30,764 क्षमता के मुकाबले 42,119 कैदी जेलों में बंद, मध्य प्रदेश की जेलों का बुरा हाल

मध्य प्रदेश की 133 जेलों में क्षमता से करीब 35 फीसदी ज्यादा कैदी बंद हैं. कुल 30,764 की क्षमता के मुकाबले 42,119 कैदी जेलों में रखे गए हैं. इनमें 52.85 फीसदी कैदी अंडर ट्रायल हैं. रीवा, इंदौर और भोपाल सेंट्रल जेलों में सबसे ज्यादा भीड़ है, जहां हजारों कैदी क्षमता से अधिक बंद हैं.

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रवीश पाल सिंह

  • भोपाल ,
  • 06 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:19 PM IST

मध्य प्रदेश की जेलें इन दिनों कैदियों की बढ़ती संख्या से जूझ रही हैं. प्रदेश की 133 जेलों में क्षमता से करीब 35 फीसदी ज्यादा कैदी बंद हैं. विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी सामने आई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की जेलों की कुल आवास क्षमता 30 हजार 764 है. इसके मुकाबले मौजूदा समय में 42 हजार 119 कैदी जेलों में बंद हैं. यानी लगभग 12 हजार से ज्यादा कैदी क्षमता से अधिक जेलों में रह रहे हैं.

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आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की कई बड़ी जेलों में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है. रीवा सेंट्रल जेल में सबसे अधिक कैदी बंद हैं. यहां कैदियों की कुल क्षमता 886 है, जबकि 2282 कैदी रखे गए हैं. यानी यहां 1396 कैदी क्षमता से ज्यादा हैं.

30,764 क्षमता के मुकाबले 42,119 कैदी जेलों में बंद

इसी तरह इंदौर सेंट्रल जेल की क्षमता 1280 है, लेकिन यहां 2191 कैदी बंद हैं. यानी 911 कैदी क्षमता से अधिक हैं. वहीं भोपाल सेंट्रल जेल में 2641 कैदियों की क्षमता के मुकाबले 3454 कैदी बंद हैं. यहां भी 813 कैदी क्षमता से ज्यादा हैं.

प्रदेश की जेलों में 52.85 फीसदी कैदी अंडर ट्रायल

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि प्रदेश की जेलों में आधे से ज्यादा कैदी ऐसे हैं जिन्हें अभी तक अदालत से सजा नहीं मिली है. कुल 42 हजार 119 कैदियों में से 22 हजार 261 कैदी विचाराधीन हैं. यानी करीब 52.85 प्रतिशत कैदी अंडर ट्रायल हैं. इन विचाराधीन कैदियों में 21 हजार 410 पुरुष और 851 महिला कैदी शामिल हैं. सबसे ज्यादा विचाराधीन कैदी जिला जेलों में बंद हैं. जिला जेलों में 10 हजार 2 पुरुष और 516 महिला कैदी बंद बताए गए हैं.
 

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