Holika Dahan 2026: होलिका दहन नहीं देखते ये 5 लोग! जानें क्यों होली से पहले ससुराल चली जाती है नई दुल्हन

इस साल होलिका दहन 3 मार्च की मध्यरात्रि होगा और 4 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी. क्या आप जानते हैं कि होलिका दहन की अग्नि देखना पांच लोगों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है.

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इस बार होलिका दहन पर भद्रा काल और चंद्र ग्रहण का साया भी रहेगा. (Photo: ITG) इस बार होलिका दहन पर भद्रा काल और चंद्र ग्रहण का साया भी रहेगा. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:42 AM IST

Holika Dahan 2026: होली का त्योहार आने वाला है. होली का त्योहार मुख्य रूप से दो दिन का होता है. पहले फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होता है. फिर अगले दिन यानी चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर रंग वाली होली खेली जाती है. इस साल होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा. होलिका दहन पर लोग चौराहे पर लकड़ियों को इकट्ठा करके उसका दहन करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि होलिका दहन की अग्नि देखना पांच लोगों के लिए अशुभ माना जाता है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

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नई दुल्हन
आपने देखा होगा कि हिंदू धर्म में शादी के बाद नई दुल्हन को उसके मायके भेज दिया जाता है. नई दुल्हन कभी अपने ससुराल में होलिका दहन नहीं देखती है. पौराणिक कथा के अनुसार, होलिका का विवाह इलोजी से होना था. लेकिन विवाह से पहले ही होलिका अपने भाई हिरण्यकश्यप के कहने पर उसके पुत्र प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई और भस्म हो गई. कहते हैं कि जब इलोजी की मां बारात लेकर पहुंची और उसने अपनी होने वाली बहु की चिता देखी तो दुख सहन न कर सकी और प्राण त्याग दिए. इसलिए नई दुल्हन होली से पहले ही अपने ससुराल से मायके चली जाती है.

सास-बहु
ऐसी भी मान्यता है कि सास और बहू को साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. कहते हैं कि ऐसा करने से रिश्तों में खटास और मतभेद बढ़ते हैं. सास-बहु के संबंध कभी अच्छे नहीं रहते हैं. गृह क्लेश घर की खुशियों को तबाह कर देता है.

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इकलौती संतान की मां
लोक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की इकलौती संतान होती है, उन्हें भी होलिका दहन देखने से बचना चाहिए. पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त प्रह्लाद अपने पिता हिरण्यकश्प की इकलौती संतान ही थे.

गर्भवती महिलाओं
गर्भवती महिलाओं को भी इस अग्नि अनुष्ठान से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है. उनके लिए होलिका की परिक्रमा करना भी शुभ नहीं माना जाता है. इसका एक वैज्ञानिक कारण यह भी बताया जाता है कि अग्नि का तेज ताप और धुआं उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.

नवजात शिशु
नवजात शिशुओं को भी होलिका दहन स्थल से दूर रखने की परंपरा है. कहते हैं कि जिन चौराहों पर होलिका दहन होता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा ज्यादा सक्रिय रहती है. इसलिए बच्चों को ऐसी जगहों से दूर रखा जाता है.

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