कहीं 'नकली' व्हिस्की तो नहीं पी रहे... क्या भारत में इसके नाम पर कुछ और बिकता है?

क्या आप जानते हैं भारत में बनने वाले व्हिस्की, विदेश वाली व्हिस्की से कितनी अलग है? क्या भारत वाली व्हिस्की ऑरिजनल नहीं होती है?

Advertisement
भारत में व्हिस्की के बनने का प्रोसेस काफी अलग है. (Photo: Pexels) भारत में व्हिस्की के बनने का प्रोसेस काफी अलग है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:09 PM IST

हाल ही में एक खबर आई थी, शायद आपने भी पढ़ी होगी कि भारत में कुछ व्हिस्की, रम के फ्लेवर्स को बेचने पर रोक लगा दी गई है. इसके बाद से भारत में मिलने वाली व्हिस्की और रम की ऑथेंटिसिटी पर सवाल उठने लगे हैं कि जो आप पी रहे हैं, वो असली है या नहीं. तो आज समझने की कोशिश करते हैं कि भारत में जो व्हिस्की बेची जाती है, वो ऑरिजनल व्हिस्की है या नहीं और अगर ऐसा नहीं है तो फिर असली वाली व्हिस्की कैसे बनती है. 

Advertisement

सबसे पहले समझिए, व्हिस्की आखिर होती क्या है?

दुनिया के ज्यादातर व्हिस्की बनाने वाले देशों में इसकी शुरुआत अनाज से होती है. सबसे पहले जौ, मक्का, राई या गेहूं जैसे अनाज को पानी के साथ फर्मेंट किया जाता है. इसके बाद उसे डिस्टिल करके व्हिस्की बनाया जाता है. फर्मेंट वाटर को तुरंत बोतल में नहीं भरा जाता. इसे ओक की लकड़ी के पीपों में कई सालों तक रखा जाता है. इसी दौरान इसमें रंग, खुशबू और स्वाद विकसित होता है. यही वजह है कि स्कॉच, बोरबॉन या दूसरी पारंपरिक व्हिस्कियों का स्वाद केवल एल्कोहल से नहीं, बल्कि अनाज, डिस्टिलेशन और बैरल में बिताए गए समय से बनता है. स्कॉच और बरबन जैसी विश्व विख्यात व्हिस्की को बनाने में तो और भी सख्त मानकों को अपनाया जाता है.

भारत की कहानी थोड़ी अलग है

Advertisement

भारत में बनने वाली स्कॉटलैंड, अमेरिका या आयरलैंड में बनने वाली पारंपरिक व्हिस्की से बिल्कुल अलग है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि भारत में  जो व्हिस्की बनती है, वो एकदम बेकार या बिल्कुल अलग है. भारत में भी व्हिस्की के लिए नियम हैं. भारत में व्हिस्की में एग्रीकल्चर ऑरिजन से बनी न्यूट्रल स्पिरिट के इस्तेमाल की अनुमति है. यही वह बिंदु है, जहां भारत की कई लोकप्रिय व्हिस्कियां पारंपरिक स्कॉच या बोरबॉन से अलग रास्ता अपनाती हैं. 

यह न्यूट्रल स्पिरिट आखिर होती क्या है?

भारत में इसे Extra Neutral Alcohol (ENA) कहा जाता है. यह करीब बिना रंग, बिना गंध और लगभग बिना स्वाद वाली एल्कोहल होती है. इसे अलग-अलग तरीकों से बनाया जा सकता है, लेकिन भारत में इसका सबसे बड़ा सोर्स गन्ने का शीरा (Molasses) है. चीनी बनने के बाद बचने वाले शीरे को फर्मेंट और डिस्टिल करके ENA तैयार की जाती है. 

भारत में कैसे बनती है व्हिस्की?

भारत में बिकने वाली कई IMFL, जिसे इंडियन मेड फॉरेन लिकर कहा जाता है. इन व्हिस्की में मुख्य एल्कोहल बेस ईएनए होता है. इसके साथ कुछ मात्रा में माल्ट या ग्रेन व्हिस्की मिलाई जाती है. फिर पानी, कैरेमल और अनुमति प्राप्त फ्लेवरिंग के जरिए अंतिम स्वाद, रंग और खुशबू तैयार की जाती है. नियमों के अनुसार, अगर यह प्रोडक्ट तय मानकों को पूरा करता है, तो इसे व्हिस्की के रूप में बेचा जा सकता है. यही वजह है कि भारत में कानूनी रूप से व्हिस्की कहलाने वाला हर उत्पाद, पारंपरिक स्कॉच या सिंगल माल्ट जैसी निर्माण प्रक्रिया से होकर नहीं गुजरता. 

Advertisement

सीधे शब्दों में समझें तो ऑरिजनल व्हिस्की बनाने का प्रोसेस काफी लंबा होता है और उसे ग्रेन (मॉल्टेड ग्रेन,जौ, मक्का, गेहूं) से ही बनाया जाता है. फिर काफी दिनों तक रखा जाता है. लेकिन, भारत में जो व्हिस्की बनाई जाती है, उसका प्रोसेस अलग है और स्प्रिट (गन्ने वाली) में सिर्फ ऑरिजनल व्हिस्की मिलाकर व्हिस्की तैयार कर दी जाती है. 

तो क्या सारी व्हिस्की ऐसी होती है?

नहीं ऐसा नहीं है. भारत में कई तरह की सिंगल माल्ट व्हिस्कियां भी बनती हैं, जिनकी पूरी स्पिरिट अनाज से तैयार होती है और उन्हें ओक बैरल में परिपक्व किया जाता है. इनकी निर्माण प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय पारंपरिक शैली के काफी करीब है. दो बोतलों पर 'व्हिस्की' लिखा हो सकता है, लेकिन दोनों के भीतर मौजूद स्पिरिट, उसका स्रोत, एजिंग, बैरल और ब्लेंडिंग की प्रक्रिया अलग हो सकती है. यही वजह है कि स्वाद, खुशबू और कीमत में बड़ा अंतर दिखाई देता है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »