जब दुनिया का पहला न्यूक्लियर सबमरीन कमीशन हुआ, ऐसे समंदर की गहराई पर किया राज

आज के दिन ही दुनिया का सबसे पहला परमाणु पनडुब्बी कमीशन हुआ था. इसे अमेरिका ने बनाया था, लेकिन इसे विकसित एक रूसी मूल के इंजीनियर ने किया था.

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आज के दिन ही दुनिया का पहला न्यूक्लियर सबमरीन कमीशन हुआ था (Photo - Getty) आज के दिन ही दुनिया का पहला न्यूक्लियर सबमरीन कमीशन हुआ था (Photo - Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:30 AM IST

30 सितंबर 1954 को दुनिया का पहला न्यूक्लियर सबमरीन कमीशन हुआ था. इस पहली परमाणु पनडुब्बी का नाम था नॉटिलस. परमाणु पनडुब्बी की तकनीक सबसे पहले अमेरिका ने विकसित की और सबसे पहला न्यूक्लियर सबमरीन बनाया.नॉटिलस का निर्माण अमेरिकी नौसेना के कैप्टन हाइमन जी. रिकोवर ने किया था, जो एक शानदार रूसी मूल के इंजीनियर थे.रिकोवर 1946 में अमेरिकी परमाणु कार्यक्रम में शामिल हुए थे. 1947 में उन्हें नौसेना के न्यूक्लियर प्रॉप्लशन कार्यक्रम का प्रभारी बनाया गया और उन्होंने एक परमाणु पनडुब्बी पर काम शुरू कर दिया. 

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न्यूक्लियर सबमरीन नॉटिलस डीजल और इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों से कहीं ज़्यादा बड़ी थी. नॉटिलस की लंबाई 319 फीट थी और यह  3,180 टन का था.  यह लगभग असीमित अवधि तक पानी में डूबी रह सकती थी, क्योंकि इसके परमाणु इंजन को हवा की जरूरत नहीं थी और इसमें बहुत कम मात्रा में परमाणु ईंधन की जरूरत थी. यूरेनियम से चलने वाले परमाणु रिएक्टर से भाप बनती थी जो प्रॉप्लशन टर्बाइनों को चलाती थी. इससे नॉटिलस 20 नॉट से ज़्यादा की रफ्तार से पानी के अंदर चल  सकता था.

रिकोवर ने तय समय से कई साल पहले दुनिया की पहली न्यूक्लियर सबमरीन विकसित करने में सफलता प्राप्त कर ली थी. 1952 में नॉटिलस के निर्माण की नींव राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा रखी गई थी. 21 जनवरी 1954 को पहली महिला मैमी आइजनहावर ने ग्रोटन, कनेक्टिकट में टेम्स नदी में लॉन्च किए जाने पर इसके अग्रभाग पर शैंपेन की एक बोतल तोड़ी थी. 30 सितंबर, 1954 को यूएसएस नॉटिलस को कमीशन किया गया. यह पहली बार 17 जनवरी, 1955 की सुबह परमाणु ऊर्जा के तहत चला.

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अपनी सेवा के शुरुआती वर्षों में यूएसएस नॉटिलस ने कई पनडुब्बी यात्राओं के रिकॉर्ड तोड़े और अगस्त 1958 में उत्तरी ध्रुव की  पहली यात्रा पूरी की. 25 साल के करियर और लगभग 500,000 मील यानी की आठ लाख किलोमीटर चलने के बाद, नॉटिलस को 3 मार्च, 1980 को सेवामुक्त कर दिया गया. 1982 में एक राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्थल के रूप में दुनिया की पहली परमाणु पनडुब्बी 1986 में कनेक्टिकट के ग्रोटन में पनडुब्बी बल संग्रहालय में ऐतिहासिक जहाज नॉटिलस के रूप में प्रदर्शित हुई.

पनडुब्बियों के इतिहास की चर्चा करें तो कहा जाता है कि 332 ईसा पूर्व  सिकंदर महान ने मछली का अध्ययन करने के लिए कांच के बैरल में बैठकर समुद्र के अंदर डुबकी लगाई थी. पहली बार किसी यान में पानी के अंदर जाने की यही शुरुआत थी. वैसे डच वैज्ञानिक ने साल 1602 में दुनिया की पहली पनडुब्बी बनाई थी. इसके बाद साल 1775 में अमेरिकी डेविड बुशनेल ने टर्टल नाम की पहली सैन्य पनडुब्बी बनाई थी. यह हाथ से चलने वाली बलूत के आकार की डिवाइस थी.

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