राजनीति और सार्वजनिक जीवन में समीकरण कितनी तेजी से बदलते हैं, इसका ताजा और बड़ा उदाहरण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद् व शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के रिश्तों में आया यू-टर्न है. मार्च 2023 में जहां दोनों शिक्षा क्षेत्र में सुधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर एक ही सुर में बात करते दिख रहे थे, वहीं साल 2026 में दोनों के बीच की खाई देश के शिक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े टकराव में बदल चुकी है.
NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया. बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोगों ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील भी की है.
जब दोनों के बीच दिखी थी गहरी 'केमिस्ट्री'
दरअसल, मार्च 2023 में धर्मेंद्र प्रधान ने सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो से मुलाकात की थी. मुलाकात के बाद प्रधान ने सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करते हुए लिखा था कि शिक्षा, इनोवेशन और सतत विकास पर हुई चर्चा प्रेरणादायक रही. उन्होंने वांगचुक के विचारों और शिक्षा में बदलाव के प्रति उनके समर्पण की सराहना की थी.
वहीं, सोनम वांगचुक ने भी उस समय धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ करते हुए कहा था कि शिक्षा में नए विचारों के प्रति उनकी सकारात्मक सोच से उन्हें विश्वास मिला है और वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने के लिए और अधिक प्रतिबद्ध महसूस कर रहे हैं.
2026 में क्या बदला? सहयोग से संघर्ष तक का सफर
हालांकि, यह संबंध 2026 में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा और सीबीएसई ऑनलाइन मूल्यांकन विवाद के बाद पूरी तरह बदल गया. परीक्षा में पेपर लीक के आरोप लगने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा परीक्षा कराई गई. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर सवाल उठे.
इसी दौरान एक अन्य विवाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' अभियान शुरू हुआ. इसी अभियान के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू हुए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठने लगी.
सोनम वांगचुक इस आंदोलन में शामिल हुए और बाद में उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. बुधवार को उनकी भूख हड़ताल का 18वां दिन है.
एक इस्तीफे से बहुत कुछ नहीं बदलेगा: वांगचुक
स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद मंगलवार को उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना है. उन्होंने कहा, 'हो सकता है हमारी भूख हड़ताल से तुरंत इस्तीफा न हो, लेकिन अगर इससे लोग जागरूक होते हैं तो हमारा उद्देश्य पूरा हो जाएगा.'
उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ एक इस्तीफे से बहुत कुछ नहीं बदलेगा. जिस दिन लोग जाग जाएंगे, उस दिन सरकार के हर विभाग में बदलाव दिखाई देगा.
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