पहली बार दोनों तरफ से दलित उम्मीदवार होना, बाबा साहेब और BSP की देन: मायावती

मायावती ने अपने बयान में कहा कि यह पहली बार है कि सत्ता और विपक्ष की ओर से दलित उम्मीदवार मैदान में उतारा गया है. जीत या हार किसी की भी हो लेकिन राष्ट्रपति दलित ही होगा. मायावती ने कहा कि यह देन बाबा साहेब अंबेडकर की है, माननीय कांशीराम जी की है और बहुजन समाज पार्टी की है.

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मायावती बोलीं- दलित उम्मीदवार होना BSP की देन मायावती बोलीं- दलित उम्मीदवार होना BSP की देन

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST

देश में नए राष्ट्रपति चुनने के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. देश की संसद समेत सभी विधानसभा में वोटिंग की जा रही है. मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार के बीच है. लेकिन वोटिंग शुरू होते ही बसपा सुप्रीमो मायावती का एक बड़ा बयान आया है. मायावती ने अपने बयान में कहा कि यह पहली बार है कि सत्ता और विपक्ष की ओर से दलित उम्मीदवार मैदान में उतारा गया है. जीत या हार किसी की भी हो लेकिन राष्ट्रपति दलित ही होगा. मायावती ने कहा कि यह देन बाबा साहेब अंबेडकर की है, माननीय कांशीराम जी की है और बहुजन समाज पार्टी की है.

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बता दें कि के लोकसभा में कोई सांसद नहीं हैं, वहीं यूपी में बसपा के 19 विधायक हैं. हालांकि बसपा की ओर से राज्यसभा में 6 सासंद हैं.

गौरतलब है कि एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद मूलत: रूप से उत्तर प्रदेश से ही आते हैं, रामनाथ कोविंद दलित जाति से हैं. कोविंद के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद विपक्ष ने भी दलित कार्ड चलते हुए पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था.

कोविंद की जीत पक्की!

बता दें कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है, जिसके अगले दिन यानी 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति पदभार ग्रहण करेंगे. सियासी समीकरणों को देखें तो इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत पक्की मानी जा रही है. राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल दोनों उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दलित समुदाय से आते हैं और उन्होंने देशभर में घूम-घूम कर विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है.

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आंकड़ों की बात की जाए तो बिहार के पूर्व राज्यपाल कोविंद की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है, क्योंकि उन्हें एनडीए के अलावा जेडीयू और बीजू जनता दल (बीजेडी) जैसे विपक्षी दलों का भी समर्थन हासिल है. यहां जेडीयू के पास निर्वाचक मंडल का कुल 1.91 फीसदी वोट है, जबकि बीजेडी के पास 2.99 फीसदी वोट है. इसके अलावा तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के पास 2%, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) का एक गुट (5.39 %) और वाईएसआर कांग्रेस (1.53%) ने भी कोविंद के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की है.

बता दें कि के वोट का वैल्यू 708 है, जबकि विधायकों के वोटों का मूल्य उनके राज्यों की आबादी के अनुसार होगा, जैसे उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट का वैल्यू 208, जबकि अरुणाचल जैसे कम आबादी वाले राज्य के विधायक के वोट का मूल्य 8 बैठता है. ऐसे में कोविंद को निर्वाचक मंडल के कुल 10,98,903 मतों में से 63 फीसदी से ज्यादा मत मिलने की संभावना है.

 

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