केरल की सत्ता में वापसी और तमिलनाडु में नया समीकरण बनने के साथ ही कांग्रेस ने कर्नाटक में सीएम बदल दिया है. सिद्धारमैया की जगह पर डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन गए हैं. बुधवार को शिवकुमार के साथ 13 मंत्रियों ने शपथ ली है, जिसमें जी परमेश्वर को डिप्टीसीएम बनाया गया है. इसके साथ ही कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी बीके हरिप्रसाद को सौंप दी है.
कर्नाटक में सिद्धांरमैया और डीके शिवकुमार के पावर टसल के बीच कांग्रेस आलाकमान ने एक ऐसा ‘साइलेंट गेम’ खेला है, जिसने डीके के बढ़ते रसूख को न सिर्फ बैलेंस किया है, बल्कि मंत्रिमंडल के जरिए कांग्रेस ने एक नई सोशल इंजीनियरिंग को धार देने की कवायद की है.
दक्षिण भारत की राजनीति में कांग्रेस अपनी सियासी जड़े मजबूत करती जा रही है. मौजूदा समय में आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी को छोड़कर कांग्रेस की सभी राज्यों में सरकार है. ऐसे में कांग्रेस ने कर्नाटक में अपनी सियासी जड़े जमाए रखने के लिए डीके शिवकुमार, जी परमेश्वर और बीके हरिप्रसाद की 'तिकड़ी' बनाई है, जिसके सहारे 2028 में सत्ता रिपीट करने का प्लान है?
कर्नाटक सरकार की सोशल इंजीनियरिंग
कर्नाटक में गुरुवार को डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो साथ ही जी परमेश्वर उपमुख्यमंत्री बने. इसके अलावा कांग्रेस के 12 नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. इस तरह सीएम डीके शिवकुमार सहित कुल 14 मंत्री बने हैं और बाकी नेताओं को मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए आगे शामिल किया जाएगा.
कांग्रेस ने सिद्धारमैया की जगह पर भले ही डीके शिवकुमार को सीएम बना दिया हो, लेकिन मंत्रिमंडल के जरिए कर्नाटक के सियासी समीकरण को पूरी तरह से साधने का दांव चला है. कर्नाटक की प्रभावी वोक्कालिगा समुदाय से डीके शिवकुमार सीएम बने तो दलित समुदाय के डिप्टीसीएम जी परमेश्वर बने हैं.
वोक्कालिगा समुदाय से सीएम सहित दो मंत्री बने हैं, जो दलित समाज से डिप्टीसीएम सहित 3 मंत्री बने हैं. शिवकुमार सरकार में लिंगायत समुदाय से तीन मंत्री बने तो ओबीसी समुदाय से तीन मंत्री बने हैं. ओबीसी में कुरुबा और रेड्डी समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया गया है. इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई और आदिवासी समुदाय से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं.
कर्नाटक में किस जाति से कौन बना मंत्री
सीएम डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से हैं, कर्नाटक की दो सबसे प्रभावशाली सवर्ण जातियों में से एक है. वोक्कालिगा समाज से शिवकुमार सीएम तो कृष्णा बायरेगौड़ा मंत्री बनाए गए हैं. दलित समाज से जी परमेश्वर डिप्टीसीएम तो केएच मुनियप्पा और प्रियंक खड़गे मंत्री बने हैं. अनुसूचित जनजाति से सतीश जारकीहोली मंत्री बने हैं, जो वाल्मीकि समुदाय से आते हैं. उत्तर कर्नाटक के एक बेहद मजबूत और रसूखदार नेता.
लिंगायत समुदाय से तीन मंत्री बने हैं, जिसमें एमबी पाटिल, जो उत्तर कर्नाटक में लिंगायत समुदाय का बड़ा चेहरा हैं. ईश्वर खंड्रे, जो लिंगायतों के अखिल भारतीय वीरशैव महासभा से जुड़े हैं. इसके अलावा डॉ. शरण प्रकाश पाटिल हैं. ओबीसी समुदाय से कोरबा समाज के नेता यतीन्द्र सिद्धारमैया मंत्री बने हैं, जो सिद्धारमैया के बेटे हैं. कोरबा समाज से बैरती सुरेश मंत्री बने हैं तो ओबीसी के तहत आने वाली रेड्डी समाज से रामलिंगा रेड्डी मंत्री बने हैं. मुस्लिम समुदाय से यू टी खादर मंत्री बने हैं तो ईसाई समुदाय से केजे जॉर्ज को बनाया गया है.
शिवकुमार और परमेश्वर के सहारे बड़ा दांव
कर्नाटक की सियासत में जब भी डीके शिवकुमारका नाम आता है, तो एक ऐसे ‘संकटमोचक’ की तस्वीर उभरती है जिसके पास सत्ता की चाबी भी है और संगठन का दम भी. इसीलिए कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें सत्ती की मकान सौंपी है. डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के निर्विवाद नेता बनने की राह पर हैं. कर्नाटक की राजनीति में वोक्कालिगा और लिंगायत दो सबसे प्रभावशाली सवर्ण समुदाय हैं. इसीलिए कांग्रेस ने वोक्कालिगा के साथ लिंगायत वोटों का भी ख्याल रखा है.
डीके शिवकुमार को काउंटर और बैलेंस करने के लिए कांग्रेस ने जी. परमेश्वर और बीके हरिप्रसाद पर दांव खेला है. चुनावी नतीजे आने के बाद जब डीके शिवकुमार ने अकेले डिप्टी सीएम बनने की जिद पकड़ी थी, तब सिद्धांरमैया खेमे और आलाकमान ने जी परमेश्वर को आगे किया. परमेश्वर राज्य के सबसे बड़े दलित चेहरों में से एक हैं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं.
कांग्रेस हाईकमान ने रणनीतिक रूप से यह संदेश दिया कि अगर डीके शिवकुमार को वोक्कालिगा चेहरे के तौर पर बड़ी भूमिका मिल रही है, तो राज्य का बड़ा दलित वोटबैंक (जो कांग्रेस की रीढ़ है) उपेक्षित महसूस न करे. परमेश्वर ने खुलकर बयान दिया था कि अगर दलित समुदाय को उपमुख्यमंत्री का पद नहीं मिला, तो समाज में गलत संदेश जाएगा. इस एक बयान ने डीके शिवकुमार की 'सोल डिप्टी सीएम' वाली आक्रामकता को काफी हद तक कुंद कर दिया.
=हरिप्रसाद के जरिए ओबीसी को साधने का दांव
डीके शिवकुमार को बैलेंस करने वाले दूसरे सबसे बड़े किरदार बनकर बीके हरिप्रसाद उभरे हैं. हरिप्रसाद ओबीसी समुदाय से आते हैं और उनका दिल्ली दरबार (गांधी परिवार) में सीधा रसूख है. कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है. जानकारों का मानना है कि आलाकमान हरिप्रसाद जैसे कद्दावर नेता का उपयोग डीके शिवकुमार को यह याद दिलाने के लिए करता रहता है कि कर्नाटक में संगठन का मतलब सिर्फ 'डीके' नहीं है, बल्कि पार्टी के पास सीधे दिल्ली से जुड़े पुराने वफादार भी मौजूद हैं.
कर्नाटक में कांग्रेस की पारंपरिक ताकत अहिंदा (AHINDA) अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित का गठजोड़ रहा है. कांग्रेस ने कैबिनेट की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें 'अहिंदा' के कोर वोटबैंक को तो मजबूत किया ही गया है, साथ ही राज्य की दो सबसे प्रभावशाली लिंगायत और वोक्कालिगा को भी सत्ता में पूरा सम्मान दिया गया है. इसके जरिए कांग्रेस ने यह संदेश दिया है कि लिंगायत समुदाय अब केवल बीजेपी के भरोसे नहीं है, बल्कि कांग्रेस सरकार में भी उनके पास नीतिगत फैसले लेने की ताकत है.
कांग्रेस का यह जातीय प्रयोग यह सुनिश्चित करता है कि सरकार किसी एक व्यक्ति या एक जाति के इर्द-गिर्द केंद्रित न होकर, पूरे कर्नाटक के सामाजिक ताने-बाने का प्रतिनिधित्व करे. आने वाले लोकसभा और स्थानीय चुनावों के लिहाज से कांग्रेस की यह सोशल इंजीनियरिंग विरोधियों के लिए एक बेहद कड़ा और अभेद्य किला साबित होने वाली है.
कुबूल अहमद