भारतीय लड़की की शादी में पाकिस्तानी फ्रेंड को वीजा नहीं, सुषमा से भी नहीं मिली मदद

थरूर ने पूर्वी के लिए ट्वीट में लिखा- 'इंतजार जारी है @SushmaSwaraj कि लालफीताशाही की गांठ खुलेगी, ऐसी किसी शख्स जो दो बार पहले भी भारत आ चुकी हो, उनसे खतरा नहीं हो सकता. आपकी शादी के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं.'

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पूर्वी अपनी दोस्त के साथ पूर्वी अपनी दोस्त के साथ

खुशदीप सहगल / BHASHA

  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 1:44 PM IST

भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव का असर क्या हो सकता है ये कोई पूर्वी ठक्कर से पूछे. न्यूयॉर्क में रहने वाली पत्रकार पूर्वी ठक्कर की दिसंबर में मुंबई में शादी होनी है. इस शादी के लिए उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाली अपनी बहुत अच्छी दोस्त सारा मुनीर को न्योता दिया. लेकिन सारा मुनीर के वीजा आवेदन को पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग ने नामंजूर कर दिया है.

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पूर्वी ने अपनी दोस्त सारा के वीजा को लेकर #GetSarahtoIndia नाम से ट्विटर कैंपेन भी शुरू किया है. सारा को वीजा नहीं मिलने से निराश पूर्वी ने फेसबुक पर बुधवार को पोस्ट लिखकर अपनी व्यथा बताई. पूर्वी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को भी टैग किया. लेकिन अभी तक पूर्वी को कोई जवाब नहीं मिला है.

थरूर का समर्थन
इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने ट्वीट कर पूर्वी को समर्थन दिया है. थरूर ने पूर्वी के लिए ट्वीट में लिखा- 'इंतजार जारी है @SushmaSwaraj कि लालफीताशाही की गांठ खुलेगी, ऐसी किसी शख्स जो दो बार पहले भी भारत आ चुकी हो, उनसे खतरा नहीं हो सकता. आपकी शादी के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं.'

इससे पहले पूर्वी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा- 'जो लोग भी मेरी और सारा की दोस्ती को जानते हैं, वो समझ सकते हैं कि उसे (सारा) मेरी दिसंबर में होने वाली शादी के लिए वीजा नहीं मिलने से मेरा दिल कितना टूटा है. मेरी सबसे अजीज दोस्त ही मेरे सबसे बड़े दिन पर मेरे साथ मौजूद नहीं होगी, ये मैं सोच भी नहीं सकती. , महीनों की कोशिश और दुआओं के बाद भी नतीजा क्या निकला. समझ नहीं आ रहा कि वीजा आवेदन नामंजूर क्यों किया गया.'

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पूर्वी का कहना है कि सरहदों को मानवीय रिश्तों में बाधा नहीं बनने देना चाहिए. पूर्वी ने पोस्ट में आगे लिखा- 'दोस्त होना और एक दूसरे के लिए मौजूद होना इतना मुश्किल इसलिए नहीं होना चाहिए कि हमने जन्म लिया. हम जानते हैं कि हमारे देश आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक असर वाले घटनाक्रमों का इतिहास रखते हैं लेकिन इन सब चीजों से मानवीय रिश्ते और संपर्क अछूते रहने चाहिएं. कोई भी इस बारे में नहीं सोचता.'

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