मात्र 30 मीटर दूर ही एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम है. लेकिन उसके AQI में स्मॉग टावर के होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ राह है. अक्टूबर 2022 से जनवरी 2023 तक आनंद विहार का एक्यूआई गंभीर स्तर पर ही रहा. 

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IIT दिल्ली की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्मॉग टावर 200 मीटर के इलाके में 13 से 15 फीसदी प्रदूषण कम करते हैं. जो कि प्रभावी नहीं हैं. स्मॉग टावर के सहारे एक किलोमीटर के दायरे की हवा को साफ करना नामुमकिन है. इनसे अधिकतम 200 मीटर तक ही हवा साफ हो पाती है, वो भी कम मात्रा में. 

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