15 अगस्त को पीएम मोदी ने देश की चुनौतियों का जिक्र करते हुए 'दिमागी नक्सल' वर्ग से सावधान रहने की नसीहत दी थी. पीएम ने खासकर युवा पीढ़ी को ऐसे वर्ग से बचाने की बात कही. इसे लेकर पहले तो जेन-जी आंदोलन का चेहरा बने सीजेपी ने ऐतराज जताया फिर अचानक पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम् ने खुद को दिमागी नक्सली बताकर गर्व किया. इसके बाद महबूबा मुफ्ती से केजरीवाल तक सबने खुद को दिमागी नक्सली घोषित करना शुरू कर दिया. ऐसे में सवाल है कि विपक्षी दल खुद को क्यों दिमागी नक्सली साबित करने पर तुले हैं? देखें दंगल.