मध्य प्रदेश में 18 जून को तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है. उन पर अपने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगा है.
इस फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बताया है और अदालती लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर उतरकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है. वहीं, बीजेपी ने इसे कांग्रेस की आपसी गुटबाजी और भीतरघात का नतीजा करार दिया है.
राज्यसभा चुनाव के चुनाव अधिकारी अरविंद शर्मा ने इस मामले में लिखित आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक, मीनाक्षी नटराजन की फॉर्म 26 (हलफनामे) की बारीकी से जांच की गई.
क्यों रद्द हुआ नामांकन?
जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने हलफनामे में एक अदालती शिकायत का जिक्र नहीं किया था. इस वजह से उनका नामांकन पत्र अधूरा माना गया और उसे रद्द कर दिया गया.
विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने इस बारे में चुनाव अधिकारी के सामने एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने तेलंगाना में अपने खिलाफ दर्ज एक अदालती मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है.
यह भी पढ़ें: महेश केवट vs मीनाक्षी नटराजन, BJP के तीसरे उम्मीदवार ने रोचक बना दिया MP राज्यसभा चुनाव
इस मामले में बाकायदा कोर्ट का समन भी सामने आया है, जो नटराजन को भेजा गया था. दोनों पक्षों की दलीलें लंबी सुनवाई के दौरान सुनी गईं, जिसके बाद चुनाव अधिकारी ने मंगलवार को उनका फॉर्म निरस्त करने का फैसला सुनाया.
मध्य प्रदेश सीएम का कांग्रेस पर हमला
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस नेतृत्व पर करारा हमला बोला. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने जानबूझकर हार के डर से अपने प्रत्याशी के फॉर्म में गलती की है. इस सीट पर कांग्रेस के ही कई बड़े नेताओं की नजर टिकी हुई थी.'
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'आज के समय में जब कोई सामान्य व्यक्ति पंच या सरपंच का फॉर्म भी भरता है, तो वो अपने बारे में सारी जानकारी विस्तार से देता है. लेकिन कांग्रेस के जो नेता कई बार चुनाव लड़ चुके हैं, ऐसे रसूखदार नेता भी अपने फॉर्म के बारे में कुछ नहीं बता पाए.'
उन्होंने कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर तंज कसते हुए कहा, 'कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं था, इसलिए वो उन्हें संभालने के लिए प्लेन लेकर उड़ रहे थे. उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए. कांग्रेस के अंदर जो वर्तमान हालात हैं, वो ऐसे हैं कि पार्टी अपने प्रत्याशी का फॉर्म तक ढंग से नहीं भरवा पाई.'
कैलाश विजयवर्गीय- कांग्रेस के लोगों ने ही दिए हमें कागज
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. उन्होंने विपक्ष के 'लोकतंत्र की हत्या' और 'सीटों की चोरी' वाले आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. विजयवर्गीय ने दावा किया, 'जहां तक उन दस्तावेजों का सवाल है जो हमें मिले, तो वो हमें किसने दिए? आप इस बात से अच्छी तरह समझ सकते हैं कि आज कांग्रेस किस बुरे दौर से गुजर रही है.'
उन्होंने आगे कहा, 'असल बात ये है कि हमें तेलंगाना से जुड़े अदालती दस्तावेज मिल रहे थे. तेलंगाना एक ऐसा राज्य है जहां खुद कांग्रेस पार्टी सत्ता में है. हमारे पास पहले से इस मामले की कोई जानकारी नहीं थी. जरूर ये कांग्रेस के ही अंदरूनी सदस्य थे, जिन्होंने हमें ये गुप्त दस्तावेज लाकर दिए.'
'मौका मिलने पर भी गलती क्यों नहीं सुधारी?'
बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करके राहुल गांधी और कांग्रेस को घेरा. मालवीय ने लिखा, 'ये बात अब पूरी तरह साफ होती जा रही है कि कांग्रेस के भीतर ही एक बड़े गुट ने मीनाक्षी नटराजन को हराने के लिए काम किया, जिन्हें राहुल गांधी की पसंदीदा उम्मीदवार माना जाता था. कांग्रेस के भीतर आंतरिक तौर पर नुकसान पहुंचाना और गुटबाजी की प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है.'
मालवीय ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए आगे लिखा, 'लेकिन ये बात अभी भी उस बड़े सवाल का जवाब नहीं देती है जो कांग्रेस के धोखाधड़ी वाले आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है. आखिर मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना के उस लंबित आपराधिक मामले का खुलासा करने में क्यों विफल रहीं? चुनाव अधिकारी ने उन्हें अपनी जानकारी को सुधारने या पूरक दस्तावेज जमा करने का पूरा मौका दिया था.'
उन्होंने कहा, अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं था, तो मौका दिए जाने के बाद भी उस चूक को सुधारा क्यों नहीं गया? साजिश का रोना रोने से पहले कांग्रेस को इस बड़ी लापरवाही पर देश को जवाब देना चाहिए.'
सड़क पर उतरी कांग्रेस
नामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया और नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा. कांग्रेस ने इसे साफ तौर पर 'सीट की चोरी' बताया है. राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने इस कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पार्टी को सलाह दी है कि इस मामले को बिना किसी देरी के सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए.
मंगलवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया. जीतू पटवारी ने ऐलान किया कि इस चुनावी धांधली के खिलाफ बुधवार को पार्टी के सभी विधायक और वरिष्ठ नेता भोपाल सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर चुनाव आयोग के खिलाफ सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे.
दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर पर प्रदर्शन
दिल्ली में भी कांग्रेस के कई बड़े नेता चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचे. वहां अंदर जाने की अनुमति न मिलने पर नाराज नेताओं ने मुख्य गेट के बाहर ही सड़क पर बैठकर धरना देना शुरू कर दिया. मीनाक्षी नटराजन ने कहा, 'विधानसभा में तीसरी सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या बल न होने के बावजूद बीजेपी ने जानबूझकर अपना तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारा. इससे साफ है कि सत्ताधारी दल हर हथकंडा अपनाकर लोकतंत्र और संविधान को कुचलना चाहता है.'
केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि नटराजन का नामांकन खारिज किया जाना लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर एक सीधा और बड़ा हमला है. राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक मर्यादाओं की बलि दी जा रही है.
यह भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द
इस विवाद के बीच, कांग्रेस के 10 वरिष्ठ नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करने पहुंच गया है. इस प्रतिनिधिमंडल में सांसद के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला और खुद मीनाक्षी नटराजन शामिल हैं, जो आयोग के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे.
रवीश पाल सिंह