हैदराबाद के पुराने शहर में उस दिन सड़कों पर अलग ही नजारा था. गणेश विसर्जन के लिए जुलूस निकल रहे थे. सड़कें लोगों से भरी थीं. जगह-जगह बैरिकेडिंग थी और ट्रैफिक को दूसरी तरफ डायवर्ट किया जा रहा था. पुलिसकर्मी लगातार भीड़ और वाहनों की आवाजाही संभालने में जुटे थे. इसी बीच एक परिवार ऐसा भी था, जो चेकअप कराने के लिए अस्पताल जा रहा था.
परिवार की एक महिला प्रेग्नेंट थीं. उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए असरा हॉस्पिटल जाना था. परिवार शाहली बांदा एक्स रोड्स के पास पहुंचा. यहां आकर कैब बुक करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई कैब बुक नहीं हो रही थी. महिला को अस्पताल पहुंचना था. परिवार इसी परेशानी में था कि हुसैनी आलम पुलिस की नजर उन पर पड़ी. पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने जब परिवार की परेशानी समझी तो मदद के लिए आगे आई.
डिटेक्टिव इंस्पेक्टर दस्रू नायक और कॉन्स्टेबल रजिता ने प्रेग्नेंट महिला को अस्पताल पहुंचाने का तरीका निकाला. जिस पुलिस पेट्रोलिंग वाहन में पुलिसकर्मी इलाके की निगरानी कर रहे थे, वही गाड़ी उस महिला के लिए अस्पताल जाने का सहारा बन गई. महिला को पेट्रोलिंग वाहन में बैठाया गया और पुलिसकर्मी उन्हें लेकर असरा हॉस्पिटल की तरफ निकल पड़े.
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बाहर शहर में गणेश विसर्जन की धूम थी. जगह-जगह जुलूस थे. ढोल-नगाड़े बज रहे थे. सड़कों पर लोगों की भीड़ थी. ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी. ऐसे माहौल में पुलिस की गाड़ी एक प्रेग्नेंट महिला को अस्पताल तक पहुंचाने जा रही थी.
यह पूरा घटनाक्रम शायद कुछ मिनटों का रहा हो, लेकिन परिवार के लिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा थी. जिस वक्त उन्हें कोई कैब नहीं मिल रही थी, उस वक्त पुलिस की गाड़ी उनके लिए किसी एंबुलेंस से कम नहीं थी. जो पुलिस सड़कों पर जुलूस और ट्रैफिक संभाल रही थी, जरूरत पड़ने पर एक परिवार के लिए सहारा भी बन गई. गणेश विसर्जन की भीड़ के बीच पुलिस की गाड़ी आगे बढ़ती रही और महिला को अस्पताल पहुंचाया गया.
शहर में गणेश विसर्जन चल रहा था. पुलिस के सामने बड़ी भीड़ को संभालने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती थी. उसी दौरान पुलिस ने परिवार को अस्पताल पहुंचाया. हैदराबाद पुलिस से जुड़ी यह घटना इंसानियत और आपसी सद्भाव की मिसाल है. ऐसी ही घटनाएं बताती हैं कि त्योहारों की भीड़ में भी इंसानियत के लिए जगह बनी रहती है.
कहानी छोटी है, लेकिन तस्वीर बड़ी है. त्योहार किसी भी धर्म का हो, शहर कितना भी भीड़भाड़ वाला हो और सड़क पर कितने ही बैरिकेड क्यों न लगे हों, जरूरत के वक्त किसी इंसान तक मदद पहुंच जाए, तो शायद यही किसी शहर की सबसे खूबसूरत तस्वीर होती है.
अब्दुल बशीर