Hindu Dharam: कलयुग का अंत कब और कैसे होगा, इसके बारे में आपने कई भविष्यवाणियां सुनी होंगी. लेकिन शायद आपने यह नहीं सुना होगा कि हमारे ही देश में एक ऐसा मंदिर है, जहां कलियुग के अंत से जुड़ी कई भविष्यवाणियां सच होती हुई मानी जाती हैं. तो आइए, हम इन भविष्यवाणियों को एक-एक करके समझते हैं.
हिंदू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक, जगन्नाथ पुरी मंदिर अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है. ओडिशा के पुरी में स्थित इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी की पूजा होती है. यह एक अनोखा मंदिर है, जहां भगवान कृष्ण की मूर्ति राधा जी के साथ नहीं है. कहा जाता है कि करीब 500 साल पहले भविष्यमालिका नाम की पुस्तक में संत अच्युतानंद दास महाराज ने कई भविष्यवाणियां लिखी थीं. इन भविष्यवाणियों में जगन्नाथ पुरी मंदिर का विशेष उल्लेख मिलता है.
पहली भविष्यवाणी
जब कलयुग अपने चरम पर होगा, तब भगवान जगन्नाथ का अपमान होने लगेगा. लोग धर्म पर सवाल उठाएंगे और मंदिर की परंपराओं में भी अव्यवस्था फैल जाएगी. उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2015 में मूर्ति स्थापना का समय तय होने के बावजूद, यह प्रक्रिया रात में नहीं हो सकी और अगले दिन दोपहर में पूरी हुई, जिसे कुछ लोग इस भविष्यवाणी से जोड़कर देखते हैं.
दूसरी भविष्यवाणी
कहा गया है कि मंदिर के पत्थर अपने आप गिरने लगेंगे. यह मंदिर की कमजोरी नहीं, बल्कि पृथ्वी पर बढ़ते पाप का संकेत होगा. स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार मंदिर से पत्थर गिरने की घटनाएं देखी गई हैं.
तीसरी भविष्यवाणी
मंदिर के पवित्र कल्पवृक्ष (बरगद के पेड़) से जुड़ी है. कहा गया था कि एक भयंकर चक्रवाती तूफान में यह पेड़ गिर जाएगा. वर्ष 2019 में आए चक्रवात के बाद इसे भी सच माना गया.
चौथी भविष्यवाणी
मंदिर के शिखर पर लगे झंडे से संबंधित है. माना जाता है कि यह झंडा कभी हवा से नहीं उड़ता, लेकिन कलियुग में इसके समुद्र में गिरने की बात कही गई थी. 2019 में ऐसी घटना होने का दावा किया गया.
पांचवीं भविष्यवाणी
सुदर्शन चक्र से जुड़ी है. कहा गया था कि एक समय ऐसा आएगा जब तेज हवाओं के कारण यह चक्र टेढ़ा हो जाएगा. 2019 के चक्रवात के दौरान इस तरह की बातें भी सामने आईं.
छठी भविष्यवाणी
मंदिर के झंडे में आग लगने की है. कहा गया था कि इसके बाद बड़ी आपदा आएगी. वर्ष 2020 में झंडे में आग लगने की घटना के बाद लोगों ने इसे कोरोना महामारी से जोड़कर देखा.
सातवीं भविष्यवाणी
मंदिर के शिखर पर गिद्ध के बैठने से जुड़ी है. कहा जाता है कि इस मंदिर के ऊपर न तो पक्षी उड़ते हैं और न ही विमान गुजरते हैं, लेकिन कुछ साल पहले गिद्ध के बैठने की घटना को अशुभ संकेत माना गया.
अंतिम भविष्यवाणी
आखिरी भविष्यवाणी रक्त वर्षा से जुड़ी है. कहा जाता है कि कभी-कभी ऐसा प्रतीत हुआ जैसे आसमान से खून की बूंदें गिर रही हों, हालांकि इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो पाई है.
इन सभी भविष्यवाणियों को लोग कलयुग के संकेतों से जोड़ते हैं. माना जाता है कि कलयुग के अंतिम चरण में भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में जन्म लेंगे और उसके बाद सतयुग की शुरुआत होगी.
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