20 साल तक US से लड़ता रहा था ईरान से काफी छोटा ये देश, लाखों लोग मरे, मगर नहीं मानी थी हार!

अमेरिका और ईरान के बीच इन दिनों आर-पार की लड़ाई जारी है. इस बीच युद्ध खत्म होगा या आगे और चलेगा, इसको लेकर यूएस प्रेसिडेंट ने अपने भाषण में युद्ध के मकसद, वजह और इसके परिणाम को लेकर अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने उन युद्धों का भी जिक्र किया, जो सालों तक चला था. इसमें उन्होंने वियतनाम युद्ध का भी नाम लिया और बताया कि यह एक ऐसा यु्द्ध था जो 20 साल चला था.

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वियतनाम में अमेरिका ने दो दशक तक लड़ाई जारी रखी थी (Photo - Getty) वियतनाम में अमेरिका ने दो दशक तक लड़ाई जारी रखी थी (Photo - Getty)

सिद्धार्थ भदौरिया

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:40 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध को लेकर 20 मिनट के भाषण में ऐतिहासिक वियतनाम युद्ध का भी जिक्र किया. आज करीब 5 दशक बाद अमेरिका यह स्वीकार करता है कि वियतनाम में अमेरिका ने 20 साल तक जंग छेड़ रखी थी. वियतनाम युद्ध अमेरिका की सबसे क्रूर, जघन्य और हिंसक कार्रवाईयों में से एक माना जाता है. दो दशक तक चले इस युद्ध में लगभग 58,220 अमेरिकी अपनी जान गंवा बैठे. 11 लाख उत्तरी वियतनामी और लगभग 2 लाख दक्षिणी वियतनामी सैनिक मारे गए थे. वहीं दोनों पक्षों में 20 लाख से अधिक नागरिक की जान गई थी. 

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ट्रंप ने जिस वियतनाम युद्ध का जिक्र किया, उसमें अमेरिका की इंट्री क्यों और कैसे हुई, ये समझना बहुत जरूरी है. क्योंकि, अमेरिका के प्रवेश से पहले  इस क्षेत्र में कई दशकों से संघर्ष जारी था. वियतनाम पहले फ्रांस का उपनिवेश था. तब इसे  फ्रांसीसी इंडोचीन कहा जाता था. वियतनाम के एक राष्ट्रवादी हो ची मिन्ह ने देश की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन शुरू किया. उस दौरान  1940 में नाजी जर्मनी ने फ्रांस पर नियंत्रण कर लिया. तभी दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी के दोस्त जापान ने इधर इंडोचीन पर हमला किया और इस तरह जापान का वियतनाम पर कब्जा हो गया.

1941 हो ची मिन्ह और उनके कम्युनिस्ट सहयोगियों ने वियतनाम की स्वतंत्रता के लिए वियत मिन्ह नाम से लीग बनाया और जापान और फ्रांसीसी कब्जे से आजादी के लिए लड़ाई शुरू कर दी. दूसरे युद्ध में जब-जब जिन पक्षों का पलड़ा भारी हुआ, वियतनाम में उनका प्रभाव बढ़ता रहा.  कभी जापान तो, कभी फ्रांसीसी प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष होते रहे. दूसरे विश्वयुद्ध में हार के बाद जापान की सेना वियतनाम से 1945 में लौटी तो मित्रराष्ट्रों के दबाव में फ्रांस समर्थक सम्राट बाओ दाई को सत्ता सौंप दी. तब हो ची मिन्ह की वियत मिन्ह सेना ने तुरंत विद्रोह कर दिया और उत्तरी शहर हनोई पर कब्जा कर लिया और हो को राष्ट्रपति बनाकर कम्युनिस्ट डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ वियतनाम की घोषणा कर दी. 

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यह हिस्सा उत्तरी वियतनाम था, जिसे चीन और सोवियत रूस का समर्थन मिला. वहीं दूसरी तरफ सम्राट बाओ दाई फ्रांस ने सम्राट बाओ का समर्थन किया और जुलाई 1949 में साइगॉन शहर को राजधानी बनाकर दक्षिणी वियतनाम राज्य की स्थापना की. हो ची मिन्ह की कम्युनिस्ट सेना और दक्षिणी वियतनाम की सेना के बीच  संघर्ष मई 1954 में डिएन बिएन फू की लड़ाई में उत्तरी वियत मिन्ह की निर्णायक जीत तक जारी रहा. 

जुलाई 1954 को जिनेवा में वियतनाम के विभाजन के साथ दोनों के बीच समझौता भी हुआ. इसमें वियतनाम में एक लोकतांत्रिक सरकार के गठन के साथ इसे  एकजुट करने के लिए दो वर्षों के भीतर चुनाव कराए जाने का निष्कर्ष निकला. वियतनाम को एक करने के लिए वहां चुनाव होते. इससे पहले अमेरिका ने खेल बिगाड़ दिया.  

1955 में कम्युनिस्ट विरोधी राजनेता न्गो डिन्ह डिएम ने सम्राट बाओ को हटाकर कर वियतनाम गणराज्य की सरकार (दक्षिणी वियतना) के राष्ट्रपति बन गए. तब तक शीत युद्ध की शुरुआत हो चुका था. संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोवियत संघ के किसी भी सहयोगी के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की घोषणा की और 1955 में राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर ने डिएम और दक्षिण वियतनाम को समर्थन देते हुए उत्तरी वियतनाम के विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य मदद देनी शुरू कर दी. 

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डिएम की सेना ने दक्षिण में वियत मिन्ह के समर्थकों पर नकेल कसना शुरू कर दिया. उत्तरी वियतनाम के इन वियत मिन्ह समर्थकों को दक्षिण में वियतकांग कहा जाता था. उत्तरी वियतनाम की सेना ने दक्षिण में डिएम की सरकार के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रहे वियतकांग विद्रोहियों को सैन्य मदद देने के लिए  लाओस और कंबोडिया के रास्ते दक्षिण वियतनाम तक एक सप्लाई मार्ग (हो ची मिन्ह ट्रेल) बनाया.

ऐसे हुई वियतनाम में अमेरिकी मिलिट्री की इंट्री
जुलाई 1959 में साइगॉन के पास गुरिल्ला युद्ध में  दक्षिण वियतनाम में तैनात अमेरिकी सैनिक मारे गए. इसके बाद मई 1961 में राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने दक्षिण वियतनाम में हेलीकॉप्टर और 400 ग्रीन बेरेट्स भेजे और वियत कांग के खिलाफ सीक्रेट ऑपरेशन शुरू किया. फिर कैनेडी ने दक्षिण वियतनाम की स्थितियों पर रिपोर्ट देने के लिए भेजी गई एक टीम ने डिएम को वियत कांग के खतरे का सामना करने में मदद करने के लिए अमेरिकी सैन्य, आर्थिक और तकनीकी सहायता बढ़ाने की सलाह दी थी. 1962 तक, दक्षिण वियतनाम में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लगभग 9,000 सैनिकों तक पहुंच गई थी, जबकि 1950 के दशक के दौरान यह संख्या 800 से भी कम थी.

इसी बीच नवंबर 1963 में, कैनेडी की डलास, टेक्सास में हत्या हो गई. तब कुछ अमेरिकी जनरलों ने दक्षिण वियतनाम में डिएम और उनके भाई, न्गो डिन्ह न्हु को सत्ता से हटा दिया गया और उनकी हत्या कर दी गई. दक्षिण वियतनाम में उत्पन्न इस राजनीतिक अस्थिरता ने कैनेडी के बाद प्रेसिडेंट बने लिंडन बी. जॉनसन और रक्षा सचिव रॉबर्ट मैकनामारा को वियतनाम में सैन्य हस्तक्षेप बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया.
अगस्त 1964 में जासूसी मिशन पर निकले यूएसएस मैडॉक्स पर टोंकिन की खाड़ी में उत्तरी वियतनामी गश्ती टॉरपीडो नौकाओं ने हमला किया.खाड़ी में मैडॉक्स और एक अन्य अमेरिकी जहाज पर दूसरे हमले का आरोप लगाया गया.

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पहला अमेरिकी पायलट वियतनाम में युद्धबंदी बना
इन घटनाओं के चलते राष्ट्रपति जॉनसन ने उत्तरी वियतनामी गश्ती नौका अड्डों पर हवाई हमले का आदेश दिया. दो अमेरिकी विमानों को मार गिराया गया और एक अमेरिकी पायलट, एवरेट अल्वारेज़ जूनियर, उत्तरी वियतनाम द्वारा बंदी बनाए जाने वाले पहले अमेरिकी पायलट बने.

नवंबर 1964 में सोवियत पोलित ब्यूरो ने उत्तरी वियतनाम को अपना समर्थन बढ़ाते हुए विमान, तोपखाना, गोला-बारूद, छोटे हथियार, रडार, वायु रक्षा प्रणाली, भोजन और चिकित्सा सामग्री भेजी. इसी बीच, चीन ने महत्वपूर्ण डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में सहायता के लिए उत्तरी वियतनाम में कई इंजीनियरिंग टुकड़ियां भेजीं.

फरवरी 1965 में राष्ट्रपति जॉनसन ने प्लेइकू शहर में अमेरिकी अड्डे और पास के कैंप होलोवे में हेलीकॉप्टर अड्डे पर वियत कांग के हमले के प्रतिशोध में ऑपरेशन फ्लेमिंग डार्ट के तहत उत्तरी वियतनाम पर भीषण बमबारी का आदेश दे दिया.  मार्च में राष्ट्रपति जॉनसन ने ऑपरेशन रोलिंग थंडर के तहत उत्तरी वियतनाम और हो ची मिन्ह ट्रेल पर  बमबारी का तीन साल का अभियान शुरू किया गया. उसी महीने, अमेरिकी मरीन सैनिक दक्षिण वियतनाम के दा नांग के पास समुद्र तटों पर उतरे, जो वियतनाम में प्रवेश करने वाले पहले अमेरिकी लड़ाकू सैनिक थे.

और अधिक सैनिक, और अधिक मौतें, और अधिक विरोध 
जुलाई 1965 में राष्ट्रपति जॉनसन ने वियतनाम में 50,000 और जमीनी सैनिकों को भेजने का आदेश दिया.  ऑपरेशन स्टारलाइट में, लगभग 5,500 अमेरिकी मरीन सैनिकों ने वियतनाम में अमेरिकी सेना के पहले बड़े जमीनी आक्रमण में प्रथम वियत कांग रेजिमेंट पर हमला किया. छह दिनों तक चले इस अभियान ने वियत कांग रेजिमेंट को तितर-बितर कर दिया, हालांकि इसने जल्द ही खुद को फिर से संगठित कर लिया.

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नवंबर 1965 में युद्ध की पहली बड़ी लड़ाई, ला ड्रैंग घाटी की लड़ाई में लगभग 300 अमेरिकी सैनिक मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. दक्षिण वियतनाम में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को हेलीकॉप्टर द्वारा युद्धक्षेत्र में उतारा गया और वापस ले जाया गया, जो बाद में एक आम रणनीति बन गई.1966 में वियतनाम में अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 400,000 हो गई.

जून 1966 में अमेरिकी विमानों ने हनोई और हाइफोंग में लक्ष्यों पर हमले किए, जो उत्तरी वियतनाम के शहरों पर किए गए पहले ऐसे हमलों में से थे. वियतनाम में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 500,000 हो गई. अप्रैल 1967 में वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क शहर और सैन फ्रांसिस्को में वियतनाम युद्ध के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए.

 डैक तो की लड़ाई में, अमेरिकी और दक्षिण वियतनामी सेनाओं ने मध्य हाइलैंड्स में कम्युनिस्ट सेनाओं के आक्रमण का प्रतिरोध किया. अमेरिकी सेना को लगभग 1,800 सैनिकों का नुकसान हुआ. जनवरी-अप्रैल 1968 में दक्षिण वियतनाम के खे सान्ह में स्थित अमेरिकी मरीन गैरीसन पर उत्तरी वियतनाम की पीपुल्स आर्मी (पीएवीएन) की कम्युनिस्ट सेनाओं ने तोपखाने से बमबारी की. 77 दिनों तक, मरीन और दक्षिण वियतनामी सेनाओं ने घेराबंदी का सामना किया.

अमेरिका समर्थित दक्षिण वियतनाम पर हुआ जबदस्त हमला
 1968 में टेट आक्रमण शुरू हुआ, जिसमें वियत मिन्ह और उत्तरी वियतनामी सेनाओं का संयुक्त हमला शामिल था.  ह्यू और साइगॉन सहित दक्षिण वियतनाम के 100 से अधिक शहरों और चौकियों पर हमले किए गए और अमेरिकी दूतावास पर भी आक्रमण किया गया. इन प्रभावी और रक्तपातपूर्ण हमलों ने अमेरिकी अधिकारियों को झकझोर दिया और युद्ध में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, साथ ही इस क्षेत्र से अमेरिकी सेना की धीरे-धीरे वापसी की शुरुआत भी हुई.

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11 से 17 फरवरी 1968 में  युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों की सबसे अधिक मौतें हुईं, जिनमें 543 अमेरिकी सैनिकों की मृत्यु हुई. फरवरी-मार्च 1968 में ह्यू और साइगॉन में लड़ाई अमेरिकी जीत के साथ समाप्त हुई क्योंकि वियत कांग गुरिल्लाओं को शहरों से खदेड़ दिया गया.

यह भी पढ़ें: जब वियतनाम से लौटे US सैनिक, दो दशक तक चले युद्ध का ऐसे हुआ था अंत

16 मार्च, 1968 माई लाई में अमेरिकी नरसंहार में, अमेरिकी सेना ने 500 से अधिक नागरिकों की हत्या कर दी. नवंबर 1968 में रिपब्लिकन रिचर्ड एम. निक्सन ने वियतनाम में "कानून और व्यवस्था" बहाल करने और अनिवार्य सैन्य सेवा समाप्त करने के चुनावी वादों पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीता.

 मई 1969 में लाओस की सीमा से लगभग एक मील दूर स्थित अप बिया पर्वत पर, अमेरिकी पैराट्रूपर्स ने उत्तरी वियतनामी लड़ाकों पर हमला किया, ताकि लाओस से उत्तरी वियतनामी घुसपैठ को रोका जा सके. अमेरिकी सैनिकों ने अंततः उस स्थान पर (अस्थायी रूप से) कब्जा कर लिया, जिसे 10 दिनों तक चले भीषण नरसंहार के कारण पत्रकारों ने हैमबर्गर हिल का उपनाम दिया.

वियतनाम से धीरे-धीरे अमेरिकी सैनिकों की वापसी
1969-1972 में निक्सन प्रशासन ने धीरे-धीरे दक्षिण वियतनाम में अमेरिकी सेनाओं की संख्या कम कर दी. वियतनाम में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 1969 में 549,000 के उच्चतम स्तर से घटकर 1972 में 69,000 रह गई.

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27 जनवरी, 1973 को  राष्ट्रपति निक्सन ने पेरिस शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे वियतनाम युद्ध में अमेरिका की प्रत्यक्ष भागीदारी समाप्त हो गई. उत्तरी वियतनाम ने युद्धविराम स्वीकार कर लिया. लेकिन जैसे ही अमेरिकी सेना वियतनाम से रवाना हुई, उत्तरी वियतनामी सैन्य अधिकारियों ने दक्षिण वियतनाम पर कब्जा करने की साजिशें रचनी जारी रखीं.

अप्रैल 1975 में साइगॉन के पतन में , दक्षिण वियतनाम की राजधानी पर कम्युनिस्ट सेनाओं का कब्जा हो गया और दक्षिण वियतनाम की सरकार ने आत्मसमर्पण कर दिया. अमेरिकी मरीन और वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने 18 घंटे के व्यापक निकासी अभियान में 1,000 से अधिक अमेरिकी नागरिकों और लगभग 7,000 दक्षिण वियतनामी शरणार्थियों को साइगॉन से बाहर निकाला.

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