पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद INDIA ब्लॉक का स्टेटस अपडेट सामने आया है. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस जो करीब करीब बाहर थी, थोड़ा अंदर आ गई है, और आम आदमी पार्टी थोड़ा अंदर से बिल्कुल बाहर हो गई है.
तमिलनाडु की राजनीति में बदले समीकरणों के साथ ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के इंडिया ब्लॉक में शामिल होने की संभावना जताई गई थी, अब DMK नेताओं के बयान बता रहे हैं कि वे कांग्रेस के पलटी मार लेने से अलग होने का मन बना रहे हैं. चर्चा तो अब डीएमके इंडिया ब्लॉक छोड़कर एनडीए में शामिल होने की भी चल रही है, लेकिन ये सब आसान तो कतई नहीं लगता.
बदले राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस माहौल अपने पक्ष में मानकर चल रही है, और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की बीजेपी सरकार के जल्दी ही गिर जाने का दावा करने लगे हैं.
पश्चिम बंगाल की चुनावी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फिर से इंडिया ब्लॉक की अहमियत समझ में आने लगी है. ममता बनर्जी ने कोलकाता में कहा है कि वो चाहती हैं कि जून के पहले हफ्ते में इंडिया ब्लॉक की बैठक बुलाई जाए, और बैठक में समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों को बुलाया जाए.
ममता सबसे ज्यादा उत्साहित हैं
INDIA ब्लॉक की आखिरी बैठक महिला आरक्षण के मुद्दे पर हुई थी. बैठक में तृणमूल कांग्रेस भी शामिल हुई थी. और, अब तो तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी की तरफ से ही अगली बैठक बुलाने की पहल हुई है - INDIA ब्लॉक को लेकर ममता बनर्जी का रुख जरूरत के हिसाब से बदलता रहा है.
चुनावों के बीच ही महिला आरक्षण बिल पर संसद में इंडिया ब्लॉक को सत्ताधारी बीजेपी को शिकस्त देने में कामयाबी भी मिली थी, लेकिन विधानसभा चुनावों में टीएमसी और डीएमके की हार से बहुत कुछ बदल गया है. इंडिया ब्लॉक में सबसे फायदे में कांग्रेस रही, जिसे केरल में सरकार बनाने का मौका मिल गया.
चुनाव नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी के प्रति राहुल गांधी के रुख में भी बदलाव आया है. पश्चिम बंगाल में चुनाव कैंपेन के दौरान ममता बनर्जी पर राहुल गांधी हमलावर थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के चुनाव हार जाने के बाद कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के सपोर्ट में आ गए. राहुल गांधी कहने लगे कि ममता बनर्जी वोट चोरी का शिकार हुई हैं. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर टीएमसी की 100 सीटें चुरा ली हैं. राहुल गांधी ने कांग्रेस के ही कुछ नेताओं के ममता बनर्जी की हार पर खुश होने को लेकर नसीहत भी दी थी. राहुल गांधी की बदली हुई राय है कि अभी राजनीति करने का वक्त नहीं है.
ममता बनर्जी ने भी फोन करने के लिए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव का आभार जताया था. अखिलेश यादव तो ममता बनर्जी को समर्थन देने के लिए कोलकाता तक गए थे. अखिलेश यादव का एक स्लोगन भी काफी चर्चित हुआ है. बात सीट की नहीं, बात जीत की है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच यह स्लोगन चुनावी गठबंधन की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है.
ममता बनर्जी ने कहा है, हम लड़ने के लिए तैयार हैं. हम अंत तक हार नहीं मानेंगे. बदलते समीकरणों के बीच एक मैसेज देने की कोशिश की जा रही है कि इंडिया ब्लॉक लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार है - लेकिन, पहले यह तो सामने आए कि कौन कौन इंडिया ब्लॉक में है?
क्या स्टालिन एनडीए में जा सकते हैं?
डीएमके नेतृत्व कांग्रेस से बुरी तरह खफा है. स्वाभाविक भी है. कांग्रेस लेफ्ट, वीसीके और आईयूएमएल के साथ तमिलनाडु विधानसभा चुनाव तक डीएमके गठबंधन का हिस्सा हुआ करते थे, नतीजे आने के बाद सब के सब टीवीके सरकार में शामिल हो गए. डीएमके की एक बैठक में कई प्रस्ताव भी पास हुए, जिनमें कांग्रेस जोंक और पीठ में छुरा घोंपने वाला तक कहा गया. डीएमके ने कांग्रेस पर अपने सहयोगियों की मेहनत पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.
पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन का आरोप है कि कांग्रेस ने टीवीके का साथ देकर DMK के साथ विश्वासघात किया है. एक कार्यक्रम में उदयनिधि ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने डीएमके नेता एमके स्टालिन की लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं की मेहनत की वजह से चुनाव जीता, लेकिन बाद में बिना बताए गठबंधन छोड़ दिया.
उदयनिधि स्टालिन का कहना था,डीएमके कार्यकर्ताओं की मेहनत के कारण ही कांग्रेस को 5 विधायक मिले हैं... लोगों ने कांग्रेस को वोट इसलिए दिया क्योंकि वे एमके स्टालिन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे. लेकिन, कुछ पदों के लिए कांग्रेस हमें बताए बिना चली गई... ऐसे लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए... तमिलनाडु की जनता कांग्रेस को इसका जवाब देगी.
डीएमके नेता ने कहा, हमारे नेता एमके स्टालिन ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को अपने कंधों पर उठाया था, लेकिन कांग्रेस ने उसका सम्मान नहीं किया - अब डीएमके के एनडीए में शामिल होने की काफी चर्चा चल रही है, लेकिन क्या डीएमके के लिए ऐसा कर पाना आसान होगा?
चुनावों के दौरान संसद की विशेष बैठक में महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ परिसीमन बिल का डीएमके ने जोर शोर से विरोध किया था. और, बिल के गिर जाने पर अपना चुनाव कैंपेन तक बदल डाला था. संसद में बीजेपी सरकार के बिल गिर जाने को डीएमके ने स्टालिन की जीत के तौर पर पेश किया था.
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुनने में आया है कि बीजेपी ने उन संभावनाओं की तलाश शुरू की है कि क्या डीएमके को संसद में राष्ट्रीय मुद्दों पर साथ खड़े होने के लिए मनाया जा सकता है?
अगर ऐसा होता है, तो डीएमके को परिसीमन जैसे मुद्दों अपना स्टैंड बदलना होगा. बीजेपी के अंदर ही अंदर चल रहे प्रयासों को डीएमके के संसद में अलग बैठने के फैसले से भी बल मिला है. क्योंकि डीएमके अब संसद में कांग्रेस के साथ नहीं बैठना चाहती. डीएमके की तरफ से इसके लिए लोकसभा स्पीकर को पत्र भी लिखा गया है.
सबसे ज्यादा खुश तो कांग्रेस होगी!
लगता है कि डीएमके और आम आदमी पार्टी के इंडिया ब्लॉक से दूरी बना लेने का राहुल गांधी को कोई मलाल नहीं है. और, लगता है ममता बनर्जी का हार के बाद इंडिया ब्लॉक के साथ आना राहुल गांधी को ज्यादा फायदेमंद लग रहा है. आम आदमी पार्टी तो कुछ दिनों से मुद्दों के आधार पर इंडिया ब्लॉक को बाहर से ही सपोर्ट कर रही थी. अब पूरी तरह अलग होने की घोषणा कर दी गई है. AAP नेता संजय सिंह ने मीडिया से कहा है कि इंडिया ब्लॉक 2024 के आम चुनाव के लिए बना था, और उसके बाद आम आदमी पार्टी ने हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा था. हो सकता है, अगले साल होने जा रहे पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऐसा फैसला किया गया हो.
ममता बनर्जी के चुनाव हार जाने का कांग्रेस को एक बड़ा फायदा तो हुआ ही है, विपक्षी खेमे में राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल खत्म हो गए हैं. राहुल गांधी के फिर से बीजेपी की सत्ता को ललकारने की भी यही वजह हो सकती है. राहुल गांधी का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्यादा दिनों तक कुर्सी पर नहीं रह पाएंगे. कांग्रेस की अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की एक बैठक से सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, राहुल गांधी का कहना था कि जो आर्थिक संकट आने जा रहा है उससे सरकार घुटने पर आ जाएगी... धर्म की राजनीति ध्वस्त हो जाएगी. जो दबाव है उसे प्रधानमंत्री मोदी संभाल नहीं पाएंगे. भले ही बीजेपी की सरकार रहे लेकिन मोदी साल भर से ज्यादा प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं रहने वाले हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष अब अगले ढाई साल तक आंदोलन मोड में रहने की तैयारी कर रहा है. और, इसके लिए इंडिया ब्लॉक के बैनर एक बड़ी देशव्यापी यात्रा निकालने की तैयारी है. लेकिन यह यात्रा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जैसी नहीं होगी, क्योंकि यात्रा में इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों के नेता भी शामिल हो सकते हैं. जैसे बिहार चुनाव से पहले वोटर अधिकार यात्रा निकाली गई थी. ध्यान रहे, 2024 के आम चुनाव के पहले कांग्रेस के अकेले न्याय यात्रा निकालने पर विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों ने कड़ी आपत्ति जताई थी.
1. बताते हैं कि विपक्षी गठबंधन मिलकर 2029 के आम चुनाव तक आंदोलन मोड में बने रहना चाहता है.
2. रणनीतिक तौर पर विपक्ष के स्टैंड में थोड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है, जिसमें सिर्फ बीजेपी विरोध पर फोकस नहीं रहेगा. बल्कि, विपक्ष को विकल्प के तौर पर पेश करने की भी कोशिश होगी.
3. प्रस्तावित आंदोलन में ऐसे मुद्दों पर जोर होगा, जो जनता से सीधे सीधे जुड़े हुए हों - क्योंकि 'वोट चोरी' और SIR विरोध का नतीजा तो सामने आ ही चुका है.
4. यह भी माना जा रहा है कि जातीय जनगणना के नतीजों के आधार पर अगला लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी की जा रही है.
मृगांक शेखर