प्रिंस-प्रिंसेज और बगावत... खामेनेई के खात्मे के बाद क्या अब ईरान में लौटेंगे राजवंश के दिन?

ईरान के अंतिम शाह की पोतियां और निर्वासित राजकुमार रजा शाह की तीनों बेटियां ने अपने देश के कट्टर दुश्मन, अमेरिका में जन्मीं और पली बढ़ीं. जब से अमेरिका में खामेनेई शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ है, ये राजपरिवार ईरान में सत्ता परिवर्तन की अपील कर रहा है.

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1979 के बाद से अमेरिका में रह रहे हैं ईरान के निर्वासित राजकुमार और राजकुमारियां (Photo - Instagram) 1979 के बाद से अमेरिका में रह रहे हैं ईरान के निर्वासित राजकुमार और राजकुमारियां (Photo - Instagram)

सिद्धार्थ भदौरिया

  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

ईरान के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी अपने परिवार के साथ अमेरिका में ही रहते हैं. पूरा शाह परिवार ईरान में सत्ता परिवर्तन के सपोर्ट में लोगों से सड़क पर उतरने और अमेरिका से खामेनेई शासन के सफाए में मदद की अपील करता रहा है. ऐसे में जब ईरानी के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है और सवाल उठ रहा कि क्या अब रजा पहलवी ईरान लौटेंगे. जानते हैं, ईरान के इस शाही परिवार में कौन-कौन हैं और उनका क्या स्टैंड है. 

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जनवरी 1979 में, ईरानी क्रांति ने ईरान के अंतिम शाह और राजशाही को विस्थापित कर दिया और एक इस्लामी गणराज्य की स्थापना की. राजशाही के अपदस्थ नेता, शाह मोहम्मद रजा पहलवी, अमेरिका चले गए. अब उनके उत्तराधिकारी रजा पहलवी और उनका परिवार अमेरिका में ही रहता है. यहां पहलवी राजवंश और उसकी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नए युग की शुरुआत हुई.

1992 में, युवराज रजा पहलवी और उनकी पत्नी यास्मीन ने अपनी पहली संतान, नूर नाम की बेटी का स्वागत किया, जो ईरानी शाही परिवार की पहली ऐसी सदस्य थीं जिनका जन्म अपने देश से बाहर हुआ था. राजकुमारी नूर की दो छोटी बहनें हैं - इमान पहलवी और फराह फहलवी. इमान और फराह ने भी कभी ईरान में कदम नहीं रखा है.  पिता की तुलना में काफी इन तीनों राजकुमारियों की परवरिश अलग माहौल में हुई. 

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ईरान के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी की बड़ी बेटी हैं नूर पहलवी.                                        (Photo - Instagram/@noorzpahlavi)

सबसे बड़ी बहन नूर का जन्म वाशिंगटन में हुआ था और वह शाही परिवार को मिलने वाली सुविधाओं के बिना पली-बढ़ीं. फिर भी नूर ने समय-समय पर अपने देश के प्रति भावनाएं व्यक्त करती रही हैं. हाल में ही नूर पहलवी ने खामेनेई शासन को चैलेंज करते हुए ईरान के नागरिकों से सत्ता परिवर्तन के लिए जोर लगाने की अपील की थी. नूर पहलवी की सत्ता परिवर्तन की भावुक अपील ऐसे समय में आई थी, जब ईरान की सड़कों पर और दुनिया भर में खामेनेई शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा था.

नूर पहलवी ने साफ तौर पर कहा था कि ईरान के अंदर और बाहर से पड़ रहे दबावों की वजह से पता चलता है कि शासन में बदलाव की इतनी प्रबल संभावना पहले कभी नहीं थी. उन्होंने ये भी कहा था कि हालात सत्ता परिवर्तन के इतने करीब कभी नहीं रहे और शासन इतना कमजोर कभी नहीं रहा.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, नूर ने मैरीलैंड के पोटोमैक स्थित बुलिस स्कूल से हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और ​कोलंबिया विश्वविद्यालय से एमबीए किया है.  कुछ ईरानी अब भी तीनों बहनों को शाही परिवार की सदस्य के रूप में देखते हैं, इसलिए वे दो अलग-अलग दुनियाओं के बीच फंसी हुई हैं.

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यह भी पढ़ें: 'सत्ता परिवर्तन के इतने करीब...', खामेनेई को ईरान की प्रिंसेज नूर पहलवी का चैलेंज

वहीं दूसरी बेटी इमान पहलवी ने ब्रैडली शेरमैन नाम के एक यहूदी व्यवसायी से शादी की है. 2023 में शेरमन से इमान ने शादी की थी.युवराज रजा पहलवी और उनकी पत्नी यास्मीन भी इस शादी समारोह में शामिल हुई थीं. जब इन दोनों की शादी हुई तब दुनियाभर में ये चर्चा होने लगी थी कि अगर 1979 की क्रांति नहीं हुई होती तो ये शादी भी एक शाही विवाह की लिस्ट में आता. 

रजा पहलवी की दूसरी बेटी इमान पहलवी ने यहूदी कारोबारी से शादी की है  (Photo - Instagram/@imanlpahlavi)

सबसे छोटी राजकुमारी का नाम फराह पहलवी है. वह भी अपनी दोनों बड़ी बहनों की तरह अमेरिका में ही जन्मीं और पली बढ़ीं. फराह का नाम उनकी दादी के नाम पर रखा गया है. इनके पिता रजा पहलवी 50 साल से अधिक समय तक अपने देश से बाहर रहे हैं और हमेशा से ईरान की इस्लामिक शासन का विरोध करते रहे हैं. उन्होंने कई मौके पर सत्ता परिवर्तन की स्थिति में अमेरिका की मदद से ईरान लौटने की मंशा जताई है. 

फराह पहलवी प्रिंस रजा पहलवी की सबसे छोटी बेटी हैं (Photo - Instagram/@farahhpahlavi)

इतिहास भी गवाह है कि 1953 में पहले भी अमेरिका ने रजा शाह के पिता को ईरान के सत्ता पर काबिज किया था. ऐसे में अब आगे क्या होता है ये देखना होगा. क्योंकि खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे को उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी हो चुकी है.

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खामनेई शासन के विरोध के प्रतीक के तौर पर आंदोलनकारी दुनिया भर में  सिगरेट से खामेनेई की तस्वीर जलाते दिखे थे (Photo - AP)

जब ईरान में खामेनेई शासन विरोधी आंदोलन छिड़ा था, तो देश के अंदर और बाहर दोबारा पहलवी परिवार के वापस लौटने की अपील की जाने लगी थी. इस दौरान विरोध के प्रतीक के तौर पर ऐसी तस्वीरें सामे आईं, जिसमें खामेनेई विरोधी आंदोलनकारी सिगरेट से ईरान के सुप्रीम लीडर की तस्वीर जलाते दिखाई दिए थे.

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