उत्तराखंड में आंधी और भारी बारिश, IMD ने 4 दिन के लिए जारी किया अलर्ट

उत्तराखंड में अगले दो दिनों तक तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का खतरा बना रहेगा, जबकि उसके बाद भी मौसम पूरी तरह शांत नहीं होगा. IMD की चेतावनी साफ संकेत दे रही है कि आने वाले चार दिन लोगों और प्रशासन दोनों के लिए सतर्क रहने वाले हैं.

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खराब मौसम जनजीवन और यातायात पर असर डाल सकता है. खराब मौसम जनजीवन और यातायात पर असर डाल सकता है.

अंकित शर्मा

  • देहरादून,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:54 AM IST

उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर बिगड़ने वाला है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों के लिए अगले दो दिनों तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान राज्य के पहाड़ी जिलों में मौसम बेहद खराब रह सकता है और तेज से बहुत तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की संभावना है. इसके बाद 30 अप्रैल और 1 मई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है.

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28 अप्रैल को नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में मौसम सबसे ज्यादा खराब रहने की आशंका जताई गई है. इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि कई जगहों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं.

राज्य के बाकी पहाड़ी जिलों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है. इन इलाकों में भी तेज बारिश और आंधी-तूफान का असर देखने को मिल सकता है. वहीं हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में भी गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है।

29 अप्रैल को भी हालात सामान्य नहीं रहेंगे. इस दिन देहरादून, नैनीताल, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में फिर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है.

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IMD ने 30 अप्रैल और 1 मई के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि इन दिनों भी राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं. हालांकि इन दिनों बारिश की तीव्रता पहले दो दिनों की तुलना में थोड़ी कम रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें, क्योंकि भारी बारिश के चलते भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.

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