होली के बाद उत्तराखंड में नए CM की घोषणा, चौंका सकते हैं ये 2 नए नाम

Uttarakhand News: सूत्रों के अनुसार, बीजेपी विधायक धन सिंह रावत और सतपाल महाराज इस बार भी मुख्यमंत्री की रेस में आगे चल रहे हैं. हालांकि, बीजेपी विधायकों के अलावा दो अन्य नेताओं नाम पर भी विचार कर सकती है.

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उत्तराखंड में CM के लिए दो नए नामों पर भी विचार. (फाइल) उत्तराखंड में CM के लिए दो नए नामों पर भी विचार. (फाइल)

मंजीत नेगी

  • देहरादून,
  • 12 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 10:38 PM IST
  • 19 मार्च के बाद CM के नाम का ऐलान संभव
  • अजय भट्ट और अनिल बलूनी के नाम पर भी विचार
  • धन सिंह रावत और सतपाल महाराज सबसे आगे

भारतीय जनता पार्टी (BJP) होली के बाद उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर सकती है. 19 मार्च को देहरादून में बीजेपी के नए विधायकों की बैठक होगी, जिसमें  सीएम पद के लिए धन सिंह रावत और सतपाल महाराज के सबसे आगे रहने वाले विधायकों में से हो सकते हैं.

राजनीति के जानकारों की मानें तो बीजेपी अजय भट्ट और अनिल बलूनी के नाम पर भी विचार कर सकती है. भट्ट केंद्र की मोदी सरकार में रक्षा और पर्यटन मंत्रालय के राज्य मंत्री हैं, तो वहीं बलूनी उत्तराखंड में पार्टी की मीडिया सेल के प्रमुख हैं. 

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दरअसल, 70 सीटों वाली उत्तराखंड विधानसभा में बीजेपी ने 47 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है जबकि इस राज्य में लगातार दूसरी बार कोई पार्टी वापसी नहीं कर पाई. हालांकि, मौजूदा सीएम के चुनाव हारने से अब पार्टी में इस पद के लिए कई नामों की चर्चा हो रही है. 

उत्तराखंड के बीजेपी नेताओं के मुताबिक, चुने गए पार्टी के विधायकों में से ही किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. हालांकि, केंद्रीय आलाकमान होली के बाद देहरादून में पर्यवेक्षक भेजकर रायशुमारी करवाएगा और  उसी के आधार पर नए नाम का ऐलान करेगा.  

बता दें कि एक तरफ उत्तराखंड में बीजेपी बहुमत से चुनाव जीती, वहीं दूसरी तरफ खटीमा से मुख्यमंत्री के दावेदार पुष्कर सिंह धामी चुनाव हार गए. उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी भुवन कापड़ी ने लगभग 6000 वोटों से हराया.

बीजेपी ने राज्य में लगातार दूसरी बार सत्ता में आकर भले ही इतिहास रचा हो, लेकिन सीएम पुष्कर सिंह धामी उस मिथक को तोड़ने में नाकामयाब रहे जिसके लिए उत्तराखंड जाना जाता है. दरअसल, प्रदेश में एक मिथक हैं कि जो भी नेता मुख्यमंत्री आवास में रहता है, वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता है. चाहे वह भुवन चंद्र खंडूरी हों, या फिर रमेश पोखरियाल निशंक, हरीश रावत या फिर विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत हों और या फिर अब चुनाव हारने वाले पुष्कर सिंह धामी. 

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