Surya Grahan 2026: 11 या 12 अगस्त, कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण? भारत में सूतक काल लगेगा या नहीं

Surya Grahan 2026: क्या 12 अगस्त को लगने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव आपकी राशि पर भी पड़ेगा? सिंह राशि में लगने वाला यह सूर्य ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में दिन में ही रात जैसा नजारा बना देगा. जानें भारत में इसकी दृश्यता, सूतक काल की मान्यता.

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सूर्य ग्रहण 2026 (Photo: ITG) सूर्य ग्रहण 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:00 AM IST

Surya Grahan 2026: साल 2026 का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटना यानी पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) अगले महीने 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र और खगोल विज्ञान, दोनों ही दृष्टियों से यह सूर्य ग्रहण बेहद खास माना जा रहा है. यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा और पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन में ही अंधेरा छा जाएगा. आइए जानते हैं इस पूर्ण सूर्य ग्रहण का समय, यह कहां-कहां दिखाई देगा और भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा.

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12 अगस्त को सूर्य ग्रहण नजारा कहां-कहां दिखेगा? (Where to watch Surya Grahan?)

खगोलीय गणना के अनुसार, 12 अगस्त को लगने वाला यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्रों में दिखाई देगा. यह मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा. वहीं, यूरोप के अधिकांश देशों, उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों और अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी भागों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा.

क्या भारत में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण? (Surya Grahan Visible in India or not)

ज्योतिषीय और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा. चूंकि, यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात के समय घटित होगा, इसलिए भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा.

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सूर्य ग्रहण की टाइमिंग (Surya Grahan 2026 Date & Timings)

भारतीय समयानुसार, 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट से लेकर देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक लगेगा. इस दौरान रात 11 बजकर 17 मिनट पर सूर्य ग्रहण अपने पीक पर होगा. 

सूतक काल की मान्यता और समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है. सूतक काल के दौरान शुभ व मांगलिक कार्यों की मनाही होती है और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. चूंकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार के धार्मिक नियमों के पालन या सूतक काल मानने की आवश्यकता नहीं है. मंदिर और दैनिक पूजा-पाठ सामान्य रूप से जारी रहेंगे.

ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह ग्रहण?

भले ही यह ग्रहण भारत में दृश्यमान न हो, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल का वैश्विक और अप्रत्यक्ष प्रभाव सभी राशियों और प्रकृति पर पड़ता है. यह सूर्य ग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लगने जा रहा है. सूर्य देव सिंह राशि के स्वामी हैं, ऐसे में अपनी ही राशि में ग्रहण लगने से सिंह राशि के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. पूर्ण सूर्य ग्रहण के प्रभाव से प्राकृतिक आपदाओं, मौसम बदलाव और वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

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ग्रहण के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

गर्भवती महिलाएं 
भारत में दृश्यता न होने के बावजूद शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण अवधि के दौरान भगवान शिव या अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करना चाहिए.

दान-पुण्य 
ग्रहण समाप्त होने के बाद गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है.

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