ये कहानी है सिनेमा के उस जीनियस की, जिसने अपने दौर से बहुत आगे की फिल्में बनाईं. ऐसी फिल्में, जिन्हें समझने के लिए शायद दुनिया तैयार नहीं थी. एक कामयाब अभिनेता और बेमिसाल निर्देशक, जो एक सुबह अपने कमरे में हमेशा के लिए खामोश हो गया. टेलीफ़ोन ऑपरेटर की नौकरी से सफ़र शुरू करने वाला यही शख़्स आगे चलकर भारतीय सिनेमा का सबसे करिश्माई फ़िल्मकार कहलाया - गुरु दत्त.
गुरु दत्त ने अपनी फ़िल्म 'कागज़ के फूल' के हर दृश्य पर जी-जान लगा दी थी. सिनेमेटोग्राफ़ी और डायरेक्शन ऐसा था कि इससे पहले इस तरह का काम हिंदुस्तान छोड़िए, दुनिया ने नहीं देखा था. नए तरह के शॉट्स थे... कैमरा मूवमेंट कमाल का... लाइटिंग का ऐसा इस्तेमाल कि वो सीन का एलिमेंट बन जाए.... लेकिन अफ़सोस की फ़िल्म फ़्लॉप हो गई, शायद इसलिए क्योंकि लोगों को वो समझ नहीं आई.
इस बार जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ देखिए गुरु दत्त की पूरी कहानी. सिर्फ़ YouTube पर -
अगले एपिसोड में लौटूंगा नई कहानी, नए क़िस्से के साथ... मेरा नाम है जमशेद क़मर सिद्दीक़ी.
जमशेद क़मर सिद्दीक़ी