How to check fake sunglasses: धूप से बचाने वाला चश्मा असली है या नकली? 2 सेकंड में ऐसे पहचानें

गर्मियों के मौसम में आंखों को तेज धूप और खतरनाक यूवी किरणों से बचाने के लिए सनग्लास सबसे जरूरी चीज है. लेकिन मार्केट में असली के नाम पर नकली चश्मों का बड़ा खेल चल रहा है. जानिए कैसे आप अपने पास मौजूद स्मार्टफोन की मदद से सिर्फ दो सेकंड में असली और नकली सनग्लास की पहचान कर सकते हैं.

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सस्ता सनग्लास आंखों की रोशनी प्रभावित कर सकते हैं. (Photo: AI Generated) सस्ता सनग्लास आंखों की रोशनी प्रभावित कर सकते हैं. (Photo: AI Generated)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:58 AM IST

How to check fake sunglasses: देशभर में गर्मी का प्रकोप अपनी चरम पर है और दोपहर के समय सूरज की तेज किरणें आंखों को सीधा-सीधा नुकसान भी पहुंचा रही हैं. ऐसे में खुद को बचाने के लिए लोग धड़ल्ले से सनग्लास खरीद रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मार्केट में ब्रांडेड और असली के नाम पर घटिया और नकली चश्मे भी बेचे जा रहे हैं? ज्यादातर लोग बिना जांचे इन्हें खरीद लेते हैं जो आंखों की रोशनी के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. अच्छी बात यह है कि आपको असली और नकली की पहचान करने के लिए किसी लैब में जाने की जरूरत नहीं है. आप अपने स्मार्टफोन की मदद से घर बैठे ही इसकी जांच कर सकते हैं.

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स्मार्टफोन से ऐसे करें असली चश्मे की पहचान

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपका सनग्लास असली (Polarized) है या नहीं, तो इसके लिए एक बेहद आसान ट्रिक है. पोलराइज्ड लेंस एक खास फिल्टर के साथ आते हैं जो ग्लेयर (चमक) को रोकते हैं. इसे टेस्ट करने के लिए अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन को ऑन करें. अब सनग्लास को अपने हाथ में लें और उसे स्क्रीन के सामने सीधा रखें.

इसके बाद चश्मे को धीरे-धीरे 90 डिग्री के एंगल पर (तिरछा) घुमाना शुरू करें. यदि चश्मे के लेंस से दिखने वाली मोबाइल की स्क्रीन पूरी तरह से काली या डार्क हो जाती है तो आपका सनग्लास 100 प्रतिशत असली है. यदि स्क्रीन के रंग में कोई बदलाव नहीं होता तो समझ जाएं कि दुकानदार ने आपको चूना लगाया है.

असली सनग्लास पहचानने का वीडियो:

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नकली सनग्लास पहनना खतरनाक!

कई लोग सोचते हैं कि सस्ते या फुटपाथ से खरीदे गए चश्मे भी धूप तो रोक ही लेते हैं लेकिन मेडिकल साइंस इसके उलट चेतावनी देता है. हेल्थलाइन के मुताबिक, जब हम कोई भी डार्क या काला चश्मा पहनते हैं तो हमारी आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं ताकि ज्यादा रोशनी अंदर आ सके.

यदि आपका चश्मा नकली प्लास्टिक का है और उसमें यूवी प्रोटेक्शन फिल्टर नहीं है तो फैली हुई पुतलियों के रास्ते सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें सीधे आंख के पर्दे तक पहुंच जाती हैं. यह बिना चश्मा पहने धूप में घूमने से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है और इससे मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है और गंभीर स्थिति में आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है.

नकली सनग्लास का वीडियो:

खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

आई एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सनग्लास खरीदते वक्त सिर्फ उसके लुक या स्टाइल पर न जाएं. धूप का चश्मा हमेशा वही चुनना चाहिए जो 99 से 100 फीसदी तक यूवी किरणों को ब्लॉक करने की क्षमता रखता हो. चश्मा खरीदते समय उस पर लगे UV 400 के स्टिकर या टैग को जरूर चेक करें. इसके अलावा गर्मियों में ग्रे, ग्रीन या डार्क ब्राउन कलर के लेंस आंखों को सबसे ज्यादा आराम देते हैं और रंगों के ओरिजिनल कंट्रास्ट को बनाए रखते हैं.

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