ट्रेन के टॉयलेट में 1 घंटे तक फंसे रहे वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज, गेट तोड़कर बचाई गई जान

राजस्थान की पूर्व सीएम व भाजपा नेता वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज  कोटा–श्रीगंगानगर ट्रेन के बाथरूम में 58 मिनट तक फंसे रहे. कुंडी खराब होने के कारण वे 58 मिनट तक बदबू और घुटन में फंसे रहे. मदद के लिए उन्होंने बेटे और भाई से रेलवे अधिकारियों को सूचना दिलाई. रेलवे कर्मचारियों ने गेट तोड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला. महेंद्र ने बताया कि छोटे बाथरूम में फंसना मानसिक रूप से डरावना था और मोबाइल फोन ने थोड़ी उम्मीद बनाए रखी.

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वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज 1 घंटे तक ट्रेन के टॉयलेट में फंसे रहे. (Photo: ITG) वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज 1 घंटे तक ट्रेन के टॉयलेट में फंसे रहे. (Photo: ITG)

विशाल शर्मा

  • जयपुर,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज के साथ एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. वे कोटा–श्रीगंगानगर ट्रेन में सफर के दौरान अचानक ट्रेन के बाथरूम में फंस गए. करीब 58 मिनट तक वे बदबू और घुटन भरे हालात में मदद का इंतज़ार करते रहे, जिसके बाद रेलवे कर्मचारियों ने गेट तोड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला.

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बाथरूम में बदबू और घुटन से हुए परेशान
घटना 30 जनवरी की है, जब महेंद्र भारद्वाज ट्रेन से जयपुर आ रहे थे. यात्रा के दौरान वे शौच के लिए ट्रेन के बाथरूम में गए, लेकिन अंदर लगी कुंडी खराब हो गई और दरवाज़ा खुलने का नाम नहीं ले रहा था. उन्होंने खुद बाहर निकलने की कई कोशिशें कीं, मगर नाकाम रहे. समय बीतने के साथ बाथरूम में बदबू और घुटन बढ़ने लगी, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी. हालात बिगड़ते देख उन्होंने जोर-जोर से आवाज़ लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुना. 

कैसे हुआ रेलवे से संपर्क?
इसके बाद महेंद्र भारद्वाज ने अपने बेटे दिव्यांश को फोन कर पूरी स्थिति बताई. बेटे ने रेलवे हेल्पलाइन पर संपर्क करने की सलाह दी, लेकिन शुरुआत में वहां भी संपर्क नहीं हो सका. फिर उनके भाई हरीश ने रेलवे अधिकारियों को सूचना दी, तब जाकर रेलवे कर्मचारी हरकत में आए. रेलवे कर्मचारियों ने करीब 10 मिनट तक गेट खोलने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. आखिरकार मजबूरी में बाथरूम का दरवाज़ा तोड़ा गया और महेंद्र भारद्वाज को बाहर निकाला गया. पूरी प्रक्रिया में कुल 58 मिनट का वक्त लगा.

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महेंद्र भारद्वाज ने बताई 58 मिनट की कहानी
इस घटना के बाद महेंद्र भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की. उन्होंने लिखा कि ये 58 मिनट उनके लिए बेहद डरावने थे. दो बाई दो फीट के बाथरूम में जब दरवाज़ा नहीं खुला और दम घुटने लगा, तो वे मानसिक रूप से टूटने लगे और अवसाद की ओर बढ़ने का एहसास हुआ. हालांकि मोबाइल फोन उनके पास था, जिससे थोड़ी उम्मीद बनी रही. उन्होंने यह भी बताया कि गेट तोड़ते वक्त यह आशंका थी कि दरवाज़ा उनके ऊपर गिर सकता है, लेकिन अगर गेट नहीं तोड़ा जाता तो घुटन के कारण जान जाने का खतरा था. सौभाग्य से समय रहते उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

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