हिंदू राष्ट्र घोषित हो भारत, मुस्लिमों का खत्म हो अल्पसंख्यक दर्जा, प्रयागराज धर्मसंसद में प्रस्ताव पारित

प्रयागराज में संतों ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन ने इस सम्मेलन को रोकने के प्रयास किए. उसके बावजूद भी देश के कोने-कोने से आकर साधु-संतों ने अपनी बातें रखीं.

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प्रयागराज में आयोजित धर्म संसद प्रयागराज में आयोजित धर्म संसद

aajtak.in

  • प्रयागराज,
  • 30 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 8:57 AM IST
  • मुसलमानों का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त करने की मांग
  • नरसिंहानंद गिरी महाराज को रिहा करने की मांग भी उठी

संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) में स्थित बह्मर्षि आश्रम में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया. धर्म संसद (Dharam Sansad) में सैकड़ों की संख्या में साधु-संत शामिल हुए. इस दौरान साधु संतों ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने के लिए प्रस्ताव पारित किया.

सभी संतों की मौजूदगी में कहा गया कि देश की सवा सौ करोड़ जनता स्वयं घोषित करें कि भारत हिंदू राष्ट्र है और आज से वह लिखना शुरू करें तभी यह आंदोलन बड़ा होगा. अंत में सरकार संतों और आम जनता के दबाव के आगे झुकेगी क्योंकि संत सम्मेलन का लक्ष्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है और इस्लामिक जिहाद को दूर करना है. 

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हिंदुओं के मठ मंदिर का अधिग्रहण खत्म करने का प्रस्ताव भी

इस दौरान संतों द्वारा भारत में मुसलमानों का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त करने की मांग की गई. इसके अलावा हिंदुओं के मठ मंदिर का अधिग्रहण खत्म करने समेत कई प्रस्ताव पारित किए गए. इस दौरान साधु संतों ने कहा कि जेल में बंद दोनों धर्मगुरुओं नरसिंहानंद गिरी महाराज और वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को जल्द से जल्द जेल से छोड़ा जाए.

संतों ने कहा कि दोनों धर्मगुरुओं को बिना शर्त रिहा किया जाए. संतों का आरोप था कि जिला प्रशासन ने संतो को फोन करके सम्मेलन में नहीं आने दिया और कई तरह से बाधा खड़ी की. 

बदला गया धर्म संसद का नाम
उल्लेखनीय है कि प्रयागराज में प्रशासन के दबाव के बाद धर्म संसद का नाम बदलकर संत सम्मेलन किया गया था क्योंकि प्रशासन धर्म संसद होने की इजाजत नहीं दे रहा था. इसके बाद इसका नाम बदलकर संत सम्मेलन किया गया. 

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