Chandra Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण समाप्त हो चुका है. भारतीय समयानुसार, यह चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहा. दुनिया के कई देशों में यह खगोलीय घटना उपछाया चंद्र ग्रहण के रूप में नजर आई. हालांकि रक्षाबंधन के संयोग में लगा यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं था. इसलिए न तो इसका सूतक काल मान्य था और न ही इसके चलते पूजा-पाठ या किसी दैनिक गतिविधि में कोई बाधा आई. अब अगला चंद्र ग्रहण 20 फरवरी 2027 में लगेगा.
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण समाप्त हो चुका है. इस उपछाया चंद्र ग्रहण का नजारा कई देशों में दिखाई दिया. भारत में यह चंद्र ग्रहण दृश्यमान नहीं था. अब अगला चंद्र ग्रहण 20 फरवरी 2027 को लगेगा.
चंद्र ग्रहण के बाद शरीर, घर और मंदिर का शुद्धिकरण करना जरूरी होता है. हालांकि यह नियम चंद्र ग्रहण दिखाई देने पर ही बहुत जरूरी होता है. फिर भी आप चंद्र ग्रहण के बाद चंद्रमा से जुड़ी चीजों का दान कर सकते हैं. अपने ईष्टदेवों को प्रणाम करें और फिर दूध, चावल, चीनी, आटा या चांदी से निर्मित चीजों का दान कर सकते हैं.
पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि धार्मिक दृष्टिकोण को छोड़ दें तो इस चंद्र ग्रहण का भारत पर कोई खास असर नहीं होगा. इंडोनेशिया, ओमान और बोलीविया जैसे देशों में भूकंप, बाढ़, भूस्खलन आदि प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहेगा. इसलिए इन जगहों पर रहने वालों को विशेष सावधानी बरतनी होगी.
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 05:57 बजे से 9:48 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11.56 बजे से दोपहर 12.48 बजे तक
चौघड़िया मुहूर्त
चर-सामान्य मुहूर्त: सुबह 05:57 बजे से 07:33 बजे तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 07:33 बजे से 09:10 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: दोपहर 12:22 बजे से 01:58 बजे तक
चर-सामान्य मुहूर्त: शाम 05:11 बजे से 06:47 बजे तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: रात 09:35 बजे से 10:59 बजे तक
आज रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग बना हुआ है. संयोगवश बहन और बुआ के कारक ग्रह बुध भी आज अस्त है. सूर्य से लगभग 12 डिग्री की दूरी तक बुध को अस्त माना जाता है. ऐसे में अस्त बुध का प्रभाव संवाद और पारिवारिक रिश्तों पर दिखाई दे सकता है.
ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा और राहु कुंभ राशि में एकसाथ रहेंगे. सूर्य और केतु सिंह राशि में साथ होंगे. ऐसे में चंद्र ग्रहण के दौरान ग्रहों का प्रभाव तो निश्चित तौर पर होगा. इसलिए कुछ विशेष सावधानी बरतें. चंद्र ग्रहण के समय यात्रा में सावधानी बरतें. वाहन तेज न चलाएं या जल्दबाजी न दिखाएं. बड़े निर्णय सोच-समझकर लें. जोखिमभरे कार्यों से बचें.
ज्योतिषाचार्य डॉ. पूजा भाटिया ने पंचांग देखकर बताया कि इस चंद्र ग्रहण का भारत पर कोई प्रभाव नहीं है. ऐसे में भाई को राखी बांधने का सबसे अच्छा समय सुबह 05.57 बजे से लेकर सुबह 09.48 बजे तक रहने वाला है. इसके बाद आप दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांध सकती हैं. अभिजीत मुहूर्त 11.56 बजे से 12.48 बजे तक है. हालांकि उदया तिथि के कारण आप पूरे दिन राखी बांध सकते हैं.
चंद्र ग्रहण के समय में अधिक से अधिक "नमः शिवाय" का जाप करें. चाहें तो चंद्रमा के मंत्र का भी जाप कर सकते हैं. ग्रहण के बाद निर्धन को सफेद वस्तुओं का दान करें. इस दौरान आप चीनी, चावन, आटा, दूध, दही, सफेद मिठाई या फिर चांदी से निर्मित चीजों का दान कर सकते हैं.
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण के साथ-साथ एक और दुर्लभ संयोग बना हुआ है. सिंह राशि में सूर्य, केतु और अस्त बुध की युति बन रही है. यह दुर्लभ स्थिति मेष, मिथुन, कर्क और कन्या राशि के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है.
ज्योतिषविद आचार्य राज मिश्रा ने बताया कि चंद्र ग्रहण जब किसी देश के चौथे भाव में घटित होता है तो उसके परिणाम भयंकर हो सकते हैं. इसका मतलब है कि ग्रहण का प्रभाव वहां के लोगों को उकसाएगा. भूकंप, जल प्रलय और अन्य आपदाओं की संभावना रहेंगी.
यहां देखें चंद्र ग्रहण का समय और रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त-
पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यह उपछाया चंद्र ग्रहण है, जिसमें ग्रहण जैसा आभास होता है. इस तरह की स्थिति में किसी तरह के नियम लागू नहीं होते हैं. और न ही कोई सूतक लागू होता है. इसलिए भारत में लोग अपना सामान्य जीवन जी सकते हैं. भोजन, विश्राम या पूजन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा. गर्भवती महिलाओं को भी किसी तरह के चिंता करने की जरूरत नहीं है. बच्चे-बुजुर्ग भी आम दिनों की तरह रहन-सहन रख सकते हैं.
चंद्र ग्रहण उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है. इसके अलावा, प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से और अटलांटिक महासागर से भी इसे देखा जा सकेगा. वियना, पेरिस, रोम, बर्लिन, प्राग, ब्रुसेल्स, मैड्रिड, लंदन, रियो डी जेनेरियो, न्यूयॉर्क, जोहान्सबर्ग और ब्यूनस आयर्स जैसे शहरों में भी यह दिखने वाला है.
ज्योतिषविद आचार्य राज मिश्रा के मुताबिक, अगर चंद्र ग्रहण दिन के प्रथम प्रहर में लग रहा है तो जिन देशों में यह दिख रहा है या जिस राशि में लगा है, वहां उसका असर करीब 10 दिन तक रहता है. दूसरे प्रहर में लगे चंद्र ग्रहण का प्रभाव 10-20 दिन रहता है. जबकि अंतिम प्रहर में घटित चंद्र ग्रहण का प्रभाव 20-30 दिन तक रहता है.
चंद्र ग्रहण शुरू- सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर
चंद्र ग्रहण समाप्त- दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर
चंद्र ग्रहण पीक (मध्य काल)- सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर
पूर्ण चंद्र ग्रहण: जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया से ढक जाता है तो इस खगोलीय घटना को पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं.
आंशिक चंद्र ग्रहण: जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में नहीं होते हैं और चंद्रमा का कुछ हिस्सा ही पृथ्वी की छाया से ढकता है तो इसे खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहते हैं.
उपछाया चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया से होकर गुजरता है तो वो थोड़ा धुंधला नजर आता है. इस घटना को उपछाया चंद्र ग्रहण कहते हैं.
ज्योतिषाचार्य वान्या आर्या ने बताया कि जिन भी लोगों पर इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहने वाला है, उन्हें कुछ खास उपाय जरूर करने चाहिए. 'ओम सोम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करें. इस दौरान योग, साधना या गायत्री मंत्र का जाप भी लाभकारी हो सकता है.
ज्योतिषाचार्य वान्या आर्या ने बताया कि जिन देशों या क्षेत्रों में यह चंद्र ग्रहण दिखाई दे रहा है, वहां लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी. उन पर इस चंद्र ग्रहण का बड़ा असर रहेगा. दूसरा, जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है. या शनि, राहु व केतु जैसे आक्रामक ग्रहों के साथ युति कर रहा है, उन्हें भी थोड़ा ख्याल रखना होगा. चूंकि यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगा है. इसलिए कुंभ राशि और अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए.
मेष- ॐ अं अंगारकाय नमः या ॐ हं हनुमते नमः
वृषभ- ॐ शुं शुक्राय नमः या ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः
मिथुन- ॐ बुं बुधाय नमः या ओम गं गणपतये नमो नम:
कर्क- ॐ सों सोमाय नमः या फिर महामृत्युंजय मंत्र
सिंह- ॐ घृणि सूर्याय नमः. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ.
कन्या- ॐ बुं बुधाय नमः या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
तुला- ॐ शुं शुक्राय नमः
वृश्चिक- ॐ कुं कुजाय नमः, ॐ मंगलय नमः या सुंदरकांड का पाठ
धनु- ॐ बृं बृहस्पतये नमः या अपना गुरु मंत्र
मकर- ॐ शं शनैश्चराय नमः
कुंभ- ॐ शं शनैश्चराय नमः या ओम नम- शिवाय
मीन- ॐ बृं बृहस्पतये नमः या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ज्योतिषविदों का कहना है कि यह चंद्र ग्रहण जिस स्थान पर दिखाई देता है, उसका प्रभाव वहीं पड़ता है. चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा है. इसलिए यहां होने वाले शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान और त्योहार पर किए जाने वाले संस्कारोंं पर इसका कोई असर नहीं होगा. रक्षाबंधन का त्योहार भी इस चंद्र ग्रहण से पूरी तरह मुक्त रहने वाला है.
पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि चंद्र ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए एक विशेष उपाय जरूर करें. 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण शुरू होने से पहले स्नानादि से निवृत्त होकर राहु-केतु के मंत्रों का जाप करें. फिर ग्रहण समाप्त होने के बाद राहु और केतु से जुड़ी चीजों का दान करें. अगर हम राहु और केतु से जुड़े ये उपाय कर लें तो चंद्रमा और सूर्य अपने आप आपको शुभ फल देने लगेंगे.
1. ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः
2. ॐ सोम सोमाय नमः
3. ॐ चन्द्रशेखराय नमः
4. ॐ नमः शिवाय
5. "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
6. ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
इस साल रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण और पंचक लगने वाला है. पंचक 27 अगस्त से 1 सितंबर तक रहेगा. हालांकि गुरुवार से शुरू हो रहे इस पंचक को गुरु पंचक या सामान्य पंचक कहा जाता है. इस पंचक का त्योहार पर कोई बुरा असर नहीं होता है.
भारत में ग्रहण लगने वाले सूतक लागू होते ही देश के सभी छोटे-बड़े मंदिर बंद कर दिए जाते हैं, क्योंकि सूतक और ग्रहण काल में पूजा-पाठ वर्जित होती है. ग्रहण काल खत्म होने पर विशेष पूजा-अर्चना के बाद ही मंदिरों के द्वार खोले जाते हैं. हलांकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा है. इसलिए न तो सूतक लागू होगा और न ही मंदिरों के कपाट बंद होंगे.
चंद्र ग्रहण के समय से लेकर रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त तक का समय यहां देखें-
चंद्र ग्रहण के समय में अधिक से अधिक "नमः शिवाय" का जाप करें. चाहें तो चंद्रमा के मंत्र का भी जाप कर सकते हैं. ग्रहण के बाद निर्धन को सफेद वस्तुओं का दान करें. इस दौरान आप चीनी, चावन, आटा, दूध, दही, सफेद मिठाई या फिर चांदी से निर्मित चीजों का दान कर सकते हैं.
ग्रहण काल में मंत्र जाप, स्तुति और ध्यान करना विशेष लाभकारी होता है. इस समय की गई पूजा व प्रार्थना निश्चित रूप से स्वीकार होती है. अगर कोई मंत्र सिद्ध करना चाहते हैं या दीक्षा लेना चाहते हैं तो वह भी ग्रहण काल में ये काम करना भी शुभ होता है. ग्रहण के बाद स्नान करके किसी निर्धन को कुछ न कुछ दान जरूर करें.
नहीं, 28 अगस्त की सुबह लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है. इसलिए इसका सूतक काल भारत में लागू नहीं होगा. चंद्र ग्रहण जब भारत में दिखाई देता है तो उसका सूतक काल यहां 9 घंटे पहले ही लागू हो जाता है.
मीन राशि
मीन राशि वालों को अगले 15 दिनों तक स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान देना होगा. लंबी दूरी की यात्रा से बचें और अपनी आय के अनुसार ही खर्च करने की कोशिश करें. विदेश से जुड़े किसी काम को भी कुछ समय के लिए टालना बेहतर बताया गया है. धैर्य के साथ अपनी दिनचर्या जारी रखें.
उपाय- शाम को भगवान शिव की पूजा के बाद सफेद चीजों का दान करें.
कुंभ राशि
कुंभ राशि में ही चंद्र ग्रहण लगने की बात कही गई है, इसलिए इस राशि वालों को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. अगले एक महीने तक प्रोफेशन और आर्थिक मामलों में कोई बड़ा जोखिम भरा फैसला न लें. प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने का निर्णय भी टालें. स्वास्थ्य का ध्यान रखें और लंबी दूरी की यात्रा से बचें.
उपाय- शिव मंदिर में कच्चे दूध और गंगाजल से अभिषेक करें.
मकर राशि
मकर राशि वालों को इस दौरान अपने काम, मन और वाणी पर विशेष नियंत्रण रखना होगा. किसी भी तरह की शंका को मन में न पालें. योजनाबद्ध तरीके से काम करें और अनुशासन बनाए रखें. जल्दबाजी के बजाय धैर्य के साथ फैसले लेना आपके लिए बेहतर रहेगा. ग्रहण को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं बताई गई है.
उपाय- शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल चढ़ाएं.
धनु राशि
धनु राशि वालों को इस ग्रहण से डरने या घबराने की जरूरत नहीं बताई गई है. अपने काम और प्रोफेशन पर पूरा ध्यान दें. नकारात्मक विचारों को हावी न होने दें. अनजान लोगों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचें. स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी होगा. अगले 15 दिनों में संयम के साथ आगे बढ़ें.
उपाय- 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें.
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों को अगले 15 दिनों में प्रॉपर्टी से जुड़े बड़े फैसले लेने से बचना होगा. लंबी दूरी की यात्रा को भी टालना बेहतर रहेगा. इस दौरान अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें और किसी भी काम में जल्दबाजी न करें. धैर्य के साथ अपनी दिनचर्या और कामकाज आगे बढ़ाएं.
उपाय- ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए रोज हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी गई है.
तुला राशि
तुला राशि वालों को अगले 15 दिनों में अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा. अपनी योजनाओं को मजबूत बनाकर आगे बढ़ें और छोटी-छोटी बातों पर लोगों से मतभेद न बढ़ाएं. संतान और बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान देना जरूरी रहेगा. हालांकि, इस ग्रहण को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं बताई गई है.
उपाय- रोज मां दुर्गा की आरती करें.
कन्या राशि
कन्या राशि वालों को अगले 15 दिन बेचैनी और तनाव से बचना होगा. इस अवधि में कोई बड़ा फैसला लेने से पहले परिवार या शुभचिंतकों की सलाह लें. शेयर बाजार, प्रॉपर्टी या दूसरे निवेश से जुड़े निर्णय कुछ समय के लिए टालना बेहतर रहेगा. नौकरी बदलने या छोड़ने में भी जल्दबाजी न करें. स्वास्थ्य और खानपान पर ध्यान दें.
उपाय- शिव मंदिर में गंगाजल से अभिषेक करना उपाय बताया गया है.
सिंह राशि
सिंह राशि वालों को ग्रहण से बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं बताई गई है. फिर भी अगले 15 दिनों में कार्यक्षेत्र से जुड़े बड़े फैसले लेने से बचें. प्रॉपर्टी के मामलों में जल्दबाजी न करें. जीवनसाथी और बिजनेस पार्टनर के साथ विवाद से बचना जरूरी होगा. अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें.
उपाय- रोज 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें.
कर्क राशि
कर्क राशि वालों को अपने भावनात्मक पक्ष पर नियंत्रण रखना होगा. नकारात्मक सोच के साथ कोई बड़ा फैसला न लें. नौकरी बदलने या छोड़ने का निर्णय भी फिलहाल टालना बेहतर रहेगा. स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और जरूरी दवाएं समय पर लें. अगले 15 दिन धैर्य से काम करना जरूरी होगा.
उपाय- शिव मंदिर जाकर जल और थोड़ा कच्चा दूध अर्पित करें.
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना होगा. गैरजरूरी बातों में समय न गंवाएं और जोखिम वाले निवेश से बचें. परिवार के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें और पारिवारिक परंपराओं का पालन करें. धार्मिक कार्यों में भाग लेना आपके लिए शुभ माना गया है. अगले 15 दिनों में अनुशासन के साथ काम करें.
उपाय- ग्रहण के बाद कुछ दिन तक रोज भगवान गणेश की आरती करें.
वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों को कार्यक्षेत्र में धैर्य बनाए रखना होगा. नौकरी या कारोबार से जुड़े किसी काम में जल्दबाजी करने से बचें. आर्थिक मामलों में भी सोच-समझकर फैसला लें. बड़े निर्णय लेने से पहले परिवार की सलाह लेना बेहतर रहेगा. अगले 15 दिन पेशेवर मामलों में संयम के साथ आगे बढ़ें.
उपाय- ग्रहण प्रभाव से बचने के लिए रोज दुर्गा चालीसा का पाठ करने की सलाह दी गई है.
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए अगले 15 दिन खर्चों को लेकर सावधानी बरतने वाले रहेंगे. आय-व्यय में संतुलन बनाए रखें. आर्थिक मामलों में कोई बड़ा जोखिम न लें. करियर से जुड़ा फैसला जल्दबाजी में न करें. विवाद और अहंकार से बचें. धैर्य के साथ काम करना आपके लिए बेहतर रहेगा.
उपाय- शिव मंदिर में जल चढ़ाएं और 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें.
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने जा रहा है. कुंभ राशि के स्वामी शनि हैं, जिस पर साढ़ेसाती का तीसरा चरण भी चल रहा है. जबकि शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु को माना गया है. ऐसे में ज्योतिषविदों ने कुंभ राशि के जातक और शतभिषा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों को थोड़ा सावधान रहने की सलाह दी है.
ज्योतिषाचार्य डॉ. पूजा भाटिया ने पंचांग देखकर बताया कि चंद्र ग्रहण के साए में मनाए जा रहे रक्षाबंधन पर सुबह के वक्त राखी बांधना बेहद शुभ रहेगा. बहनें सुबह 05.57 बजे से लेकर सुबह 09.48 बजे तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में राखी बांध सकती हैं. हालांकि उदया तिथि के कारण आप पूरे दिन राखी बांध सकते हैं. लेकिन सुबह का मुहूर्त सबसे शुभ रहेगा.
इस साल सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण के साथ-साथ भद्रा का संयोग भी रहने वाला है. हालांकि इस भद्रा काल का रक्षाबंधन पर कोई प्रभाव नहीं होगा. दरअसल, सावन पूर्णिमा 27 और 28 अगस्त दोनों दिन रहेगी. रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा. जबकि भद्रा 27 अगस्त को लगेगी. भद्रा 27 अगस्त को सुबह 08.31 बजे शुरू होगी और 27 अगस्त को रात 08.54 बजे समाप्त हो जाएगी. यानी रक्षाबंधन का त्योहार पूरी तरह भद्रा रहित रहेगा.
साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण सावन पूर्णिमा के संयोग में लग रहा है. इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके भाग्योदय की कामना करती हैं. बदले में भाई बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है.