मंगलवार की सुबह भोपाल एयरपोर्ट पर पहुंचते ही माहौल किसी राजनीतिक ऑपरेशन से कम नहीं लग रहा था. कांग्रेस विधायकों को एक दिन पहले ही बता दिया गया था कि उन्हें अगले कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु जाना है.
कई विधायक रातों-रात खरीदारी करके सीधे एयरपोर्ट पहुंचे थे. कुछ विधायक तो अपने परिवारों के साथ आए थे, मानो आने वाले 10 दिन किसी राजनीतिक बाड़ेबंदी से ज्यादा पारिवारिक छुट्टी में बदलने वाले हों.
लेकिन एयरपोर्ट पर पहुंचते ही पहला झटका लगा. कांग्रेस विधायकों को लेकर बेंगलुरु जाने वाला विशेष विमान अभी तक भोपाल नहीं पहुंचा था. बोर्डिंग पास नहीं बन सकते थे, इसलिए सभी को इंतजार करने को कहा गया.
देर से पहुंची फ्लाइट
बाहर जून की तपती गर्मी और उमस थी. विधायक, उनके परिवार और पार्टी पदाधिकारी एयरपोर्ट के बाहर खड़े होकर विमान का इंतजार कर रहे थे. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और जयवर्धन सिंह लगातार फ्लाइट से जुड़ी व्यवस्थाओं में जुटे हुए थे. एक घंटा बीता… फिर दो घंटे… लेकिन विमान नहीं आया.
दोपहर 1 बजे शुरू हुआ इंतजार लगातार बढ़ता गया. गर्मी का असर चेहरों पर साफ दिखाई देने लगा था. शाम करीब 5 बजे आखिरकार विशेष विमान पहुंचा और विधायकों को एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश मिला. लेकिन तब तक करीब साढ़े चार घंटे की प्रतीक्षा ने सभी को थका दिया था.
इसी बीच राजनीतिक घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया. खबर आई कि बीजेपी ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई है. आरोप था कि उन्होंने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी नहीं दी. ये सूचना मिलते ही एयरपोर्ट पर मौजूद कांग्रेस के बड़े नेताओं के चेहरे बदल गए.
विधानसभा में जमकर तकरार
कुछ ही मिनटों में जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, मीनाक्षी नटराजन और अन्य नेता विधानसभा के लिए रवाना हो गए. क्योंकि कांग्रेस के विधायक एयरपोर्ट के अंदर जा चुके थे और अब मेरे लिए वहां कोई खास तस्वीर दिखाने को थी नहीं लिहाजा मामले की गंभीरता देख मैंने भी विधानसभा जाने का फैसला किया.
करीब आधे घंटे बाद मेरी मौजूदगी विधानसभा परिसर में थी, जहां अगले करीब दो घंटे तक जबरदस्त राजनीतिक और कानूनी बहस चलती रही. बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच लगातार तकरार होती रही जबकि रिटर्निंग ऑफिसर मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की स्क्रूटनी कर रहे थे.
शाम करीब 6:30 बजे वह फैसला आया जिसने पूरे दिन की दिशा बदल दी. रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया. फैसले की घोषणा होते ही विधानसभा के भीतर बीजेपी नेताओं के चेहरे खिल उठे.
कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह और रामेश्वर शर्मा समेत कई नेताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया/ वहीं कांग्रेस खेमे में सन्नाटा पसर गया.
एयरपोर्ट पर भी बवाल
उधर एयरपोर्ट पर भी खूब ड्रामा हुआ. कांग्रेस विधायकों को लेकर रनवे की ओर बढ़ चुके विमान को वापस बुला लिया गया. विधायकों और उनके परिवारों को विमान से नीचे उतरना पड़ा. बेंगलुरु जाने की पूरी योजना कुछ ही मिनटों में खत्म हो चुकी थी.
इसके बाद मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस नेताओं के साथ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचीं, जहां लगातार बैठकों का दौर शुरू हुआ. शाम साढ़े सात बजे कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए तथा सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया.
रात करीब 9 बजे मैं कांग्रेस कार्यालय की तीसरी मंजिल पर बने एक छोटे से हॉल में पहुंचा. कमरे में असामान्य खामोशी थी. मीनाक्षी नटराजन और पार्टी के वरिष्ठ नेता गंभीर मुद्रा में बैठे थे. मीनाक्षी के चेहरे पर उदासी और गुस्सा दोनों साफ दिखाई दे रहे थे.
मीनाक्षी नटराजन ने बीजेपी पर लगाए कई आरोप
जब ज्यादातर नेता वहां से जाने लगे तो मैंने मीनाक्षी नटराजन से पूछा कि क्या वो पूरे मामले पर बात करना चाहेंगी. उन्होंने तुरंत सहमति दी. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस का पूरा विधायक दल एकजुट है और खरीद-फरोख्त की कोई संभावना नहीं है, तब इस रास्ते को चुना गया. उनका आरोप था कि जिस मामले को आधार बनाया गया, उसमें न तो कोर्ट ने कोई संज्ञान लिया था और न ही कोई मुकदमा दर्ज हुआ था.
उन्होंने कहा कि ये कानूनी लड़ाई नहीं थी, बल्कि राजनीतिक इच्छा शक्ति के खिलाफ हार थी. उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश की जा रही है.
दो घंटे तक प्रदर्शन
लेकिन दिन का राजनीतिक ड्रामा अभी खत्म नहीं हुआ था. रात होते-होते कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित चुनाव आयोग कार्यालय पहुंच गए. प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई नेता धरने पर बैठ गए. करीब दो घंटे तक प्रदर्शन चला और रात लगभग 12 बजे जाकर खत्म हुआ.
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इस तरह सुबह 8 बजे शुरू हुआ राज्यसभा चुनाव का ये अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम रात 12 बजे जाकर थमा. 15 घंटे तक मैं इस पूरे घटनाक्रम का सीधा गवाह रहा. एयरपोर्ट की बेचैनी से लेकर विधानसभा के फैसले तक, कांग्रेस कार्यालय की खामोशी से लेकर चुनाव आयोग के बाहर धरने तक.
लेकिन दिन खत्म होने के बाद भी एक सवाल बाकी रह गया. क्या मीनाक्षी नटराजन का नामांकन सिर्फ तकनीकी खामी की वजह से रद्द हुआ, या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति काम कर रही थी?
रवीश पाल सिंह