स्वाति मालीवाल केस बिभव से ज्यादा केजरीवाल को भारी पड़ने वाला है

स्वाति मालीवाल केस में बिभव कुमार का पक्ष लेने का खामियाजा तो अरविंद केजरीवाल को पहले ही भुगत चुके हैं, लोकसभा चुनाव 2024 में AAP का प्रदर्शन मिसाल है - लेकिन सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद और भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.

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स्वाति मालीवाल केस में बिभव कुमार के लिए कितनी फजीहत कराना चाहते हैं अरविंद केजरीवाल? स्वाति मालीवाल केस में बिभव कुमार के लिए कितनी फजीहत कराना चाहते हैं अरविंद केजरीवाल?

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

अरविंद केजरीवाल के सामने खड़ी नई मुसीबत का नाम है, बिभव कुमार. बिभव कुमार कभी दिल्ली के मुख्यमंत्री के निजी सचिव हुआ करते थे, लेकिन उनकी नियुक्ति पर ही सवाल उठ गया, और फिर हटा दिया गया. 

स्वाति मालीवाल केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिभव कुमार की हरकत को एक हमलावर गुंडे के रूप में देखा है, और हैरानी जताई है कि मुख्यमंत्री आवास में एक गुंडा कैसे घुसने गया? 

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बरसों से साथ में काम करने की वजह से बिभव कुमार को अरविंद केजरीवाल का काफी करीबी माना जाता है. अरविंद केजरीवाल के साथ काम तो स्वाति मालीवाल भी काफी पहले से करती रही हैं, लेकिन मुख्यमंत्री आवास पर मारपीट के मामले में अरविंद केजरीवाल ने स्वाति मालीवाल का साथ नहीं दिया. बल्कि, बिभव कुमार का साथ देने का फैसला किया. अभी तो अरविंद केजरीवाल का केस लड़ने वाले सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ही बिभव कुमार के मामले की पैरवी कर रहे हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रवैया अपनाते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर बिभव कुमार की जमानत अर्जी पर जवाब मांगा है - और जमानत याचिका पर अगली सुनवाई अब 7 अगस्त को होनी है. इससे पहले बिभव कुमार जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट भी गये थे, लेकिन 12 जुलाई को बिभव कुमार को जमानत इस आधार पर नामंजूर कर दी गई कि उनका 'काफी प्रभाव' है और उनको राहत देने का कोई आधार नहीं बनता. कोर्ट का कहना था, 'इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है तो गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है, या सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है... आरोपों की प्रकृति और गवाहों को प्रभावित किये जाने की आशंका को ध्यान में रखते हुए जमानत पर रिहा करने का कोई आधार नहीं बनता.'

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मुख्यमंत्री आवास में 'गुंडई' की इजाजत कैसे? 

बिभव कुमार को जमानत दिलाने के लिए अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में तरह तरह की दलीलें पेश की, लेकिन अदालत को समझा नहीं पाये. अभिषेक मनु सिंघवी ने हत्या के आरोपियों को भी जमानत दिये जाने की बात कही, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी एक न सुनी. 

अभिषेक मनु सिंघवी की दलील पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'हमें उन मामलों का हवाला न दें, क्योंकि किस तरह से घटनाक्रम हुआ वो हमारी चिंता का कारण है... आपको एक महिला से ऐसा बर्ताव करते शर्म नहीं आई? हम कॉन्ट्रैक्ट किलर, हत्यारों को भी जमानत देते हैं, लेकिन इस मामले में, किस तरह की नैतिक दृढ़ता है?'

बिभव का पक्ष रखते हुए सिंघवी FIR दर्ज कराने में हुई देर का भी हवाला दिया. सिंघवी का कहना था कि स्वाति मालीवाल पहले दिन भी पुलिस के पास गई थीं, लेकिन तीन दिन बाद शिकायत दर्ज हुई. लेकिन सिंघवी के पास एक बात को खारिज करने की कोई दलील नहीं थी कि स्वाति मालीवाल ने घटनास्थल से ही पुलिस को कॉल कर मदद मांगी थी. जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि क्या स्वाति मालीवाल ने 112 पर कॉल किया? अगर, हां तो ये आपके दावे को झूठा साबित करता है कि उन्होंने मनगढ़ंत कहानी गढ़ी है. 

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कोर्ट का कहना था, 'जिस तरह से चीजें घटित हुई हैं उससे हम स्तब्ध हैं... क्या सीएम का बंगला निजी आवास है? क्या ऐसे गुंडों को रखने के लिए उस कार्यालय की आवश्यकता है? क्या यही तरीका है? स्वाति मालीवाल ने उसे रुकने के लिए कहा लेकिन वो आदमी नहीं रूका. वह क्या सोचता है? क्या उसके सिर पर पावर सवार है? आप पूर्व सचिव थे, अगर पीड़िता को वहां रहने का अधिकार नहीं था, तो आपको भीा वहां रहने का अधिकार नहीं था. आपने ऐसा दिखाया जैसे कोई गुंडा परिसर में घुस आया हो. आपको ऐसा करने में कोई शर्म आती है ? क्या आपको लगता है कि उस कमरे में मौजूद किसी को भी बिभव के खिलाफ कुछ भी कहने की हिम्मत हुई होगी?'

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पूरे मामले को अच्छी तरह से सुना है. जो स्थिति समझ में आ रही है, लगता नहीं कि बिभव कुमार को अभी अदालत से कोई राहत मिलने वाली है - और ये बात भी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ही जाती हुई लगती है. 

जस्टिस सूर्यकांतकांत ने पूछा कि क्या सीएम का सरकारी घर निजी आवास है? क्या इसके लिए इस तरह के नियमों की जरूरत है? हम हैरान हैं, यह मामूली या बड़ी चोटों के बारे में नहीं है. हाईकोर्ट ने हर बात को सही तरीके से सुना है.

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केजरीवाल की नई मुश्किलों के रुझान आने लगे हैं

स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट की घटना तब की जब अरविंद केजरीवाल चुनाव कैंपेन के लिए सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत पर बाहर आये हुए थे. घटना के वक्त अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री आवास में तो थे, लेकिन मौके पर मौजूद नहीं थे. 

पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही, स्वाति मालीवाल ने अपने साथ हुई मारपीट को लेकर INDIA ब्लॉक के नेताओं को भी पत्र लिखा है. राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं को लिखे पत्र में स्वाति मालीवाल ने मुलाकात का वक्त मांगा है. हाल ही में इंडिया ब्लॉक के बैनर तले विपक्षी दलों के नेताओं ने अरविंद केजरीवाल के सपोर्ट में जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन भी किया था - सवाल है कि क्या बिभव कुमार के बारे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भी क्या अरविंद केजरीवाल को विपक्षी दलों के नेताओं का सपोर्ट यूं ही मिलता रहेगा?

स्वाति मालीवाल केस को लेकर अभी तक इंडिया ब्लॉक के एक ही नेता अरविंद केजरीवाल के सपोर्ट में खड़े नजर आते हैं. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने लखनऊ की प्रेस कांफ्रेंस में तो अरविंद केजरीवाल के सपोर्ट में तो देखे ही गये थे, जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन में भी पहुंचे थे. अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के दौरान कही हुई अपनी बात दोहराई. बोले, कई ऐसी संस्थाएं दिल्ली के पास हैं जो समय-समय पर पॉलिटिकल लोगों को परेशान करती हैं... कई ऐसी संस्थाएं हैं जो जान-बूझकर पॉलिटिकल लोगों को बदनाम करने के लिए... अपमानित करने के लिए झूठे मुकदमे लगाने के लिए हैं - और इसके साथ ही अखिलेश यादव ने ऐलान किया, जब कभी भी हम लोग सत्ता में आएंगे... ऐसी संस्थाओं को हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर देंगे.

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विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी खुद तो नहीं गये, लेकिन गौरव गोगोई और प्रमोद तिवारी को जरूर भेजा था. कांग्रेस नेताओं के भाषण में अरविंद केजरीवाल का खुला सपोर्ट भी महसूस हुआ, लेकिन संसद में राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल का नाम लिये बगैर ही गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया था. 

स्वाति मालीवाल केस भले ही अखिलेश यादव की नजर में कोई मायने नहीं रखता, लेकिन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इस मामले में पहले ही अपनी बात रख चुकी हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान ही मीडिया के पूछने पर प्रियंका गांधी ने घटना की निंदा की थी, और ये भी कहा था कि अगर स्वाति मालीवाल उनसे बात करना चाहें, तो वो जरूर सुनेंगी - और उनके साथ खड़ी होंगी. 

प्रियंका गांधी के स्टैंड लेने के बाद तो राहुल गांधी का सपोर्ट पहले भी अरविंद केजरीवाल को शायद ही मिल पाता, स्वाति मालीवाल केस में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तो बिलकुल नहीं लगता कि वो आप नेता के साथ खड़े मिलेंगे. और कहीं, स्वाति मालीवाल को मिलने का वक्त दिया और उनकी बातें सुनी तो उसके बाद स्थिति और भी बदल सकती है. 

गांधी परिवार तो वैसे भी अरविंद केजरीवाल से दूरी बनाकर चलता रहा है, लोकसभा चुनाव के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने भी अरविंद केजरीवाल के् साथ मंच नहीं शेयर किया. न लखनऊ की प्रेस कांफ्रेंस में, न ही दिल्ली में चुनाव कैंपेन के दौरान. 

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अब तो ऐसा लगता है, अरविंद केजरीवाल ने अगर स्वाति मालीवाल केस में अपना स्टैंड नहीं बदला तो इंडिया ब्लॉक के बाकी नेता भी खुलेआम सपोर्ट करने से परहेज कर सकते हैं - और ऐसे नेताओं में प्रियंका गांधी की ही तरह ममता बनर्जी भी हो सकती हैं.

वैसे किसी मामले में स्टैंड बदलना अरविंद केजरीवाल के लिए कोई मुश्किल काम भी नहीं है. सबने देखा ही है कि कैसे पहले वो नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं, और मामला अदालत पहुंचने पर वो बड़े आराम से माफी मांगकर मामला खत्म भी कर लेते हैं. 

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