घर में पिता की लाश रखी थी, फैमिली प्रॉपर्टी के लिए लड़ रही थी... 3 दिन बाद हुए अंतिम संस्कार की कहानी

सोचने पर मजबूर कर देने वाली ये कहानी तेलंगाना के राजन्ना सिरसिल्ला जिले के कोनायिपल्ली गांव की है. यहां 80 साल के बुजुर्ग की मौत हो गई थी. घर में लाश रखी थी, लेकिन परिवार प्रॉपर्टी के लिए आपस में लड़ रहा था. ये झगड़ा तीन दिन तक चला. इसके बाद पुलिस पहुंची और जैसे-तैसे मामले को सुलझाकर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया.

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तीन दिनों तक घर में पड़ा रहा बुजुर्ग का शव. (Photo: ITG) तीन दिनों तक घर में पड़ा रहा बुजुर्ग का शव. (Photo: ITG)

अब्दुल बशीर

  • हैदराबाद,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

सोमवार की रात थी. तेलंगाना के राजन्ना सिरसिल्ला जिले के कोनायपल्ली गांव में 80 साल के कोंकटी चंद्रैया की मौत हो गई. उम्र से जुड़ी बीमारियों के चलते उन्होंने दम तोड़ दिया. घर में एक बुजुर्ग की मौत हुई थी. आम तौर पर ऐसे वक्त में परिवार के लोग इकट्ठा होते हैं, अंतिम संस्कार की तैयारी होती है और लोग अपने प्रियजन को आखिरी विदाई देते हैं. लेकिन चंद्रैया के घर में कहानी कुछ और थी.

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उनकी मौत के बाद परिवार के बीच संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया. बात इतनी बढ़ी कि अंतिम संस्कार ही नहीं हो पाया. सोमवार की रात से बुधवार की रात तक चंद्रैया का शव घर में पड़ा रहा. गांव के लोगों ने समझाया, बुजुर्गों ने बीच-बचाव किया, लेकिन परिवार के सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी. आखिरकार पुलिस को दखल देना पड़ा. पुलिस की मदद से बुधवार रात चंद्रैया का अंतिम संस्कार किया गया.

एक तरफ घर में किसी अपने को खोने का दुख था. दूसरी तरफ डेढ़ एकड़ खेत और एक मकान को लेकर विवाद. आखिर संपत्ति को लेकर ऐसा क्या हुआ कि एक बुजुर्ग की आखिरी विदाई तीन दिन तक टल गई?

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यह मामला तेलंगाना के वेमुलावाड़ा नगरपालिका क्षेत्र के कोनायपल्ली गांव का है. कोंकटी चंद्रैया के पास करीब डेढ़ एकड़ कृषि भूमि और एक मकान था. उनके परिवार में तीन बेटियां थीं. उनका बेटा नागराजू करीब दस साल पहले गुजर चुका था. नागराजू के परिवार में उसकी दूसरी पत्नी और दो बेटियां थीं.

पुलिस के मुताबिक, चंद्रैया ने करीब तीन साल पहले अपना मकान बेटियों के नाम कर दिया था. उनकी मौत के बाद संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया. नागराजू की दूसरी पत्नी और उसकी दो बेटियों ने संपत्ति में हिस्से की मांग की. इसी को लेकर परिवार के दूसरे सदस्यों संग झगड़ा हुआ. विवाद बढ़ता गया और अंतिम संस्कार रुका रहा.

गांव में जब किसी बुजुर्ग की मौत होती है, तो परिवार के साथ पड़ोसी और रिश्तेदार भी अंतिम विदाई में शामिल होते हैं. चंद्रैया के मामले में भी गांव के लोगों और स्थानीय बुजुर्गों ने परिवार को समझाने की कोशिश की. उनकी कोशिश थी कि संपत्ति का विवाद बाद में सुलझा लिया जाए और पहले चंद्रैया का अंतिम संस्कार कर दिया जाए. लेकिन परिवार में सहमति नहीं बन पाई. विवाद जारी रहा और शव घर में ही पड़ा रहा.

सोचिए, एक तरफ घर में वह व्यक्ति मौजूद था, जिसकी मौत हो चुकी थी. दूसरी तरफ परिवार के लोग संपत्ति को लेकर अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे. जिस वक्त परिवार को एक-दूसरे का सहारा बनना था, उसी वक्त उनके बीच जमीन और मकान का सवाल खड़ा था. सोमवार रात से बुधवार की रात तक इंतजार चलता रहा. गांव के लोगों की मध्यस्थता काम नहीं आई, तो मामला पुलिस तक पहुंचा.

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बुधवार को पुलिस ने मामले में दखल दिया. पुलिस ने परिवार के बीच चल रहे विवाद के बावजूद अंतिम संस्कार कराने में मदद की. इसके बाद बुधवार रात चंद्रैया का अंतिम संस्कार हो सका. जिस व्यक्ति की मौत सोमवार रात हुई थी, उसे आखिरी विदाई बुधवार रात जाकर मिली. शव तीन दिन तक घर में पड़ा रहा.

चंद्रैया के बेटे नागराजू की मौत करीब दस साल पहले हो गई थी. अब चंद्रैया भी नहीं रहे. उनके पीछे तीन बेटियां, बेटे का परिवार, डेढ़ एकड़ कृषि भूमि और एक मकान है. इन संपत्तियों को लेकर परिवार में किसका क्या अधिकार है, इसका फैसला बातचीत या कानूनी प्रक्रिया से होगा. लेकिन इस घटना में संपत्ति का सवाल इतना बड़ा हो गया कि अंतिम संस्कार तक रुक गया.

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