राष्ट्रपति चुनाव: क्रॉस वोटिंग ने कोविंद को पहुंचाया 7 लाख के पार

रामनाथ कोविंद को कुल वोटों का 65 फीसदी मत मिला. उन्हें कुल 7 लाख दो हजार 44 वोट मिले जबकि जीत के लिए उन्हें सिर्फ 5,52,243 वोट चाहिए थे. आपको यह भी बता दें कि विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को सिर्फ 3,67,314 वोट ही मिले.

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राष्ट्रपति चुनाव (प्रतीकात्मक तस्वीर) राष्ट्रपति चुनाव (प्रतीकात्मक तस्वीर)

केशवानंद धर दुबे / संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 5:24 PM IST

देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा हो चुकी है. चुनाव में जीत के लिए जरूरी कुल वोट से भी कहीं ज्यादा वोट मिलने के पीछे लोग राज्यों में हुई क्रॉस वोटिंग की चर्चा चल रही है. सूत्रों के मुताबिक बंगाल, दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र, यूपी, त्रिपुरा और गुजरात में रामनाथ कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हुई.

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सबसे चौंकाने वाली बात दिल्ली से आई, आम आदमी पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले मीरा कुमार का समर्थन किया था. आप विधायकों की क्रॉस वोटिंग इस बात का भी संदेश देती है कि पार्टी में अनुशासन की काफी कमी है. हालांकि इस बात की उम्मीद पहले से भी थी क्योंकि यह एक गुप्त मतदान होता है ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावना बहुत ही बढ़ जाती है. 

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी पहले से ही दो फाड़ थी. एक ओर जहां अखिलेश गुट मीरा कुमार के समर्थन में खड़ा था तो वहीं शिवपाल गुट राम नाथ कोविंद को वोट करने के पक्ष में था. सपा-टीएमसी समेत कई दलों के कई नेताओं ने खुलेआम पार्टी के फैसले का उल्लंघन कर कोविंद को वोट देने का ऐलान किया तो वहीं जेडीयू और बीजेपी के कई नेताओं ने कोविंद के खिलाफ वोट देने का ऐलान भी किया. इस बीच गोवा और गुजरात में एनडीए के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की खबर है. इससे कोविंद को फायदा हुआ है. हालांकि, अभी इसके आंकड़े स्पष्ट नहीं हुए हैं.

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आपको बता दें कि रामनाथ कोविंद को कुल वोटों का 65 फीसदी मत मिला. उन्हें कुल 7 लाख दो हजार 44 वोट मिले जबकि जीत के लिए उन्हें सिर्फ 5,52,243 वोट चाहिए थे. आपको यह भी बता दें कि विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को सिर्फ 3,67,314 वोट ही मिले.

महागठबंधन में रार

राष्ट्रपति चुनाव के लिए बदले सियासी समीकरणों का सबसे बड़ा असर हुआ बिहार में महागठबंधन में. नीतीश कुमार ने एनडीए कैंडिडेट राम नाथ कोविंद को समर्थन का ऐलान किया तो उनके सहयोगी लालू की पार्टी आरजेडी और कांग्रेस भड़क गए. वहीं नीतीश के फैसले के खिलाफ रामनाथ कोविंद के संघ बैकग्राउंड का हवाला देते हुए जेडीयू के केरल प्रदेश अध्यक्ष एम. पी. वीरेंद्र कुमार ने समर्थन देने से इंकार कर दिया.

त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस को झटका

ममता बनर्जी के लिए भी राष्ट्रपति चुनाव झटके का कारण बना. त्रिपुरा में पार्टी के 6 विधायक बागी हो गए और रामनाथ कोविंद के पक्ष में मतदान का ऐलान कर दिया. यहां तक कि बीजेपी का दामन थामने का ऐलान भी इन नेताओं ने कर दिया. ये ममता के लिए जहां पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में झटका है वहीं बीजेपी के लिए राज्य में अपनी जड़ें जमाने का आधार बन सकता है.

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गुजरात में बीजेपी विधायक की बगावत

वहीं पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात में बीजेपी विधायक नलिन कोटडिया ने ऐलान किया था कि वे के खिलाफ वोट करेंगे. कोटडिया ने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा- मैं भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं दूंगा क्योंकि बीजेपी की गुजरात सरकार ने हमारे पाटीदार समाज के 14 लोगों की हत्या की है और हमारी जो मांग है उसे पूरा नहीं किया है. इसलिए मैं बीजेपी के खिलाफ वोटिंग करूंगा.

AAP पर भी नजर

आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव में मीरा कुमार को समर्थन का ऐलान किया लेकिन पंजाब में AAP के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली लोक इंसाफ पार्टी के बैंस ब्रदर्स ने एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को अपना समर्थन देने का ऐलान किया. पंजाब में इस पार्टी के दो विधायक हैं.

बीजेपी को कहां-कहां फायदा?

की निगाह है. राष्ट्रपति चुनाव में जिन दलों से क्रॉस वोटिंग कर सदस्य बीजेपी का साथ देंगे आगे राज्यसभा चुनावों में भी बीजेपी की निगाह इन सदस्यों पर होगी.

 

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