'...वे वकील बिना बैट के सचिन तेंडुलकर की तरह होते हैं', केस की जानकारी न होने पर CJI चंद्रचूड़ ने की टिप्पणी

चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों के लिए एक बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने पीठ के सामने केस वकीलों को केस की जानकारी न होने पर नसीहत देते हुए कहा कि बिना ब्रीफ वाला वकील, बिना बल्ले के सचिन तेंडुलकर की तरह होता है.

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सीजेआई डीवाई चंद्रचूड ने बड़ी टिप्पणी की (फाइल फोटो) सीजेआई डीवाई चंद्रचूड ने बड़ी टिप्पणी की (फाइल फोटो)

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 18 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा कि ब्रीक के बिना वकील वैसा ही है, जैसा बल्ले के बिना सचिन तेंडुलकर. चीफ की ओर से शुक्रवार को यह टिप्पणी तब आई जब एक मामले में मौजूद वकील पीठ के पूछने पर केस से जुड़े तथ्यों की जानकारी नहीं दे पाए. सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट को बताया कि वह प्रतिवादी के लिए पेश हो रहा है. इस पर पीठ ने वकील से मामले के तथ्यों से अवगत कराने को कहा. पीठ ने पूछा- बताओ क्या बात है? क्या आपने इसे पढ़ा है?' 

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जब वकील कोई जवाब नहीं दे पाया तो CJI चंद्रचूड़ ने कहा, 'बिना ब्रीफ वाला वकील बिना बल्ले के सचिन तेंडुलकर की तरह है, आपको हमेशा अपना ब्रीफ अपने पास रखना चाहिए. यह बहुत गलत है. आपने बिना पेपर अपने पास रखे बैंड और गाउन पहन रखा है.'

सीजेआई ने पिछले साल भी एक युवा वकील को सलाह देते हुए टिप्पणी की थी कि जब भी अदालत में पेश हों तो मामले की फाइलों को हमेशा पढ़ें. पीठ ने युवा वकील से कहा था कि जब भी वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपस्थित हों तो मामलों पर बहस करने का अवसर लें.

जनरल पूल की स्थिति काफी खराब: CJI

राजस्थान में जिला जजों की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई थी. इस पर सीजेआई की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं से इसे लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने को कहा है.

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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें लेटरल एंट्री के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं. देशभर में इन पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का अभाव है. उन्होंने आगे कहा कि जनरल पूल की स्थिति काफी खराब है. सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायाधीशों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका का निस्तारण कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल करने के लिए कहा. 

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