सोनिया के बाद फारुख भी बोले- RSS ने किया था भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध

सोनिया के लोकसभा में दिए गए बयान पर 'आज तक' ने देश के कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की. जिसमें बीजेपी के नेताओं ने सोनिया के बयान की निंदा की तो वहीं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता फारुख अब्दुल्ला उनके पक्ष में नजर आए.

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फारुख अब्दुल्ला फारुख अब्दुल्ला

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरे होने के मौके पर बुधवार को लोकसभा में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपना भाषण दिया. इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आजादी के वीर सिपाहियों को याद किया और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेने का आह्वान किया. लेकिन ये मौका मोदी और सोनिया के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से नहीं बच सका. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की विचारधारा पर जमकर निशाना साधा. ये पहला मौका था जब संसद में मोदी और सोनिया इस तरह आमने-सामने थे और दोनों ने इसे भुनाने की कोई कसर नहीं छोड़ी.

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सोनिया ने कहा कि ये आंदोलन हमें इस बात की याद दिलाता है कि संकीर्ण मानसिकता वाले, विभाजनकारी सोच वालों का कैदी बनने नहीं दे सकते हैं. महात्मा गांधी ने एक न्याय संगत भारत के लिए लड़ाई लड़ी थी. लेकिन इस पर नफरत और विभाजन की राजनीति के बादल छा गए हैं, पब्लिक स्पेस में विचारों की बहस की गुंजाइश कम हो रही है, कई बार कानून के राज पर भी गैर कानूनी शक्तियां मजबूत होती दिख रही है. अगर हमें अपनी आजादी को सुरक्षित रखना है तो हमें हर दमनकारी शक्ति के खिलाफ संघर्ष करना होगा चाहे वे कितनी भी सक्षम हो. हमें उस भारत के लिए लड़ना है जिस भारत में हम विश्वास रखते हैं, जिसमें भारत में हर कोई आजाद है जिसकी आजादी निर्विवाद है.

सोनिया के लोकसभा में दिए गए बयान पर 'आज तक' ने देश के कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की. जिसमें बीजेपी के नेताओं ने सोनिया के बयान की निंदा की तो वहीं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता फारुख अब्दुल्ला उनके पक्ष में नजर आए.

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फारुख अब्दुल्ला ने कहा, "भारत की हालत आज बहुत खराब है. आज लोगों को धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है और दमन किया जा रहा है. इसके लिए आंदोलन होना चाहिए. हम साथ हैं, बहुत से लोगों ने देश की आजादी के लिए क़ुर्बानी दी हैं. आरएसएस ने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था, ये सच है. बीजेपी हर विषय पर राजनीति करती है और दूसरों पर आरोप लगाती है.

बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, " जी का भाषण जिसने लिखा है उन्होंने विषय की गंभीरता को समझा नहीं है. आज भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले को याद करते हुए चर्चा करना था ना की राजनीति करना. आज के दिन सोनिया गांधी को राजनीति नहीं करनी चाहिए. सोनिया गांधी को इतिहास की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए उन्होंने ये बयान दिया है. उनके स्क्रिप्ट राइटर ने ठीक से रिसर्च नहीं किया था."

नेता गिरिराज सिंह ने कहा, "मुझे उनकी सोच पर तरस आता है जिन्होंने आज के दिन राजनीति की है. प्रधानमंत्री जी संकल्प ले रहे हैं कि देश से गरीबी, बेरोजगारी को दूर करना है लेकिन कुछ लोग आज भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को याद करने की जगह राजनीति कर रहे हैं, देश उन्हें माफ नहीं करेगा. संघ को समझना इतना आसान नहीं है. उसके लिए को समझना होगा. उसके लिए संघ के इतिहास को समझना होगा. आज सोनिया गांधी ने जो राजनीति की है देश उन्हें माफ नहीं करेगा."

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