अगर आप सोचते हैं कि गर्मियों की छुट्टियां सिर्फ आराम करने के लिए होती हैं, तो अमेरिका का स्कूल सिस्टम आपको थोड़ा अलग नजर आएगा. वहां का एकेडमिक ईयर आमतौर पर सितंबर से जून तक चलता है. इसके बाद बच्चों को करीब दो महीने की लंबी समर वेकेशन मिलती है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान ज्यादातर स्कूल बच्चों को होमवर्क नहीं देते. यानी छुट्टियों का मतलब सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि नई चीजें सीखना, घूमना-फिरना, खेलना और अपने शौक पूरे करना होता है.
छुट्टियों में क्या करते हैं बच्चे?
अमेरिका में बच्चे समर वेकेशन के दौरान तरह-तरह की एक्टिविटी में हिस्सा लेते हैं. कोई स्विमिंग सीखता है, कोई रेसलिंग, फुटबॉल, बेसबॉल, गोल्फ, टेनिस या दूसरे खेल खेलता है. कई बच्चे म्यूजिक, डांस, पेंटिंग, रोबोटिक्स, कोडिंग और साइंस कैंप जैसी एक्टिविटीज में भी शामिल होते हैं. इससे बच्चों को सिर्फ नई स्किल्स ही नहीं मिलती, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
सरकार भी देती है सुविधाएं
अमेरिका के कई शहरों में स्थानीय सरकार और समुदाय बच्चों के लिए पार्क, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स ग्राउंड और कम्युनिटी सेंटर में मुफ्त या कम फीस वाले समर प्रोग्राम चलाते हैं. कई जगहों पर बच्चों के लिए फ्री स्विमिंग, स्पोर्ट्स कैंप, लाइब्रेरी रीडिंग प्रोग्राम और दूसरी मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था भी होती है. इससे हर परिवार के बच्चों को कुछ नया सीखने का मौका मिलता है.
बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम रहता है
समर वेकेशन के दौरान बच्चों को स्कूल की पढ़ाई से पूरी तरह ब्रेक मिलता है. उन्हें बड़े-बड़े प्रोजेक्ट, रोजाना होमवर्क या परीक्षा की तैयारी का दबाव नहीं रहता. इस वजह से बच्चे मानसिक रूप से भी तरोताजा महसूस करते हैं. जब नया सत्र शुरू होता है, तो वे नई एनर्जी और उत्साह के साथ स्कूल लौटते हैं.
क्या इससे बच्चों को फायदा होता है?
कई शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि छुट्टियों में बच्चों को अपनी पसंद की एक्टिविटी करने का मौका मिलने से उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है. खेल, संगीत, यात्रा और नए अनुभव बच्चों की क्रिएटिविटी, आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल को मजबूत बनाते हैं. इसी कारण अमेरिका के कई बच्चे खेल, विज्ञान, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को बचपन से ही पहचान और निखार पाते हैं.
भारत में क्या स्थिति है?
भारत में भी गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, लेकिन कई स्कूल बच्चों को छुट्टियों में होमवर्क, प्रोजेक्ट और असाइनमेंट दे देते हैं. कई बच्चे छुट्टियों में ट्यूशन या कोचिंग भी जाते हैं. ऐसे में छुट्टियां होने के बावजूद उन्हें पढ़ाई से पूरी तरह ब्रेक नहीं मिल पाता. हालांकि, भारत में भी अब कई माता-पिता अपने बच्चों को समर कैंप, स्पोर्ट्स, डांस, म्यूजिक और दूसरी हॉबी क्लासेस में भेजने लगे हैं, जिससे वे नई चीजें सीख सकें.
हर शिक्षा प्रणाली की अपनी खासियत
हर देश का शिक्षा सिस्टम उसकी जरूरतों और संस्कृति के हिसाब से बनाया जाता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि एक देश का सिस्टम पूरी तरह बेहतर है और दूसरा नहीं. लेकिन अमेरिका के स्कूल सिस्टम की एक खास बात यह जरूर है कि वहां समर वेकेशन को बच्चों के लिए आराम करने, नई चीजें सीखने, परिवार के साथ समय बिताने और बचपन का आनंद लेने का अवसर माना जाता है. अगर भारत में भी समर वेकेशन के दौरान होमवर्क और प्रोजेक्ट कम कर दिए जाएं और बच्चों को खेल, हॉबी और नई स्किल्स सीखने के ज्यादा अवसर मिलें, तो क्या इससे उनका विकास और बेहतर हो सकता है?
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