अन्‍नामलाई-BJP अलगाव: भारतीय राजनीत‍ि में ऐसा म्‍युचुअल ड‍िवोर्स कभी हुआ?

राजनीति में लंबे सफर के बाद रास्ते बदल पाना आसान नहीं होता. लेकिन, तमिलनाडु के नेता अन्नामलाई बीजेपी का साथ एक खूबसूरत मोड़ पर ही छोड़ना चाहते हैं. अन्नामलाई चाहते हैं आगे भी मिलकर या गठबंधन में काम करने की पूरी गुंजाइश बनी रहे. अन्नामलाई की यह कोशिश राजनीति के दुर्लभ प्रयासों में शुमार की जाएगी.

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केंद्रीय मंत्री अमित शाह और तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई. (Photo: PTI) केंद्रीय मंत्री अमित शाह और तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

के. अन्नामलाई के दिल्ली दौरे का हासिल जो भी हो, मकसद अभी एक ही समझ में आ रहा है, ताकि दोस्ती बनी रहे. अन्नामलाई और बीजेपी दोनों ने ही एक दूसरे को बहुत कुछ दिया है. पांच साल का रिश्ता कोई मामूली बात नहीं होती, बशर्ते सब ठीक रहा हो. फिर भी हर रिश्ते की एक उम्र होती है. हालांकि, यह रिश्ता म्युचुअल डिवोर्स का रूप ले चुका है, बस कुछ कोशिशें बाकी हैं. 

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आधिकारिक तौर पर न तो अन्नामलाई की तरफ से कुछ बताया गया है, न ही बीजेपी की ओर से ही कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आई है. हां, अन्नामलाई ने दिल्ली रवाना होने से पहले इंतजार करने की बात जरूर कही थी. और, सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अन्नामलाई एक नया राजनीतिक दल बनाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी से दुश्मनी लेकर नहीं.

दिल्ली में अन्नामलाई ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन मंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की, और पार्टी से अलग होने की इच्छा जताई. इस्तीफे की पेशकश के साथ ही अन्नामलाई ने भविष्य में जरूरत पड़ी तो मिलकर काम करने का विकल्प खुला रखने का भी भरोसा दिलाया. सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने अन्नामलाई के प्रस्ताव पर फैसला लेने के लिए थोड़ा इंतजार करने को कहा है. 

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मुलाकातों के बाद क्या हुआ

अन्नामलाई के पहुंचने से पहले ही खबर आ गई थी कि दिल्ली यात्रा वो बीजेपी नेतृत्व के प्रति आभार जताने के लिए कर रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद अन्नामलाई दिल्ली में रुकने के लिए कहा गया है, और इस बीच तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन को दिल्ली बुलाया गया है. नैनार नागेंद्रन को ही अन्नामलाई की जगह बीजेपी की कमान सौंपी गई थी, और उनकी नाराजगी की एक बड़ी वजह भी यही बताई जाती है. 

बताते हैं कि अन्नामलाई चेन्नई के लिए निकल चुके थे और दिल्ली एयरपोर्ट के रास्ते में थे, तब फिर से और आगे की चर्चा के लिए उनको वापस बुला लिया गया. सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व चाहता है कि अन्नामलाई बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के अपने फैसले पर फिर से विचार करें. 

अव्वल तो, सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, अन्नामलाई बीजेपी से अलग होने पर ही आमादा हैं, लेकिन नेताओं का लिहाज रखते हुए थोड़ा नरम रुख भी दिखाया है. अन्नामलाई चाहते हैं कि या तो फिर से उनको तमिलनाडु बीजेपी की कमान सौंपी जाए, पूरी स्वायत्तता और अधिकार मिले या फिर उनको अलग राजनीतिक रास्ता अख्तियार करने दिया जाए. हालांकि, बीजेपी में यह भी एक उदाहरण होगा जब मौजूदा नेतृत्व से कोई मोलभाव करते हुए अपनी बात मानने के लिए राजी करा ले.

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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लीडरशिप को पूरा भरोसा है कि अन्नामलाई को मना लिया जाएगा, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई अब अपने कदम पीछे नहीं खींचने वाले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी की तरफ से अन्नामलाई को राज्यसभा सीट की भी ऑफर की गई थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. 

कब तक इंतजार करना है

सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह से मिलने से पहले अन्नामलाई ने नितिन नवीन, बीएल संतोष से अलग-अलग मुलाकात की है. सबसे महत्वपूर्ण बैठक अमित शाह के आवास पर हुई. अन्नामलाई ने नेताओं को तमिलनाडु में हाल के घटनाक्रमों के बारे में विस्तार से बताया. और, बीजेपी छोड़ने के विचार को लेकर अपनी दलील भी दी. तमिलनाडु में बीजेपी की रणनीति, संगठन से जुड़े फैसलों और भविष्य की दशा और दिशा को लेकर अपनी चिंताएं भी साझा की. 

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने नितिन नवीन से मुलाकात के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की... इस्तीफे के बारे में चर्चा भी की. हालांकि, अभी तक अन्नामलाई ने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा नहीं सौंपा है... अन्नामलाई तमिलनाडु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे.

रिपोर्ट के अनुसार, अन्नामलाई का तर्क है कि तमिलनाडु के मौजूदा राजनीतिक हालात में अब भी किसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है. ऐसे में तमिलनाडु में एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत के उभरने का पूरा मौका है. हालांकि, वही राजनीतिक ताकत उभर सकती है जो तमाम तबकों के इंटरेस्ट और उनकी चिंताओं को सुनने वाली हो. 

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बीजेपी से रिश्ता जब तक चले, लेकिन अन्नामलाई हर हाल में उसे एक खूबसूरत मोड़ पर खत्म करना चाहते हैं. ताकि आगे भी मिलकर या गठबंधन में काम करने की पूरी गुंजाइश बनी रहे. वैसे राजनीति में ऐसी कोशिश दुर्लभ प्रयासों में शुमार की जाएगी. 

पार्टनर का प्लान क्या है

सबसे बड़ा सवाल तो अभी यही है कि क्या अन्नामलाई बीजेपी नेतृत्व की बात मान लेंगे, और पार्टी में बने रहेंगे? या फिर हंसते हंसते विदा लेकर अपना अलग रास्ता बनाएंगे? बीजेपी से जुड़े एक सूत्र ने मीडिया को बताया है कि अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने की संभावना फिलहाल कम है. संभव है अन्नामलाई को संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाए. यह जिम्मेदारी किस स्तर पर होगी, अभी यह नहीं मालूम. ये सब दोनों पक्षों की बातचीत और सहमति से तय होगी. हालांकि, तमिलनाडु में अन्नामलाई के समर्थक ऐसी बातों से इत्तेफाक नहीं रखते.

2011 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने पुलिस सेवा से इस्तीफा देते वक्त कहा था कि उनका टास्क पूरा हो चुका है. मतलब, पुलिस अफसर रहते जो कुछ करना चाहते थे, काम पूरा हो चुका है. क्या बीजेपी में भी अन्नामलाई का काम पूरा हो चुका है? और जैसे अन्नामलाई ने काम पूरा होने के बाद पुलिस सेवा छोड़ दी थी, बीजेपी को भी छोड़ देना चाहते हैं?

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तमिलनाडु बीजेपी में भी कुछ नेता मानते हैं कि अगर अन्नामलाई को खुली छूट दी गई होती तो थलपति विजय राजनीतिक परिवर्तन के अकेले नायक नहीं बने होते. तमिलनाडु के एक सीनियर बीजेपी नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में निजी तौर पर तर्क दिया है कि दिल्ली के लोग चुनाव के दौरान तमिलनाडु को ठीक से नहीं समझ पाए.

रिपोर्ट के मुताबिक, अन्नामलाई सबसे पहले तमिलनाडु में एक गैर-राजनीतिक आंदोलन शुरू करना चाहते हैं. ऐसा आंदोलन जो 'राष्ट्रवादी तमिल दर्शन' पर आधारित हो और, बाद में उसे राजनीतिक दल के रूप में तब्दील किया जा सकता है. मालूम हुआ है कि 7 जून को अन्नामलाई अपने समर्थकों के साथ मीटिंग के बाद अपनी आगे की रणनीति के बारे में बता सकते हैं. 

तमिलनाडु की राजनीति में अन्नामलाई के असर का श्रेय उनकी पदयात्रा 'एन मन, एन मक्कल' (मेरी भूमि, मेरे लोग) को दिया जाता है. उसी पदयात्रा की वजह से अन्नामलाई ने 2024 में बीजेपी का वोट शेयर 3 फीसदी से 11 फीसदी तक पहुंचा दिया था, जो 2026 में फिर से 3 फीसदी पर आ गिरा है. अन्नामलाई की राज्यव्यापी यात्रा अमित शाह ने 28 जुलाई, 2023 को शुरू कराया था. 200 दिनों चली पदयात्रा के दौरान तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया गया था. 28 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यात्रा का समापन किया था.

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बीजेपी से अन्‍नामलाई 2021 में जुड़े थे, लेकिन सम्मानजनक विदाई चाहते हैं. अन्नामलाई पर हाल ही में दुनिया छोड़ देने वाले मशहूर शायर बशीर बद्र के एक शेर का खासा असर नजर आता है - 'दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों.'

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