केला हमेशा घुमावदार ही क्यों होता है, सीधा क्यों नहीं उगता? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

केला सीधा होने की बजाय ऊपर की तरफ क्यों मुड़ जाता है? इसके पीछे कोई जादुई कहानी नहीं बल्कि साइंस का एक अनोखा नियम है, जिसे 'नेगेटिव जियोट्रॉपिज्म' कहते हैं.

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केला का आकार हल्का कर्व में होता है. (Phot: ITG) केला का आकार हल्का कर्व में होता है. (Phot: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:40 PM IST

Why are bananas curved: केला खाना अधिकतर लोगों को पसंद होता है. यह न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि बाजार में मिलने वाले लगभग सभी केले मुड़े हुए यानी कर्व्ड शेप के होते हैं? शुरुआती स्टेज में केला बिल्कुल सीधा और नीचे की तरफ ही बढ़ता है लेकिन जैसे-जैसे यह बड़ा होता है, इसके शेप में एक बड़ा बदलाव आता है.

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सेब, अमरूद या आम की तरह केला गोल या सीधा क्यों नहीं होता? पहली नजर में यह एक आम सा सवाल लग सकता है लेकिन इसके पीछे वनस्पति विज्ञान का एक बहुत ही दिलचस्प और अनोखा वैज्ञानिक कारण छिपा है. आइए उस कारण को जान लीजिए.

केला घुमावदार क्यों होता है?

Australianbananas.com पर दी गई जानकारी के मुताबिक, केला सीधा उगता जरूर है लेकिन बढ़ते समय वह गुरुत्वाकर्षण की विपरीत दिशा में मुड़ने लगता है. इसी वजह से उसका आकार धीरे-धीरे टेढ़ा हो जाता है. इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि पौधों की नेचुरल ग्रोथ और रोशनी की तरफ झुकने की प्रक्रिया काम करती है.

केले के इस खास घुमावदार आकार के पीछे जो सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण है उसे साइंस की भाषा में नेगेटिव जियोट्रॉपिज्म (Negative Geotropism) कहा जाता है. आमतौर पर पेड़-पौधों के फल और उनकी जड़ें गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटी के कारण नीचे जमीन की तरफ बढ़ते हैं जिसे पॉजिटिव जियोट्रॉपिज्म कहते हैं लेकिन केले के मामले में यह नियम पूरी तरह उलट जाता है.

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नटी साइंटिस्ट्स कनाडा की रिपोर्ट का कहना है, केला ग्रेविटी के नियमों के खिलाफ जाकर सूरज की रोशनी की तरफ बढ़ने की कोशिश करता है. इसी वजह से नीचे की ओर लटक रहा सीधा केला धीरे-धीरे ऊपर आसमान और सूरज की तरफ मुड़ने लगता है. विज्ञान में इस प्रक्रिया को ही नेगेटिव जियोट्रॉपिज्म का नाम दिया गया है, जो केले को उसका सिग्नेचर कर्व्ड शेप देता है.

पौधों के हार्मोन भी जिम्मेदार

साइंस टाइम्स के मुताबिक, जैसे ही केले पर सूरज की रोशनी पड़ती है उसके अंदर का ऑक्सिन (Auxin) नाम का ग्रोथ हार्मोन धूप वाले हिस्से को छोड़कर छाया (शेड) वाले हिस्से की तरफ भाग जाता है. अब जिस तरफ यह हार्मोन ज्यादा इकट्ठा होता है वहां की कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं. इस कारण छाया वाला हिस्सा ज्यादा लंबा हो जाता है और धूप वाला हिस्सा छोटा रह जाता है. इसी कम-ज्यादा ग्रोथ की वजह से केला ऊपर की तरफ मुड़ जाता है.

रेनफॉरेस्ट का इतिहास भी है कारण

केले के इस तरह मुड़ने की एक ऐतिहासिक वजह भी बताई जाती है. मूल रूप से केले के पौधे घने रेनफॉरेस्ट (वर्षावनों) के बीच के लेयर में उगते थे. इन जंगलों में बड़े और ऊंचे पेड़ों की वजह से नीचे के पौधों तक सूरज की रोशनी बहुत ही कम पहुंच पाती थी.

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इंटरेस्टिंग फैक्ट वेबसाइट के मुताबिक, यदि केले का फल सिर्फ नीचे की तरफ सीधे बढ़ता तो उसे पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती. इसके अलावा अगर फल साइड से आने वाली हल्की रोशनी की तरफ बढ़ता तो भारी वजन के कारण केले का पूरा पौधा ही एक तरफ झुककर गिर सकता था. अपनी इसी जरूरत और इवोल्यूशन के कारण केले ने सीधे नीचे बढ़ने के बजाय ऊपर की तरफ मुड़ना शुरू कर दिया ताकि पौधे का बैलेंस भी न बिगड़े और उसे भरपूर सनलाइट भी मिल सके.

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