नंदीग्राम उपचुनाव TMC के लिए बन रहा है बंगाल का अगला 'फलता'

फलता के चुनाव नतीजे का साइड इफेक्ट अभी से नंदीग्राम में देखने को मिल रहा है. खबर आई है कि टीएमसी के दो-दो नेताओं ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया है - फलता में तो जहांगीर खान ने वोटिंग से पहले कदम पीछे खींच लिए थे, नंदीग्राम में तो पहले से ही हड़कंप मचा हुआ है.

Advertisement
तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु बनर्जी. (Photo: PTI) तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु बनर्जी. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:25 AM IST

नंदीग्राम का चुनाव मैदान तृणमूल कांग्रेस के लिए फिर से मुसीबत बनने जा रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे नंदीग्राम तृणमूल कांग्रेस के लिए अगला फलता साबित होने जा रहा हो. पहले नंदीग्राम और फिर भवानीपुर में तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी को शिकस्त देने वाले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम को फलता की तरह जीतना चाहते हैं.  

Advertisement

तृणमूल कांग्रेस के हाथ से पश्चिम बंगाल की सत्ता फिसल जाने के बाद से लगातार नई मुश्किलें सामने आ रही हैं. अब इससे बड़ी मुसीबत क्या होगी कि जिस पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने पूरे 15 साल तक शासन किया, वहां विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तृणमूल कांग्रेस को उम्मीदवार ही न मिले. नंदीग्राम को लेकर ऐसी ही खबर आई है.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नंदीग्राम विधानसभा सीट छोड़ देने से वहां उपचुनाव होना है. उपचुनाव की तारीख अभी नहीं आई है, लेकिन तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है. तृणमूल कांग्रेस भी नंदीग्राम उपचुनाव की तैयारी कर रही है, और भारतीय जनता पार्टी भी. तृणमूल कांग्रेस जिन्हें नंदीग्राम से चुनाव लड़ाना चाहती है, रिपोर्ट के मुताबिक, वे एक एक कर इनकार करते जा रहे हैं. 

एक तरफ तृणमूल कांग्रेस को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं, दूसरी तरफ शुभेंदु अधिकारी बीजेपी कार्यकर्ताओं से नंदीग्राम में भी फलता जैसी ही जीत की सौगात चाहते हैं. 

Advertisement

तृणमूल कांग्रेस के लिए नंदीग्राम में नया संग्राम

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत हासिल की थी. भवानीपुर और नंदीग्राम. भवानीपुर अपने पास रखकर शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया है. नंदीग्राम में अब उपचुनाव होना है, और तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. अभी उपचुनाव की तारीख नहीं आई है. 

नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने पबित्र कर को चुनाव लड़ाया था. कभी शुभेंदु अधिकारी ने पबित्र कर को 9,665 वोटों के अंतर से हराया था. पांच साल पहले नंदीग्राम में ही शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से शिकस्त दी थी. भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी की हार का अंतर 15,105 वोट था - पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के बाद नंदीग्राम पहुंचे शुभेंदु अधिकारी अपने समर्थकों से कहा कि जिस तरह फलता में बीजेपी को एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत मिली है, नंदीग्राम में भी वो वैसी ही जीत चाहते हैं. 

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के दो नेताओं ने नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है. वजह जो भी हो. चाहे वह फालता और भवानीपुर के नतीजे हों, या फिर कुछ और. फालता में तो टीएमसी उम्मीदवार ने वोटिंग से पहले ही कदम पीछे खींच लिए थे. 

Advertisement

नंदीग्राम से चुनाव लड़ने से इनकार करने वाले एक नेता तो पबित्र कर ही हैं. पबित्र कर नवंबर, 2020 में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में चले गए थे. 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी पर जीत दिलाने में पबित्र कर की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. 

2026 के विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी के उम्मीदवारों की घोषणा होने से कुछ ही देर पहले पबित्र कर ने बीजेपी छोड़कर घर वापसी कर ली. तब पबित्र कर ने कहा था कि वो बीजेपी और उसकी नीतियों से निराश होकर टीएमसी में वापस लौटे हैं. पबित्र कर और शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले को गुरु और चेले की लड़ाई के रूप में देखा गया. नतीजे आए तो पबित्र कर चुनाव हार चुके थे. हार के बाद पबित्र कर और उनकी पत्नी ने राजनीति से संन्यास की घोषणा ही कर डाली. 

फिर भी टीएमसी की तरफ से पबित्र कर से नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर इनकार कर दिया. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में पबित्र कर कहते हैं, 'कुछ लोगों ने संपर्क किया था. मैं फिर से नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ सकता. सवाल ही पैदा नहीं होता.'

ऐसा ही जवाब टीएमसी की एक और नेता ने भी दिया है. शेख सुफियान तृणमूल कांग्रेस की सीनियर और स्थानीय नेता हैं. शेख सुफियान 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की एजेंट भी रह चुके हैं. नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर शेख सुफियान कहते हैं, 'नंदीग्राम से मैं 2006 में ही चुनाव लड़ा था. उसके बाद टीएमसी में किसी ने मुझसे चुनाव लड़ने के लिए नहीं कहा. अब मेरी चुनावों में कोई दिलचस्पी नहीं है. परिवार की सलाह पर मैं सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रहा हूं.' 

Advertisement

2006 का चुनाव शेख सुफियान सीपीआई के शेख मोहम्मद इलियास से हार गए थे. हालांकि, बाद में शेख मोहम्मद इलियास को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस्तीफा देना पड़ा था. शेख मोहम्मद इलियास के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में टीएमसी ने शेख सुफियान को टिकट नहीं दिया. टीएमसी के टिकट पर फिरोजा बीबी ने सीपीआई के परमानंद भारती को शिकस्त देकर जीत हासिल कर ली. 

नंदीग्राम और शुभेंदु अधिकारी

ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने से दो साल पहले ही 2009 के उपचुनाव में नंदीग्राम की सीट तृणमूल कांग्रेस को मिल गई थी. 2016 में शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे और मंत्री बने. लेकिन, पांच साल बाद ही शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम में न सिर्फ बीजेपी के उम्मीदवार बन गए, बल्कि ममता बनर्जी को भी वहीं से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर कर दिया. ममता बनर्जी भी चैलेंज स्वीकार कर मैदान में उतरीं, लेकिन चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा.

मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार नंदीग्राम पहुंचे शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम कॉलेज ग्राउंड में समर्थकों से कहा कि जिस तरह फलता में बीजेपी को एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत मिली है, उसी तरह की जीत नंदीग्राम में भी चाहिए. शुभेंदु अधिकारी ने कार्यकर्ताओं से संगठन को और मजबूत करने की अपील की.

Advertisement

नंदीग्राम के लोगों से शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भले ही वो दूसरी सीट से विधायक हों, लेकिन उनका जुड़ाव नंदीग्राम से बना हुआ है, और वहां के विकास के लिए वो लगातार काम करते रहेंगे. शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि नंदीग्राम की राजनीतिक और संगठन से जुड़े कामों की जिम्मेदारी उन्होंने अपने भाई सौमेंदु को सौंपने का फैसला किया है. सौमेंदु अधिकारी कांथी से सांसद हैं. शुभेंदु अधिकारी की घोषणा के मुताबिक, सौमेंदु अधिकारी पंचायत, प्राइवेट एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक वर्क से जुड़े अहम कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे. और, बीजेपी के पांच विधायक - अरुण कुमार दास, शांतनु प्रमाणिक, चंद्रशेखर मंडल, निर्मल खदरा और तपन मैती उनके साथ मिलकर क्षेत्र में काम करेंगे.

टीएमसी को फलता के नतीजे जैसी आशंका है क्या?

4 मई को पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद, 24 मई को आए फलता के रिजल्ट ने तृणमूल कांग्रेस को एक बार फिर जोर का झटका दिया. यह झटका ऐसा है जिसने बीजेपी को जोश से भर दिया है, और तृणमूल खेमे में मायूसी छाई हुई है - और लगता है नंदीग्राम उपचुनाव में उसी का साइड इफेक्ट देखने को मिल रहा है. 

फलता, असल में, तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है. फलता, असल में, अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में ही आता है, और तृणमूल कांग्रेस महासचिव की जीत में फलता का मैदान वोटिंग से पहले ही छोड़ देने वाले जहांगीर खान का बड़ा हाथ माना जाता रहा है. जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का करीबी भी माना जाता है. 

Advertisement

जहांगीर खान के बीजेपी के आगे चुनाव मैदान छोड़ देने से तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी गुस्सा है. जहांगीर खान के कदम पीछे खींच लेने पर टीएमसी विधायकों ने सवाल उठाया है. टीएमसी विधायक पूछ रहे हैं, पार्टी विरोधी आचरण के बावजूद जहांगीर खान को सस्पेंड क्यों नहीं किया गया?

अब फलता पार्ट - 2 की झलक नंदीग्राम में भी मिलने लगी है - ये सब ममता बनर्जी की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस के लिए किसी भी मायने में ठीक नहीं है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement