जन्म लेते ही छूटा ममता का आंचल...सिस्टम की लापरवाही के चलते कोई नवजात दादी के तो कोई नानी के सहारे

राजस्थान के कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में अब तक 4 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई महिलाएं गंभीर हालत में भर्ती हैं. इस घटना के बाद कई नवजात बच्चे जन्म लेते ही मां की ममता से दूर हो गए हैं. कुछ बच्चों की मां जिंदगी की जंग लड़ रही हैं, तो कुछ हमेशा के लिए दुनिया छोड़ चुकी हैं.

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डॉक्टरों की लापरवाही से लोगों में गुस्सा. (photo: Screengrabs) डॉक्टरों की लापरवाही से लोगों में गुस्सा. (photo: Screengrabs)

चेतन गुर्जर

  • कोटा,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:54 PM IST

दुनिया भर में जहां 10 मई को मदर्स डे मनाया गया. वहीं कोटा के सरकारी अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है. न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कथित सिस्टम की लापरवाही के बाद आधा दर्जन से ज्यादा नवजात बच्चे अपनी मां की ममता से दूर हो गए हैं. किसी की मां जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रही है, तो किसी की मां इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ चुकी है.

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जन्म लेते ही जिन बच्चों को मां की गोद और पहला स्पर्श मिलना चाहिए था, वे आज अस्पताल के वार्डों और घरों में अपनों के सहारे पल रहे हैं. इन मासूमों को शायद अभी यह एहसास नहीं है कि उनके जन्म के साथ ही सिस्टम की लापरवाही ने उनसे मां की छांव छीन ली है.

पैदा होते ही छिन गया मां का साया
संभाग के सबसे बड़े न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला लगातार गंभीर बना हुआ है. अब तक 4 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि 10 महिलाएं अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं. जिन महिलाओं की हालत नाजुक है, उनके नवजात बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है. वहां अस्पताल स्टाफ और परिजन मिलकर बच्चों की देखभाल कर रहे हैं.

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वहीं जिन महिलाओं की मौत हो चुकी है, उनके नवजात अब घरों में दादी, नानी, मौसी और बुआ की गोद में पल रहे हैं. परिवार के लोग बच्चों को संभालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मां की कमी हर पल महसूस हो रही है. डॉक्टरों के मुताबिक जन्म के शुरुआती छह महीने तक मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन इन बच्चों को यह हक भी नहीं मिल पा रहा.

दादी, बुआ और मौसी के सहारे पल रहे मासूम
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार भी अलर्ट मोड पर है. ऊर्जा मंत्री, शिक्षा मंत्री, कलेक्टर और संभागीय आयुक्त अस्पताल में कैंप किए हुए हैं. एक और महिला की हालत बिगड़ने पर उसका डायलिसिस भी कराया गया. सरकार ने मामले में कार्रवाई करते हुए कुछ डॉक्टरों पर एक्शन लिया है. वहीं कांग्रेस ने भी जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित कर अस्पताल पहुंचकर हालात का जायजा लिया.

अनंतपुरा निवासी पायल की मौत के बाद उसका नवजात बच्चा अब दादी, बुआ और मौसी के सहारे पल रहा है. परिवार का कहना है कि बच्चा दिन-रात रोता रहता है और उसे पाउडर दूध के सहारे पाला जा रहा है. मां की गोद और स्पर्श की कमी को पूरा करना परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.

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आखिर इन मासूमों को कब मिलेगा इंसाफ?
इसी तरह मृतका ज्योति का नवजात अभी शिशु रोग विभाग में भर्ती है. पत्नी की मौत के बाद पति रवि हरिद्वार गए हुए हैं, जबकि बच्चे की देखभाल बुजुर्ग दादा-दादी कर रहे हैं. करीब एक साल पहले ही रवि और ज्योति की लव मैरिज हुई थी.बेटे के जन्म से परिवार में खुशियां आई थीं, लेकिन कुछ ही दिनों में मातम छा गया.

अस्पताल प्रशासन और सरकार जांच की बात कर रहे हैं, कार्रवाई की उम्मीद भी जताई जा रही है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं है कि जिन नवजात बच्चों ने जन्म लेते ही अपनी मां को खो दिया, उन्हें आखिर इंसाफ कैसे मिलेगा?

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