केंद्र की अर्जी- मणिपुर में उग्रवादियों के खात्मे के लिए सेना को मिले हथियार चलाने की इजाज़त

सरकार ने अपनी अर्ज़ी में कहा है कि ना सिर्फ आत्मरक्षा के लिए बल्कि उग्रवादियों के खात्मे के लिए सेना को हथियार चलाने की इजाज़त होनी चाहिए.

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AFSPA के इस्तेमाल पर SC के आदेश में संशोधन के लिए केंद्र ने दी अर्ज़ी AFSPA के इस्तेमाल पर SC के आदेश में संशोधन के लिए केंद्र ने दी अर्ज़ी

अहमद अजीम / सुरभि गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST

केंद्र सरकार ने आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट यानी AFSPA पर पिछले साल आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कुछ बदलाव के लिए क्यूरेटिव याचिका दायर की है. बुधवार को अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा कोर्ट के फैसले की वजह से सेना के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए इस फैसले में सुधार किया जाए. रोहतगी ने कहा कि इस फैसले से संवेदनशील इलाकों में सेना की कार्रवाई बाधित हो रही है.

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सुरक्षा बलों को आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने का आदेश
साल 2016 में के जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया था कि सुरक्षा बल केवल आत्मरक्षा के लिए ही हथियार चला सकते हैं. अब सरकार ने अपनी अर्ज़ी में कहा है कि ना सिर्फ आत्मरक्षा के लिए बल्कि उग्रवादियों के खात्मे के लिए सेना को हथियार चलाने की इजाज़त होनी चाहिए. ये सेना का अधिकार है और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए जरूरी है. मुख्य न्यायधीश ने कहा कि इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.

2016 में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए थे दिशा-निर्देश
2000 से 2012 के बीच सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए 1528 लोगों की मौत को न्यायेतर हत्या (एक्स्ट्रा जुडिशियल किलिंग) बताते हुए एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे. याचिका में इन मौतों की जांच और पीड़ितों को मुआवजे की मांग की गई. ये मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.

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