श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को RTI के दायरे में लाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को RTI के दायरे में लाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई है. इसमें ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित कर उसके वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता लाने की मांग की गई है.

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राम मंदिर ट्रस्ट को RTI के दायरे में लाने की मांग. (Photo-ITG) राम मंदिर ट्रस्ट को RTI के दायरे में लाने की मांग. (Photo-ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है. इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास' को सूचना का अधिकार (RTI) कानून के दायरे में लाया जाए. याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट के पैसे के लेन-देन में पूरी पारदर्शिता हो और उसके कामकाज की जवाबदेही भी तय की जाए.

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सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास' को सूचना का अधिकार (RTI) कानून की धारा 2(H) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया जाए. यह याचिका वकील अनूप प्रकाश अवस्थी ने दाखिल की है. उनका कहना है कि ट्रस्ट की आय-व्यय और पैसों के लेन-देन की पूरी जानकारी आम लोगों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि कामकाज में पारदर्शिता रहे और जवाबदेही भी तय हो सके.

भगवान श्रीराम की संपत्ति का भी दिया गया तर्क

याचिका में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट के पास मौजूद सभी संपत्तियां भगवान श्रीराम की हैं. इसी आधार पर ट्रस्ट के कामकाज में अधिक पारदर्शिता जरूरी बताई गई है. अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया है कि वह 9 नवंबर 2019 के अयोध्या फैसले (एम. सिद्दीक मामले) में ट्रस्ट के गठन, उसकी कानूनी स्थिति और अधिकारों को लेकर दिए गए निर्देशों का स्पष्ट अर्थ बताए.

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यह याचिका ऐसे समय दाखिल हुई है, जब राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच चल रही है. इस मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महीने पहले तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था. अब सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट जल्द सरकार को सौंपी जा सकती है. बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में सिर्फ चोरी में शामिल लोगों की पहचान ही नहीं होगी, बल्कि यह भी बताया जाएगा कि निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई. साथ ही चढ़ावे के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए जाएंगे.

SIT ने साफ किया है कि जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले बैंक लेन-देन, वित्तीय दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और गवाहों के बयानों की जांच की जा रही है. इसके अलावा, उन अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी, जिनकी लापरवाही की वजह से कथित गड़बड़ी लंबे समय तक सामने नहीं आ सकी. हालांकि, यह अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
 

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