MP: खाद की लाइन में दो दिन से लगी आदिवासी महिला की मौत, एंबुलेंस न मिलने से बिगड़ी हालत, निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया

गुना जिले के बागेरी खाद वितरण केंद्र पर दो दिनों से लाइन में लगी आदिवासी महिला भूरियाबाई की ठंड और तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. एंबुलेंस नहीं मिलने पर उसे किसान ने निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया, जहां हालत गंभीर होने पर रेफर किया गया. प्रशासन ने मौत का कारण शुगर बताया, जबकि घटना से किसानों में आक्रोश है.

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आदिवासी महिला भूरियाबाई की मौत (File Photo: Vikash Dikshit/ITG) आदिवासी महिला भूरियाबाई की मौत (File Photo: Vikash Dikshit/ITG)

विकास दीक्षित

  • गुना,
  • 27 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 10:22 PM IST

गुना जिले के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बागेरी में खाद लेने पहुंची आदिवासी महिला की मौत ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. मृतक महिला का नाम भूरियाबाई था, जिसकी उम्र लगभग 50 वर्ष बताई गई है. परिजनों का कहना है कि भूरियाबाई पिछले दो दिन से खाद की लाइन में लगी हुई थी. किसान इन दिनों खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं और वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें लगी रहती हैं.

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भूरियाबाई मंगलवार को यूरिया लेने बागेरी खाद वितरण केंद्र पहुंची थी. मंगलवार को खाद नहीं मिल पाई और बुधवार को भी उसे खाद नहीं मिली. लगातार दो दिन के इंतजार के बाद जब बुधवार देर रात भी खाद नहीं मिली तो वह केंद्र के बाहर ही कड़ाके की सर्दी में सो गई. इसी दौरान उसकी तबियत अचानक बिगड़ गई.

परिजनों और आसपास मौजूद लोगों ने एंबुलेंस को कॉल किया, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची. ऐसे में एक किसान ने अपने निजी वाहन से उसे बमोरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. यहां उसकी हालत अधिक बिगड़ने पर उसे गुना रेफर किया गया. इलाज के दौरान आखिरकार उसकी मौत हो गई. भूरियाबाई गुना जिले के ग्राम कुसेपुर की निवासी थी.

खाद लेने गई आदिवाली महिला की मौत 

परिजन बताते हैं कि गरीबों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आता. उन्होंने आरोप लगाया कि एंबुलेंस समय पर आ जाती तो शायद महिला की जान बच सकती थी. महिला को अस्पताल लेकर पहुंचाने वाले किसान ने भी कहा कि मौके पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी और मजबूर होकर उसे निजी वाहन में ले जाना पड़ा.

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इसी दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का दौरा क्षेत्र में चल रहा था. महिला किसान की मौत की खबर पहुंचते ही प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया. सिंधिया ने प्रशासन को पीड़ित परिवार की मदद करने के निर्देश दिए हैं, हालांकि खाद की किल्लत पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

ग्रामीणों ने लगाए एंबुलेंस न मिलने के आरोप

घटना के बाद जिला प्रशासन भी बैकफुट पर दिखा. कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि महिला को काफी शुगर की समस्या थी और उसी के चलते उसकी मौत हुई है. उन्होंने कहा कि देर रात एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी. साथ ही उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे खाद वितरण केंद्रों पर रात में न रुकें. कलेक्टर ने दावा किया कि जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और सुबह-शाम टोकन बांटे जा रहे हैं.

स्थानीय किसानों का कहना है कि केंद्रों पर खाद की कमी और अव्यवस्थित वितरण के कारण लोगों को दिन ही नहीं रात में भी जागरण करना पड़ रहा है. कई किसानों ने आरोप लगाया कि बागेरी केंद्र पर 274 रुपये वाला खाद का बैग ब्लैक में 400 रुपये तक बेचा जा रहा है. यह वही केंद्र है जहां महिला की मौत हुई. घटना वाली रात यहां कांग्रेसी विधायक ऋषि अग्रवाल भोजन के पैकेट बांटने पहुंचे थे, लेकिन देर रात तीन बजे महिला की मौत हो गई. इस घटना ने खाद वितरण व्यवस्था, एंबुलेंस उपलब्धता और प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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