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घरेलू बिल्लियां जंगली जीवों में फैला रहीं पैरासाइट, इंसानों के लिए भी खतराः स्टडी

aajtak.in
  • टोरंटो,
  • 21 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST
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शहरों के आसपास रहने वाले जंगली जीवों में एक पैरासाइट के होने के आसार बहुत है, जिससे टॉक्सोप्लाज्मोसिस (Toxoplasmosis) नाम की बीमारी होती है. इस पैरासाइट को फैलाने में घरेलू बिल्लियों का बड़ा किरदार है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि घरेलू बिल्लियां टॉक्सोप्लाज्मोसिस का पैरासाइट टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी लेकर घूमती है. इनसे वे किसी गर्म-खून वाले जीव या इंसानों को संक्रमित कर सकती हैं. (फोटोः गेटी)

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इंसानों में जो टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी (Toxoplasma gondii) के जो संक्रमण देखे गए हैं, उनमें से 30 से 50 फीसदी एसिम्प्टोमैटिक होते हैं. अगर इंसान या जंगली जीव का इम्यून सिस्टम कमजोर है तो यह पैरासाइट क्रोनिक बीमारियां पैदा कर सकता है. गंभीर स्थिति होने पर मौत भी हो सकती है. यह स्टडी हाल ही में प्रोसीडिंग्स ऑफ रॉयल सोसाइटी बीः बायोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित हुई है. (फोटोः गेटी)

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कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया की शोधकर्ता एमी विल्सन ने कहा कि टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी (Toxoplasma gondii) इंसानों और जंगली जीवों दोनों के लिए खतरनाक पैथोजन है. यह जीवनभर आपके शरीर में रह सकता है. कई तरह की क्रोनिक बीमारियां पैदा कर सकता है. अगर स्थिति बिगड़ती चली गई और सही समय पर इलाज न मिले तो इंसान या जंगली जीव की मौत हो सकती है. (फोटोः गेटी)

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घरेलू बिल्लियां टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी (Toxoplasma gondii) की सबसे बड़ी वाहक होती है. यह पैरासाइट इन बिल्लियों के अंदर ही पैदा होता है. प्रजनन करता है. टॉक्सोप्लाज्मा आमतौर पर बिल्लियों के मल से फैलता है. एमी विल्सन और उनके साथियों ने टॉक्सोप्लाज्मोसिस (Toxoplasmosis) से पीड़ित 45,079 केस की स्टडी की. इनमें जंगली जीवों के 238 प्रजातियां शामिल थीं. ये मामले 202 प्रकाशित साइंटिफिक रिपोर्ट्स में से निकाले गए थे. (फोटोः गेटी)

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एमी और उनकी टीम ने टॉक्सोप्लाज्मोसिस (Toxoplasmosis) के संक्रमण के दर को इंसानी आबादी, घनत्व, बारिश, तापमान समेत कई अन्य मानकों पर रख कर विश्लेषण किया. सबसे ज्यादा केस जंगली जीवों में मिले, जो शहरों के किनारे रहते हैं. वहां पर तापमान ज्यादा होता है, जिस वजह से संक्रमण तेजी से फैलता है. वहीं, जहां इंसानों में संक्रमण की बात है तो जहां ज्यादा इंसान होते हैं, वहां ज्यादा बिल्लियां होती हैं. इसलिए आबादी और घनत्व भी एक बड़ा फैक्टर है संक्रमण को फैलान की. (फोटोः गेटी)

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एमी ने बताया कि खुले में घूमने वाली घरेलू बिल्लियां टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी (Toxoplasma gondii) पैरासाइट को आराम से लेकर घूमती रहती हैं. जैसे-जैसे शहरों का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे इंसानी आबादी बढ़ रही है. साथ ही बिल्लियों की संख्या भी. क्योंकि इन इलाकों में बिल्लियां निडर होकर घूमती हैं. इन्हें शिकार होने का डर नहीं होता. शहरों के विस्तार के साथ जंगली इलाके खत्म हो रहे हैं. जंगल के जीव इन बिल्लियों को खा लेते हैं, या फिर इनके मल से होकर गुजर जाते हैं. जिनसे उन्हें संक्रमण हो जाता है. (फोटोः गेटी)

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एमी विल्सन कहते हैं कि अगर शहरों में घरेलू बिल्लियों का प्रबंधन सही से किया जाए तो इस बीमारी और इसके संक्रमण से जंगली जीवों और इंसानों को बचाया जा सकता है. इससे टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी (Toxoplasma gondii) पैरासाइट के फैलाव पर नियंत्रण लगेगा. (फोटोः गेटी)

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यूके स्थित स्वानसी यूनिवर्सिटी के कोन्सटांस वेल्स ने कहा कि एमी विल्सन और उनकी टीम ने जो स्टडी की है उससे इस बात के सबूत जरूर मिलते हैं कि अगर बड़े पैमाने पर अध्ययन किया जाए तो ऐसे जूनोटिक बीमारियों की जानकारी मिल सकती है. साथ ही यह भी पता चल सकता है कि किस घरेलू जीव से किस तरह की बीमरियों का अंदेशा है. ताकि भविष्य में बड़ी महामारी या आउटब्रेक को रोका जा सके. (फोटोः गेटी)

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