SIR की प्रक्रिया लगता नहीं कि बिना विवाद के देश में कहीं भी पूरी हो पाएगी. कर्नाटक में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर तो राजनीति की बिल्कुल ही उलटी धारा बह रही है. और, पंजाब में तो मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डीके शिवकुमार वाला रास्ता अख्तियार कर लिया है. बिहार से शुरू हुआ SIR पर विवाद पश्चिम बंगाल होते हुए कर्नाटक पहुंचकर अलग ही अंगड़ाई ले रहा है.
हैरानी की बात यह है कि अब तो बीजेपी को भी SIR प्रक्रिया में दिक्कत होने लगी है. वैसे बीजेपी अलग तरीके से मुद्दा उठा रही है. बाकी विपक्षी दलों की तरह बीजेपी सीधे सीधे SIR प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि कर्नाटक में जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उसका विरोध कर रही है. असल में, कर्नाटक में बीजेपी फिलहाल विपक्ष में है.
SIR पर कर्नाटक में डीके शिवकुमार की पहल से पहले तो लगा था कि सब कुछ हंसी खुशी पूरा हो जाएगा. जब विरोध करने वाले खेमे के नेता ही लोगों से हर हाल में एसआईआर कराने की अपील करने लगें, फिर तो किसी को भी ऐसा ही लगेगा. लेकिन, कर्नाटक में भी विवाद हो गया है, और विवाद की वजह चुनाव आयोग में बीजेपी की तरफ से हुई शिकायत है.
पंजाब में भी भगवंत मान कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ही तरह सभी के एसआईआर में हिस्सा लेकर वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं, और लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर एसआईआर में नाम कटे तो मावां-धीयां योजना के लाभ से लोग हाथ धो बैठेंगे.
SIR चुनाव आयोग से बीजेपी की शिकायत
भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (एस) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर कर्नाटक में चल रहे एसआईआर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है, और कर्नाटक में SIR प्रक्रिया तत्काल रोक देने की मांग की है.
एनडीए के प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, एचडी कुमारस्वामी, शोभा करंदलाजे, वी. सोमन्ना, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता सीटी नारायणस्वामी और सांसद कोटा श्रीनिवास पुजारी शामिल थे. नेताओं ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, ऐसे में जिस तेजी से SIR कराया जा रहा है, गंभीर सवाल और संदेह पैदा होते हैं.
1. एनडीए नेताओं का आरोप है कि SIR फॉर्म सामुदायिक भवनों, मस्जिदों और बीएलओ के घरों में बैठकर भरे जा रहे हैं. ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुप भी बनाए गए हैं, जिनके जरिए लोगों को खास जगहों पर पहुंचकर SIR प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है.
2. एनडीए नेताओं का आरोप है कि SIR गाइडलाइन में निर्धारित मानदंडों का पालन किए बिना ही रिश्तेदारों के नाम सत्यापन के लिए स्वीकार किए जा रहे हैं.
3. एनडीए नेताओं का आरोप है कि मुस्लिम आबादी बहुल इलाकों में SIR कराने के लिए धर्म विशेष से जुड़े बीएलओ यानी बूथ लेवल अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है.
4. एनडीए नेताओं ने चुनाव आयोग से निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की मांग की है.
5. एक मांग यह भी है कि अब तक जमा किए गए सभी फॉर्म फिर से घर घर जाकर वेरीफाई कराए जाएं. साथ ही, कर्नाटक के हर जिले में दूसरे राज्यों से केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति किए जाने की चुनाव आयोग से मांग की गई है, ताकि SIR प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और पक्षपात रहित पूरी हो सके.
भगवंत मान भी चले डीके शिवकुमार की राह
अभी कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पत्नी के साथ SIR फॉर्म भरा, और राज्य के सभी लोगों से प्रक्रिया में निश्चित तौर पर हिस्सा लेने की अपील की थी. अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी अपने राज्य के लोगों से वैसी ही अपील कर रहे - और, महज अपील ही नहीं डीके शिवकुमार की ही तरह चेतावनी भी दे रहे हैं.
भगवंत मान ने पंजाब की सभी महिलाओं से कहा है कि SIR का काम चल रहा है, और सभी को निर्धारित फॉर्म भरना होगा, ताकि किसी का नाम वोटर लिस्ट ने कटने न पाए. डीके शिवकुमार ने भी कर्नाटक के लोगों से ऐसी ही अपील की थी. लेकिन, अब बीजेपी अलग ही शिकायत दर्ज करा रही है.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि अगर SIR फॉर्म नहीं भरा गया तो मतदाता सूची में नाम नहीं रह पाएगा. और, अगर मतदाता सूची में नाम नहीं होगा, तो मावां धीयां योजना सहित बाकी सरकारी योजनाओं का लाभ भी लोगों को नहीं मिल पाएगा.
डीके शिवकुमार के बाद भगवंत मान विपक्ष के दूसरे मुख्यमंत्री हैं जो SIR की पंजाब में सिफारिश कर रहे हैं. कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वोट देने के अधिकार को जीवन के अधिकार जैसा बताया था. डीके शिवकुमार ने आगाह भी किया था कि वोटिंग का अधिकार गंवा देने पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है.
डीके शिवकुमार ने साफ शब्दों में चेतावनी जारी कर रखी है कि जो लोग अपना वोटिंग अधिकार खो देंगे, उन्हें भविष्य में सरकारी लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है. डीके शिवकुमार ने इस मामले में पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का उदाहरण दिया था. मुख्यमंत्री का कहना है, सिर्फ वोटर को ही राशन और बाकी सुविधाएं दी जा रही हैं. बोले, कर्नाटक में भी फॉर्म न भरने वालों को गृह ज्योति और गृह लक्ष्मी जैसी गारंटी योजनाओं, पेंशन और बाकी सरकारी लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है - अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी वैसी ही बातें कर रहे हैं.
ताज्जुब की बात यह है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही विपक्ष के 23 राजनीतिक दलों में शामिल हैं, जिन्होंने SIR पर देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है. रिपोर्ट के मुताबिक, CJI जस्टिस सूर्यकांत को भेजे गए पत्र में SIR प्रक्रिया, चुनाव आयोग के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये और चुनाव नतीजों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील की गई है - और यह भी राजनीति का ही आलम है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के ही मुख्यमंत्री हर किसी से SIR प्रक्रिया में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने की अपील कर रहे हैं.
मृगांक शेखर