28 अगस्त 1898 का दिन पेप्सी के इतिहास में बेहद खास है. इसी दिन करीब 130 साल पहले अमेरिका के एक छोटे से शहर में एक लोकप्रिय ड्रिंक को उसका नया नाम मिला था. इससे पहले लोग इसे 'ब्रैड्स ड्रिंक' के नाम से जानते थे. बाद में यही ड्रिंक पेप्सी कोला के नाम से दुनिया भर में मशहूर हुई.
अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना राज्य के न्यू बर्न शहर में 28 अगस्त 1898 को एक ऐसी चीज हुई, जिसका असर आने वाले दशकों में पूरी दुनिया पर दिखने वाला था. शहर के मिडिल और पोलॉक स्ट्रीट के कोने पर मौजूद एक ड्रगस्टोर में लोग एक खास तरह की मीठी और झागदार ड्रिंक पीने पहुंचते थे. उस समय इसका नाम था ब्रैड्स ड्रिंक.
इस ड्रिंक को ड्रगस्टोर के मालिक कालेब ब्रैडहम ने तैयार किया था. उनके नाम पर ही इसे ‘ब्रैड्स ड्रिंक’ कहा जाता था. गर्मियों में यह लोगों के लिए काफी पसंदीदा पेय बन गया था.
चीनी, कारमेल और कोला नट से बनती थी ड्रिंक
ब्रैड्स ड्रिंक का स्वाद आज की पेप्सी से अलग था. इसे बनाने में चीनी, कारमेल, कोला नट, नींबू का तेल, जायफल और कार्बोनेटेड पानी का इस्तेमाल किया जाता था. गर्मी के मौसम में ठंडी और झागदार ड्रिंक लोगों को खूब पसंद आती थी.
कालेब ब्रैडहम का दावा था कि यह सिर्फ प्यास बुझाने वाला पेय नहीं है, बल्कि पाचन में भी मदद करता है. वह इसे अपच यानी डिस्पेप्सिया के खिलाफ मददगार बताते थे. हालांकि, इस ड्रिंक की लोकप्रियता की एक और वजह थी. उस दौर में अमेरिका में शराब से दूरी बनाने वाला टेम्परेंस मूवमेंट तेजी से बढ़ रहा था. खासकर ग्रामीण दक्षिणी इलाकों में शराब के खिलाफ माहौल मजबूत था. ऐसे में लोगों के लिए यह मीठा और बुलबुलेदार पेय दोस्तों के साथ मिलने-जुलने का एक अच्छा बहाना भी बन गया था.
फिर 28 अगस्त 1898 को बदल गया नाम
ब्रैड्स ड्रिंक को स्थानीय लोग पहले से पसंद करते थे. लेकिन कालेब ब्रैडहम समझ चुके थे कि अगर इस ड्रिंक को न्यू बर्न से बाहर ले जाना है, तो इसे एक ऐसा नाम चाहिए जिसे लोग आसानी से याद रख सकें.
इसी सोच के साथ 28 अगस्त 1898 को ब्रैडहम ने ब्रैड्स ड्रिंक को पेप्सी कोला नाम से मार्केट करना शुरू किया. यहीं से इस ड्रिंक की एक नई पहचान बनने की शुरुआत हुई.
ब्रेड्स ड्रिंक नाम में स्थानीय और घरेलू अंदाज था, लेकिन पेप्सी नाम ज्यादा आकर्षक और बड़े बाजार के लिए बेहतर लगता था. ब्रैडहम को शायद अंदाजा था कि अगर उनका पेय देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचना है, तो नाम भी ऐसा होना चाहिए जिसे लोग आसानी से याद रखें. पेप्सी का नाम बदलना सिर्फ एक ड्रिंक की रीब्रांडिंग की कहानी नहीं थी. यह उस समय अमेरिका में हो रहे बड़े आर्थिक बदलाव की भी झलक थी.
19वीं सदी के आखिर में अमेरिका तेजी से औद्योगिक और व्यावसायिक रूप से बदल रहा था. लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सिर्फ स्थानीय दुकानदारों पर निर्भर नहीं रहना चाहते थे. दूसरी तरफ रेलवे का तेजी से विस्तार हो रहा था. इससे सामान को एक शहर से दूसरे शहर और फिर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना आसान हो गया.
अब कारोबारियों के सामने नई चुनौती थी. अपने उत्पाद को दूर के ग्राहकों तक कैसे पहचान दिलाई जाए?इसका एक जवाब था मजबूत और याद रहने वाला ब्रांड नाम. इसी दौर में कई दूसरे अमेरिकी ब्रांड भी स्थानीय कारोबार से निकलकर बड़े बाजार की ओर बढ़ रहे थे.
क्या पेप्सी में कभी पेप्सिन डाला जाता था?
पेप्सी के नाम को लेकर एक दिलचस्प भ्रम आज भी सुनने को मिलता है. कई लोग मानते हैं कि पेप्सी नाम पेप्सिन नाम के डाइजेस्टिव एंजाइम से आया और कभी पेप्सी की रेसिपी में पेप्सिन इस्तेमाल होता था. लेकिन ऐसा नहीं है. पेप्सी के फॉर्मूले में पेप्सिन नाम का पाचन एंजाइम कभी शामिल नहीं रहा.
यानी आज दुनिया जिस नाम को पेप्सी के तौर पर जानती है, उसके पीछे सिर्फ किसी पाचन एंजाइम की कहानी नहीं है. असल कहानी एक स्थानीय ड्रगस्टोर, उसके मालिक कालेब ब्रैडहम और उस दौर में तेजी से बदलती अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी है.
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