नितिन नवीन दौर की BJP के 4 नए प्रदेशाध्यक्ष, 4 मिशन, लेकिन पंजाब सबसे अलग

नितिन नवीन ने जिन चार राज्यों में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है, पंजाब में 76 साल के केवल सिंह ढिल्लों को कमान सौंपा जाना, और दिल्ली में सरकार बनने के बाद वीरेंद्र सचदेवा की विदाई महत्वपूर्ण है. पश्चिम बंगाल की जीत के बाद नितिन नवीन के लिए अगला चैलेंज तो पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 है.

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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन. (Photo: PTI) भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:15 PM IST

नितिन नवीन तूफानी दौरे कर रहे हैं. फिलहाल तीन दिन के उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे हैं. अपने दौरे में स्थानीय नेताओं से ग्राउंड रिपोर्ट ले रहे हैं. जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं से पूछ रहे हैं, 'चुनाव कैसे जीतेंगे?' साथ में जीत के नुस्खे और जरूरी हिदायतें भी दे रहे हैं - देहरादून में विधायकों को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल में एहतियात बरतने के निर्देश दिए. उत्तराखंड में नितिन नवीन ने नेताओं को अपनी बात पार्टी फोरम पर ही रखने की सलाह दी है - और कम अंतर से जीती हुई सीटों पर खास जोर देने को कहा है. 

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4 मई को पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद नितिन नवीन ने सबसे पहले पश्चिम बंगाल और असम के नेताओं के साथ मीटिंग की थी. उसके बाद दो दिन के ओडिशा दौरे पर थे. भुवनेश्वर और पुरी में बीजेपी कार्यकर्ताओं से संवाद में बूथ स्तर पर चीजों को दुरुस्त करने को कहा. ओडिशा के बाद नितिन नवीन कर्नाटक गए, और संगठन को लेकर सीनियर नेताओं से विस्तार से विचार विमर्श किया. अब उत्तराखंड में नेताओं के साथ साथ बुद्धिजीवियों और संत समाज से भारतीय जनता पार्टी को लेकर फीडबैक ले रहे हैं.  

बीजेपी संगठन और सरकार दोनों जगह जरूरी तब्दीली करने जा रही है, और उसी क्रम में नितिन नवीन ने चार राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है. दिल्ली के साथ एक चुनावी राज्य पंजाब भी इनमें शामिल है. इस बीच मुख्यमंत्रियों का भी दिल्ली दौरा चल रहा है. असल में 10 जून को दिल्ली में एनडीए मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल होना है. केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कैबिनेट से उनकी भी छुट्टी तय है, क्योंकि एक व्यक्ति एक पद की नीति भी तो लागू रखनी है. 

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नितिन नवीन ने पंजाब में भी नया बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त किया है, 2027 में वहां विधानसभा के चुनाव जो हैं. पश्चिम बंगाल में बीजेपी का सत्ता में आना तो नितिन नवीन की उपलब्धि में दर्ज हो ही चुका है, अब अगली लड़ाई तो पंजाब की ही है. 

पंजाब के मोर्चे पर नई तैनाती

हालिया नियुक्तियों में पंजाब बीजेपी अध्यक्ष के रूप में केवल सिंह ढिल्लों को कमान सौंपा जाना रणनीतिक तौर पर ज्यादा अहम लगता है. नितिन नवीन ने सुनील जाखड़ की जगह केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया है. केवल सिंह ढिल्लों और सुनील जाखड़ में एक कॉमन बात यह है कि दोनों ही कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं. 

केवल ढिल्लों को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता है. कैप्टन अमरिंदर सिंह भी 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे. बड़े कारोबारी होने के साथ ही केवल सिंह ढिल्लों किसान संगठनों से भी सहानुभूति रखते हैं. किसान आंदोलन के दौरान जब कई लोग उनके घर के बाहर धरने पर बैठ गए, तो केवल सिंह ढिल्लों ने उनके लिए चाय-नाश्ते और जरूरी सुविधाओं का इंतजाम कराया था. 

बरनाला से आने वाले 76 साल के केवल सिंह ढिल्लों पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं. 2007 और 2012 में बरनाला से दो बार विधायक भी रह चुके हैं. पंजाब कांग्रेस कमेटी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. लेकिन, 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ दी, और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए. 

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पंजाब में सिख आबादी लगभग 58 फीसदी है, और हिंदू आबादी करीब 38 फीसदी मानी जाती है. माना जा रहा है कि बीजेपी महज शहरी हिंदुओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, और जाट सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों की मदद से सिख समुदाय और गांवों के वोटर तक पहुंचना चाहती है. नितिन नवीन को भी यही उम्मीद होगी कि केवल सिंह ढिल्लों का अनुभव और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी पैठ बीजेपी को मजबूत आधार दे सकती है. 

केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रतिक्रिया है, बरनाला में 2017-2019 और 2024 के चुनावों में कांग्रेस से पराजित हुए बीजेपी नेता केवल सिंह ढिल्लों को बीजेपी अध्यक्ष बनने पर हार्दिक बधाई. सुनील जाखड़ को मेरी हार्दिक संवेदनाएं.

भगवंत मान का कहना है, ईश्वर रवनीत सिंह बिट्टू, मनप्रीत बादल, फतेहजंग बाजवा, तरुण चुघ और अश्वनी शर्मा को यह अपमान सहने की शक्ति प्रदान करें.

नए पंजाब बीजेपी अध्यक्ष की नियुक्ति पर सीनियर पत्रकार प्रभु चावला ने सोशल साइट X पर लिखा है, बीजेपी के लिए 'ओल्ड इज गोल्ड' तभी है, जब वो प्रतिद्वंद्वी खेमे, खासकर कांग्रेस से आयातित हो... 76 साल के केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने अपने उस सिद्धांत को फिलहाल विराम दे दिया है, जिसके तहत 75 वर्ष से अधिक उम्र के वफादार नेताओं को सक्रिय भूमिका से हटाया जाता रहा है.

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प्रभु चावला आगे लिखते हैं, पूर्व कांग्रेसी और जाट सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों, जिनकी घोषित संपत्ति 200 करोड़ रुपये से ज्यादा है, कई चुनाव हार चुके हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि वो 2027 के विधानसभा चुनाव में संपन्न ग्रामीण जाट वोटर को पार्टी के पक्ष में कर सकेंगे. क्या भगवा पार्टी का यह दांव सफल होगा, जबकि वह अब तक अपने ही संघ परिवार से ऐसे नेताओं को तैयार नहीं कर पाई है जो बीजेपी का नेतृत्व कर सकें? क्या बीजेपी का कांग्रेसीकरण अब भी जारी है?

दिल्ली, हरियाणा और त्रिपुरा में भी बदली कमान

पंजाब की ही तरह हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा में भी नए बीजेपी अध्यक्षों की नियुक्ति हुई है. पंजाब में तो अगले साल चुनाव है, लेकिन बाकी जगह अभी काफी वक्त है. त्रिपुरा में अभिषेक देबरॉय को बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है. 44 साल के अभिषेक देबरॉय बूथ स्तर पर रणनीति बनाने के लिए जाने जाते हैं, और जनता के बीच उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है. 

हरियाणा में डॉक्टर अर्चना गुप्ता को बीजेपी की कमान सौंपी गई है. अर्चना गुप्ता से पहले मोहन लाल बडौली हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष हुआ करते थे, और माना जा रहा था कि उनको ही दोबारा मौका मिल सकता है. जब बदले जाने का फैसला हुआ तो अर्चना गुप्ता के अलावा पूर्व मंत्री असीम गोयल भी रेस में शामिल पाए गए. असीम गोयल को मुख्यमंत्री नायब सैनी का करीबी माना जाता है, और अर्चना गुप्ता केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संगठन की भी पसंद बताई जाती हैं. 

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खास बात यह है कि 43 साल बाद कोई महिला हरियाणा बीजेपी की अध्यक्ष बनी हैं. अर्चना गुप्ता से पहले 1980 में डॉ. कमला वर्मा हरियाणा बीजेपी की पहली अध्यक्ष बनाई गई थीं. संयोग से दोनों ही पेशे से डॉक्टर हैं. 

दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष बदला जाना भी काफी दिलचस्प है. पंजाब में तो 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को एक भी सीट न मिलने पर सुनील जाखड़ ने इस्तीफे की पेशकश कर दी थी, लेकिन दिल्ली में तो वीरेंद्र सचदेवा को बीजेपी की सरकार बनने के बाद हटाया गया है. 

केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को वीरेंद्र सचदेवा की ही जगह दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है. बताते हैं कि वीरेंद्र सचदेवा के काम करने के तौर तरीके से दिल्ली बीजेपी के नेता खुश नहीं थे. वीरेंद्र सचदेवा भी सांसद मनोज तिवारी को हटाकर बीजेपी अध्यक्ष बनाए गए थे, और तब भी मनोज तिवारी से नेताओं की नाराजगी ही वजह बताई गई थी. हालांकि, दोनों नेताओं की उपलब्धियों में फर्क यह रहा कि मनोज तिवारी के कार्यकाल में बीजेपी दिल्ली में दहाई का आंकड़ा भी नहीं हासिल कर पाई थी.

कहते हैं हर्ष मल्होत्रा की वीरेंद्र सचदेवा से पुरानी अदावत रही है. हर बार की तरह इस बार भी हर्ष मल्होत्रा ने वीरेंद्र सचदेवा को पछाड़ दिया है, लेकिन सियासी गलियारों में एक सवाल ये भी है कि हर्ष मल्होत्रा का प्रमोशन हुआ है या डिमोशन? 

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पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब चैलेंज

2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद से ही बीजेपी पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करने की कोशिश में जुट गई थी. लेकिन, न तो 2016 में अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष रहते, और न ही 2021 में जेपी नड्डा के हाथ में कमान रहते चुनावी जीत हासिल हो सकी - नितिन नवीन के नाम के साथ तो पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत और सरकार बनाने वाली उपलब्धि दर्ज हो ही चुकी है. 

2019 के लोकसभा चुनाव में जरूर बीजेपी ने ममता बनर्जी को झटका दिया था. बीजेपी ने तब 42 में से पश्चिम बंगाल की 18 लोकसभा सीटें झटक ली थीं. 2024 के आम चुनाव में सीटों की संख्या घटकर 12 पहुंच गई, जब जेपी नड्डा बीजेपी अध्यक्ष हुआ करते थे. 

नितिन नवीन के सामने अभी चुनौतियां तो बहुत सी हैं लेकिन सबसे बड़ा चैलेंज पंजाब चुनाव 2026 है, जहां केवल सिंह ढिल्लों को बीजेपी की सरकार बनवाने की जिम्मेदारी दी गई है. बीजेपी का पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ लंबे समय तक गठबंधन रहा, लेकिन कृषि कानूनों के कारण टूट गया. 2022 के चुनाव में बीजेपी कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ चुनाव मैदान में उतरी थी, लेकिन कुछ खास हासिल नहीं हुआ. और, आम आदमी पार्टी ने सरकार बना ली. देखना है पश्चिम बंगाल से मिला हौसला पंजाब में नितिन नवीन के कितने काम आता है.

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