'ममता बनर्जी मेरी गुरु, मेरी नेता...', TMC प्रमुख पर क्या बोलीं बागी सांसद काकोली घोष

तृणमूल कांग्रेस से बागी हुए सांसदों की अगुवाई कर रहीं काकोली घोष ने कहा है कि यह कहना गलत है कि ममता बनर्जी सत्ता में नहीं हैं, हम इसलिए साथ छोड़ रहे.

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काकोली ने बताई ममता बनर्जी से अलग राह लेने की वजह (Photo: ITG) काकोली ने बताई ममता बनर्जी से अलग राह लेने की वजह (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:51 AM IST

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की दरार अब खुलकर सामने आ गई है. संदीपन साहा की अगुवाई में बगावत करने वाले 58 विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बना दिया है. वहीं, अब पार्टी का दिल्ली दल भी टूट की कगार पर है. टीएमसी सांसदों की पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास और फिर शताब्दी रॉय के आवास पर मीटिंग हुई.

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इन बैठकों में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे. शताब्दी रॉय के आवास पर हुई मीटिंग के बाद सांसदों के बागी गुट की नेता काकोली घोष ने ऐलान कर दिया कि टीएमसी के 20 सांसद प्रदेश के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे. काकोली घोष के बयान से स्थिति साफ हो गई कि दिल्ली में भी दीदी की पार्टी एकजुट नहीं रही.

इन सबके बीच अब काकोली घोष का एक और बयान आया है. पश्चिम बंगाल के बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी को अपना मार्गदर्शक और गुरु बताते हुए कहा है कि वह मेरी नेता रही हैं. उन्होंने कहा कहा कि पिछले 40 साल से ममता बनर्जी के साथ रही हूं और हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे थे. काकोली ने कहा कि ममता के साथ उस दौर में भी खड़ी रही, जब वह सत्ता में नहीं थीं.

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उन्होंने कहा कि साल 2009 से पहले पांच चुनाव लड़े और हार का सामना किया. इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि ममता बनर्जी सत्ता में नहीं हैं, इसलिए उनका साथ छोड़ दिया. काकोली घोष ने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है.  तब भी उनके साथ रही हूं, जब वह सत्ता में नहीं थीं. उन्होंने कहा कि लेकिन उस समय एक ऐसी नीति थी, जो पश्चिम बंगाल के गरीब लोगों के हित में और जनकल्याणकारी एजेंडे पर आधारित थी.

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काकोली घोष ने कहा कि लेकिन पिछले तीन-चार वर्षों में कामकाज अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा. विकास भी अपेक्षित स्तर का नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि कई गड़बड़ियां सामने आईं, जो अब साबित भी हो रही हैं. काकोली घोष ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और फिल्म जैसे उद्योग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं. कानून-व्यवस्था भी ऐसी नहीं रही, जिसे संतोषजनक कहा जा सके.

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उन्होंने दावा किया कि सरकारी अधिकारियों पर भी कुछ नेताओं की इच्छा के मुताबिक काम करने का बहुत अधिक दबाव था. ये किसी भी राज्य के विकास के लिए काम करने का अनुकूल माहौल नहीं कहा जा सकता. काकोली घोष ने कहा कि लंबे समय से यह कहती आ रही हूं. अब जनादेश ने भी इसे साबित कर दिया है. उन्होंने कहा कि हम प्रदेश के विकास, देश के हित और सुरक्षा के लिए काम करना चाहते हैं. यही कारण है कि हम अलग होकर काम करना चाहते हैं.

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