अंकिता भंडारी मर्डर केस: ऑडियो विवाद में BJP के पूर्व विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार

अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़े ऑडियो विवाद में पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर को देहरादून पुलिस ने गिरफ्तार किया है. उन पर एक बीजेपी नेता का नाम हत्याकांड से जोड़ने वाले ऑडियो-वीडियो क्लिप फैलाने का आरोप है.

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अंकिता भंडारी केस से जुड़े ऑडियो विवाद में पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार. (File Photo) अंकिता भंडारी केस से जुड़े ऑडियो विवाद में पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:58 AM IST

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़े कथित ऑडियो विवाद में पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. देहरादून पुलिस ने यह कार्रवाई उस मामले में की है, जिसमें एक ऑडियो क्लिप के जरिए एक बीजेपी नेता का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने का आरोप लगा था. पुलिस के मुताबिक, डालनवाला थाना और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की संयुक्त टीम ने हरिद्वार के बुग्गावाला इलाके से सुरेश राठौर को हिरासत में लिया.

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दरअसल, यह पूरा मामला बीजेपी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम की शिकायत के बाद बढ़ा. उन्होंने आरोप लगाया था कि सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर से जुड़े कुछ ऑडियो-वीडियो क्लिप्स जानबूझकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे हैं. उनका कहना था कि इस हरकत के पीछे का मकसद उनकी और बीजेपी के अन्य बड़े नेताओं की छवि को खराब करना है. दुष्यंत गौतम के अलावा आरती गौर नाम की महिला ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. दोनों का साफ कहना था कि इस मनगढ़ंत कंटेंट को सिर्फ बदनामी के इरादे से शेयर किया गया.

दूसरी तरफ, सुरेश राठौर ने खुद पर लगे इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था. उन्होंने अपने खिलाफ देहरादून और हरिद्वार जिलों में दर्ज हुई चार FIR को उत्तराखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इस मामले पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश थपलियाल की सिंगल बेंच ने हाल ही में राठौर को आंशिक राहत दी थी. कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज चार में से दो एफआईआर को तो रद्द कर दिया, लेकिन बाकी बची दो एफआईआर को खत्म करने से साफ इनकार कर दिया.

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हाई कोर्ट ने आरती गौर और दुष्यंत गौतम की तरफ से दर्ज कराई गई FIR पर पुलिस जांच जारी रखने का आदेश दिया था. अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि पहली नजर में दोनों शिकायतों से गंभीर अपराध का मामला बनता है. कोर्ट का मानना था कि सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति का नाम इतने जघन्य हत्याकांड से जोड़ना और उसकी छवि को नुकसान पहुंचाना एक बड़ा जुर्म है, इसलिए इसकी पूरी गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है. हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही पुलिस ने एक्शन तेज किया और पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर लिया.
 

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