पेड़ों को बचाने का अनोखा तरीका... छाल सुंघाकर 'मदमस्त' किए जा रहे कीड़े, सुबह होते ही समेट लेते हैं गांववाले

मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के जंगलों से 'साल बोरर' कीट के कहर और उससे निपटने के लिए ग्रामीणों के एक अनोखे देसी जुगाड़ की बेहद दिलचस्प खबर सामने आई है. साल (सरई) के कीमती पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग ने ग्रामीणों के साथ मिलकर एक ऐसा अनूठा अभियान चलाया है, जिसने न सिर्फ पर्यावरण को बचाने की आस जगाई है, बल्कि ग्रामीणों के लिए बंपर कमाई का जरिया भी बन गया है.

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ग्रामीणों ने बना डाली 10 लाख कीड़ों के सिरों की माला.(Photo:ITG) ग्रामीणों ने बना डाली 10 लाख कीड़ों के सिरों की माला.(Photo:ITG)

डेविड सूर्या

  • डिंडोरी,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के सामान्य वन मंडल के अंतर्गत आने वाले हरे-भरे जंगलों में इन दिनों एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिल रहा है. साल 1997-98 के विनाशकारी दौर के करीब तीन दशक बाद एक बार फिर यहां के बेशकीमती सरई (साल) के पेड़ों पर 'साल बोरर' नामक घातक कीट ने बड़ा हमला कर दिया है. इस संकट से निपटने के लिए वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर 'कीट पकड़ो अभियान' शुरू किया है. इस अनोखे अभियान के तहत ग्रामीण अब तक करीब 10 लाख कीड़ों को पकड़ चुके हैं, जिससे उन्होंने महज कुछ ही दिनों में 20 लाख रुपये की मोटी कमाई कर ली है. क्या है कीड़ों को 'मदमस्त' करने का अनोखा तरीका?

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SDO एसके जाटव ने इस बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि साल बोरर कीड़ों को आकर्षित करने के लिए सबसे पहले सरई के पेड़ को काटा जाता है और फिर उसकी छाल को बुरी तरह पीटा जाता है. पीटे जाने के बाद इस छाल से एक खास तरह की तेज प्राकृतिक सुगंध निकलती है.

इस सुगंध की कशिश इतनी जबरदस्त होती है कि करीब 3 किमी के दायरे में मौजूद साल बोरर कीट खिंचे चले आते हैं और इस रस को पीकर 'मदमस्त' (नशे जैसी हालत में) होकर वहीं गिर जाते हैं.

सूर्योदय से पहले होती है 'सर्जिकल स्ट्राइक'

मदमस्त हुए इन कीड़ों को पकड़ने के लिए ग्रामीणों को भोर (सुबह-सुबह) में ही मोर्चा संभालना पड़ता है. सूर्योदय से पहले जब तक अंधेरा और ठंडक रहती है, ग्रामीण इन सुस्त पड़े कीड़ों को आसानी से डिब्बों और थैलियों में समेट लेते हैं. अगर थोड़ी भी देर हुई और सूरज की किरणें निकल आईं, तो ये कीड़े दोबारा उड़ जाते हैं.

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इसके बाद ग्रामीण पकड़े गए कीड़ों के सिरों की माला बनाकर वनकर्मियों के पास जमा कराते हैं. वन विभाग ने एक कीड़े के सिर की कीमत 2 रुपये निर्धारित की है, जिसके चलते अब तक 10 लाख कीड़ों के बदले ग्रामीणों को 20 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है. 

30 हजार हेक्टेयर का जंगल प्रभावित

वन विभाग के मुताबिक, इस कीट का प्रकोप इतना भयानक है कि जिले के पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, दक्षिण समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र के लगभग 30 हजार हेक्टेयर का जंगल इसकी चपेट में आ चुका है.

1.46 लाख पेड़ कटने की कगार पर

संक्रमण को बाकी स्वस्थ पेड़ों में फैलने से रोकने के लिए 1,46,784 पेड़ों की पहचान (मार्किंग) की गई है, जिन्हें काटा जाना बेहद जरूरी है. वर्तमान में इस प्रक्रिया के तहत करीब 15 हजार पेड़ों को काटने का काम चल रहा है. जुलाई के अंत में दो डीएफओ (DFO) अधिकारियों की सीधी मौजूदगी में पकड़े गए कीड़ों को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा.

दिल्ली से परमिशन का इंतजार
वन विभाग की उत्पादन DFO भारती ठाकरे ने बताया कि सामान्य वन मंडल ने संक्रमित पेड़ों की पूरी सूची तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी है. जैसे ही भारत सरकार से अंतिम अनुमति मिल जाएगी, बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी जाएगी, जिसमें कम से कम 3 महीने का वक्त लगेगा. 

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लकड़ियों की होगी ई नीलामी

इस महा-अभियान को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए चार डीएफओ की स्पेशल ड्यूटी लगाई जाएगी. पेड़ों के कटने से मिलने वाली हजारों क्यूबिक मीटर इमारती और जलाऊ लकड़ियों को गाड़ा सरई और करंजिया काष्ठ गार में सुरक्षित रखवाया जाएगा, जिसके बाद इनका ई-नीलामी कर सरकारी राजस्व जुटाया जाएगा. 

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