मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक सरकारी स्कूल के बच्चों और उनके अभिभावकों ने अपने पसंदीदा शिक्षक के तबादले के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया. छात्रों ने साफ कह दिया कि जब तक उनके शिक्षक बद्रीलाल राठौर की दोबारा स्कूल में वापसी नहीं होती, तब तक वे स्कूल नहीं जाएंगे. इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
"राठौर सर वापस आएंगे, तभी हम स्कूल जाएंगे"
यह मामला रतलाम जिले के रूपनगर गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल का है. यहां करीब 40 छात्र पिछले कई दिनों से स्कूल नहीं जा रहे हैं. मंगलवार को छात्र अपने अभिभावकों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया. एक तख्ती पर लिखा था, "राठौर सर वापस आएंगे, तभी हम स्कूल जाएंगे."
कक्षा पांच की छात्रा तन्वी ने कहा कि वह अपने शिक्षक का तबादला रुकवाने आई है. इस दौरान बच्चों ने जिला प्रशासन से शिक्षक की वापसी की मांग की. सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें विदाई समारोह के दौरान कई बच्चे अपने शिक्षक के जाने पर फूट-फूटकर रोते हुए दिखाई दे रहे हैं.
प्रदर्शन के दौरान छात्र और उनके अभिभावक जनसुनवाई के समय कलेक्टर कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठ गए और जिला कलेक्टर मिशा सिंह से मिलने की मांग की. हालांकि उनकी मुलाकात कलेक्टर से नहीं हो सकी. बाद में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) ब्रजेंद्र रावत ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत कर उनकी शिकायत सुनी.
अभिभावकों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि आठ दिन के भीतर शिक्षक का तबादला रद्द नहीं किया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय परिसर में तंबू लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे. उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को देखते हुए यह फैसला वापस लिया जाना चाहिए.
शिक्षक ने निजी खर्च से स्कूल में कई सुविधाएं विकसित कराई
ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षक बद्रीलाल राठौर ने अपने निजी खर्च से स्कूल में कई सुविधाएं विकसित कराई हैं. उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए, जिससे गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में छात्रों की समझ काफी मजबूत हुई. गांव के इस प्राथमिक स्कूल में करीब 65 छात्र पढ़ते हैं और राठौर बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.
शिक्षक बद्रीलाल राठौर ने बताया कि उनके क्लस्टर में कुल 75 शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए केवल उनका ही 30 जून को पिपलोदा क्षेत्र के सेमलिया गांव में तबादला कर दिया गया. उन्होंने कहा कि वह विभाग के आदेश का पालन कर रहे हैं, लेकिन बच्चों का उनके प्रति स्नेह देखकर भावुक हैं.
वहीं, एडीएम ब्रजेंद्र रावत ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों की शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों से चर्चा की गई है. प्रशासन सभी पक्षों से बात करके मामले का समाधान निकालने का प्रयास करेगा. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस पूरे विवाद का बच्चों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.
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