नदियां हमेशा से इंसानों के लिए लाइफलाइन रही हैं. इसे जीवनदायनी भी कहा जाता है. सभी पुरानी इंसानी सभ्यता किसी न किसी नदी के आसपास ही पनपी है. ऐसे में लोग हमेशा से नदियों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहे हैं. खासकर उन नदियों को लेकर लोगों की जिज्ञासा बनी रहती है, जो अपने खास गुण या अजीब प्रकृति के लिए जानी जाती है. आज हम ऐसी ही कुछ नदियों के बारे में बात करेंगे, जिनके पानी का रंग रातोंरात बदलकर खून की तरह हो गया या हमेशा से लाल ही रहा है.
कुछ जगहों पर तो ऐसी नदियों और उनके लाल रंग से जुड़ी कई किस्से- कहानियां और पुराने मान्यताएं भी हैं. हालांकि, अजीब तरह से रंग बदलती इन नदियों की हकीकत कुछ और ही होती है. फिर भी ऐसी अजीबोगरीब प्रकृति वाली इन नदियों की कहानी लोगों को अपनी तरफ खींचती है.
बिहार की खूनी नदी
ऐसी ही एक नदी बिहार में बहती है. जिसका नाम ही खूनी नदी है. इस नदी का पानी खून की तरह सुर्ख लाल है. यह रोहतास जिले के जंगल के बीच एक छोटी सी अजीबोगरीब नदी है. इसे स्थानीय लोग खूनी या खूनिया नदी कहते हैं. इस छोटी सी नदी का रंग हमेशा से लाल रहा है. हरे-भरे जंगल के बीच से बहती यह नदीं ऊपर से देखने में ऐसी लगती है, जैसे इसमें खून ही खून भरा हो और वह जंगल के बीच से बह रहा है.
हालांकि, इस नदी के लाल रंग के पीछे कोई बहुत बड़ा रहस्य नहीं है. इस पहाड़ी और जंगली इलाके में लौह अयस्क की मात्रा बहुत अधिक है. जब पहाड़ों के रास्ते पानी बहता है, तो इसमें मौजूद आयरन हवा के संपर्क में आने से ऑक्सीकृत हो जाती है, जिससे पानी का रंग गाढ़ा लाल या नारंगी हो जाता है. इससे देखने में ऐसा लगता है कि नदी में खून बह रहा है.
ये है भारत की लाल नदी या रेड रीवर
ब्रह्मपुत्र नदी को भारत की लाल नदी या रेड रीवर के नाम से जाना जाता है. क्योंकि, बारिश के मौसम इसके पानी का रंग लाल और गहरा भूरा हो जाता है. मान्यता है कि हर साल जून में इस नदी का रंग तीन दिनों के लिए खून की तरह लाल हो जाता है. हालांकि, नदी का रंग इस तरह से बदलने के पीछे बारिश का मौसम, पहाड़ों से बहकर आई ज्यादा आयरन की मात्रा वाली मिट्टी व अन्य चीजें होती है.
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इसी तरह अरुणाचल प्रदेश में भी एक नदी बहती है, जिसका रंग लाल होता है. इस नदी का नाम लेहित नदी है. हिमालय की चट्टानों और मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसके कारण इसका पानी लाल-नारंगी दिखाई देता है.
जब रूस में बदल गया नदियों का रंग
दुनिया में कुछ ऐसी नदियां भी हैं, जिनका रंग अचानक से बदल गया और खून की तरह सुर्ख लाल हो गया. करीब 5-6 साल पहले रूस की एक नदी का रंग बदलकर लाल हो गया था. यह देख स्थानीय लोग काफी हैरान-परेशान हो गए था. इस नदी का नाम इस्कितिम्का है. यह नदी उन कई नदियों में से एक है, जिनके पानी का रंग रहस्यमयी तरीके से लाल हो चुका है. इस नदी के रंग बदलने के पीछे प्रदूषण एक बड़ी वजह बताई जा रही है. ये नदी रूस के केमोरेवो शहर के पास है. बत्तख और बाकी जानवर भी नदी का रंग देख यहां आने से कतराने लगे हैं.
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इसी तरह 10 साल पहले भी रूस में एक नदी का पानी अचानक से लाल हो गया था. साइबेरिया के नोरिल्स्क के पास एक नदी के रंग में अजीबोगरीब बदलाव के बाद आसपास के लोग डर गए थे. नोरिल्स्क क्षेत्र के निवासियों ने 7 सितंबर 2016 को वहां के डल्डिकिन नदी का पानी लाल होते देखा और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें पोस्ट करनी शुरू कर दी.
बाद में जांच से पता चला कि नदी का लाल रंग पास के निकेल कारखाने के कचरे से आया हो सकता है. सरकार ने भी एक बयान में कहा कि निकेल संयंत्र में टूटी हुई पाइप से रासायनिक कचरा रिसकर नदी के पानी को लाल कर रहा था.
अर्जेंटीना में नदी अचानक से हो गई थी खूनी
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के पास एक नदी का रंग भी रातोंरात बदल कर खून की तरह लाल हो गया था. इस नदी का नाम सारंडी धारा है. लोगों का ध्यान इस ओर तब गया जब इससे तेज दुर्गंध आने लगी. इस क्षेत्र में चमड़ा के कई कारखाने और अन्य उद्योग हैं. नदी के बदले रंग को देख लोगों में यह आशंका पैदा हो गई थी कि औद्योगिक रसायनों को किसी ने सारंडी धारा में डाल दिया गया था. अर्जेंटीना की राजधानी से लगभग 15 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एवेलानेडा नगर पालिका के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें दवाओं और रंगों में इस्तेमाल होने वाले एक जहरीले पदार्थ, एनिलिन की मौजूदगी का संदेह है.
चीन में देखते ही देखते लाल हो गया था नदी का पानी
एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में एक नदी रातोंरात रहस्यमय तरीके से खूनी लाल रंग की हो गई थी. साल 2014 में झेजियांग प्रांत में नदी सामान्य दिख रही थी. फिर एक घंटे के भीतर ही पूरी नदी का पानी लाल हो गया. वहां के स्थानीय लोगों ने यह भी बताया था कि हवा में एक अजीब सी गंध फैल गई थी.
तब लोगों ने कहा था कि सबसे अजीब बात यह हुई थी कि हम नदी में मछली पकड़ सकते थे, क्योंकि पानी आमतौर पर इतना साफ नहीं रहता था. वेनझोऊ पर्यावरण संरक्षण ब्यूरो के निरीक्षकों ने कहा कि उन्हें पानी के नमूनों से संकेत मिलता है कि संदिग्ध रंग नदी में अवैध रूप से कचरा फेंकने का परिणाम था.
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इन नदियों के बदलते खून जैसे रंग के पीछे जो भी वजहें सामने आई. उससे यह पता चलता है कि हर असामान्य घटना के पीछे कुछ न कुछ ऐसी ठोस वजह होती है, जो चीजों को अजीब और रहस्यमय बना देती है.
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