कांग्रेस में Gen-Shift: 20 साल बाद दूर हो रहीं राहुल गांधी की राह की बाधाएं!

सियासत में कदम रखते ही राहुल गांधी ने 2004 में युवाओं को आगे लाने की मुहिम शुरू की थी. उस वक्त जब वे बदलाव करना चाहते थे, तो पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के पास जाकर अपना वीटो लगवा दिया करते थे, लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे के अध्यक्ष बनने और राहुल गांधी के 'नेता प्रतिपक्ष' के बाद हालात बदले तो कांग्रेस भी बदलने लगी है.

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राहुल गांधी के मुताबिक कांग्रेस बदलने लगी (Photo-ITG) राहुल गांधी के मुताबिक कांग्रेस बदलने लगी (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जब 2004 में राजनीति में कदम रखा था, तब से उनका एक सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था. कांग्रेस का कायाकल्प और 'जनरेशन चेंज' (पीढ़ीगत बदलाव). वह कांग्रेस को पार्टी के बुजुर्ग और 'ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स' करने वाले नेताओं के चंगुल से निकालकर एक युवा, आक्रामक और जमीन पर लड़ने वाले संगठन में बदलना चाहते थे.

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राहुल गांधी का यह सियासी प्रयोग पुराने दिग्गजों (ओल्ड गार्ड) के कड़े विरोध और अंदरूनी खींचतान के चलते परवान नहीं चढ़ सका था, लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस के भीतर जो कदम उठाए जा रहे हैं और बदलाव दिख रहे हैं, उससे अब साफ जाहिर होता कि राहुल गांधी का '20 साल पुराना सपना' अब हकीकत में बदलने लगा है. 

केरल में रमेश चैन्निथला और केसी वेणुगोपाल को नजर अंदाज कर वीडी सतीशन को सीएम बनाया तो लंबी खींचतान के बाद कर्नाटक में सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार की ताजपोशी कांग्रेस में लीडरशिप में बदलाव दिखा रहा. यही नहीं राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जिस तरह से राहुल गांधी के करीबी नेताओं को जगह मिली है, उससे साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस अब जेनरेशनल शिफ्ट की राह पर है. 

राहुल के करीबियों को राज्यसभा का टिकट
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 7 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. पार्टी ने पुराने नेताओं की जगह पर संगठन और राहुल गांधी के करीबी नेताओं पर ही भरोसा जताया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को कर्नाटक से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी, तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा को राज्यसभा का टिकट दिया गया है. कांग्रेस के ये सभी नेता राहुल गांधी टीम के माने जाते हैं. 

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प्रवीण चक्रवर्ती को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है, जो पार्टी की नीतियों और आर्थिक मामलों से जुड़े प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. कांग्रेस के प्रकोष्ठ ‘प्रोफेशनल कांग्रेस’ और प्रोद्यौगिकी एवं डेटा विभाग के वे प्रमुख हैं. थलापति विजय की पार्टी टीवीके के साथ कांग्रेस का गठबंधन कराने में उनकी अहम भूमिका रही थी. कांग्रेस ने राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को झारखंड से उम्मीदवार बनाया है, जो मूल रूप से झारखंड से हैं और वे कांग्रेस अध्यक्ष कार्यालय के कामकाज को देखते हैं.

प्रवक्ता पवन खेड़ा कांग्रेस के मुखर आवाज माने जाते हैं और राहुल गांधी की नजदीकी नेताओं में गिने जाते हैं. मंसूर खान पूर्व केंद्रीय मंत्री के रहमान खान के पुत्र हैं और लंबे समय से कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी में अलग-अलग भूमिकाओं में सक्रिय हैं. मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रभारी हैं और राहुल के करीबी नेताओं में गिनी जाती हैं.  इसी तरह नीरज डांगी भी राहुल की टीम के अहम हिस्सा माने जाते हैं और केरल चुनाव जीतने में अहम रोल अदा किया है.

राहुल के पसंदीदा नेताओं को सत्ता की कमान
केरल में कांग्रेस ने 69 साल के रमेश चैन्निथला और 64 साल के केसी वेणुगोपाल को नजर अंदाज कर 61 साल के वीडी सतीशन को सीएम बनाया तो लंबी खींचतान के बाद कर्नाटक में 77 साल के सिद्धारमैया की जगह पर 64 साल के डीके शिवकुमार की ताजपोशी की गई. इतना ही नहीं केरल और कर्नाटक में बनी सरकार के मंत्रिमंडल गठन में युवा चेहरों को खास तवज्जे दी गई है. केरल में 50 फीसदी मंत्रियों की उम्र औसतन 50 साल से कम है. 

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सामाजिक समीकरणों के मद्देनजर कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन ज्यादा मुश्किल था. सिद्धारमैया ओबीसी समुदाय से हैं, जिसे नाराज करने का जोखिम कोई राजनीतिक दल नहीं उठाना चाहता, राजनीतिक रूप से कर्नाटक में तीन ताकतवर समुदाय हैं, लिंगायत, वोक्कालिगा और कुरुबा. लिंगायत मुख्य रूप से बीजेपी समर्थक हैं तो सिद्धारमैया कुरुबा जाति से हैं जबकि पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा सबसे बड़े वोक्कालिगा नेता रहे हैं. अब कांग्रेस ने वोक्कलिगा जाति के डीके शिवकुमार को सीएम बनाकर बड़ा दांव चला है. 

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कर्नाटक में सियासी बैलेंस बनाए रखने के लिए जी परमेश्वर को डिप्टीसीएम तो बीके हरिप्रसाद को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी है, जो ओबीसी जाति से आते हैं. हरिप्रसाद को गांधी परिवार की करीबी नेताओं में गिना जाता है इसके अलावा कर्नाटक में शिवकुमार की अगुवाई वाली सरकार में मल्लिकार्जुन खड़गे और सिद्धारमैया के बेटे को कैबिनेट में जगह देकर भविष्य के लिए सियासी रास्ता खोला है. 

तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री की कुर्सी युवा चेहरे रेवंत रेड्डी को सौंपी गई. रेवंत रेड्डी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है. तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी 56 साल के हैं तो हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की उम्र 62 साल है. इस तरह एक-एक कर राज्यों में सत्ता पर राहुल गांधी के पसंदीदा नेताओं की ताजपोशी होती जा रही है. 

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कांग्रेस में 20 साल बाद जेनरेशनल शिफ्ट
पिछले दिनों 46 साल के नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो 80 साल की उम्र पार कर चुके कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से तुलना होने लगी थी. तब बीजेपी के लीडरशिप में बदलाव की बहुत चर्चा हुई, लेकिन अब कांग्रेस भी अपनी राजनीतिक सीमाओं के दायरे में बदलाव करने में जुट गई है.

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पहले कांग्रेस में राज्यों के बड़े फैसले राज्यों के 'क्षत्रप' (जैसे अशोक गहलोत, कमलनाथ, भूपेश बघेल, ओमन चांडी, दिग्विजय सिंह) लिया करते थे. अब राहुल गांधी ने राज्यों में 'ओल्ड गार्ड' को धीरे-धीरे साइड लाइन या राष्ट्रीय भूमिका में भेजकर कमान नई पीढ़ी को सौंप रहे हैं. 

कर्नाटक, हिमाचल, तेलंगाना और केरलम में कांग्रेस हाईकमान ने पीढ़ीगत परिवर्तन कर दिया है. कांग्रेस ने बुजुर्ग और वोल्ड गार्ड की जगह पर नए चेहरों की ताजपोशी कर सियासी संदेश दिया.  कांग्रेस के संगठन में भी बदलाव शुरू हो गए हैं और अब नए चेहरे नजर आने लगे हैं.

कांग्रेस संगठन में राहुल टीम की एंट्री

प्रदेश के संगठन से लेकर जिला संगठन तक में युवा चेहरों की नियुक्तियां हो रही हैं. सैयद नसीर हुसैन को जम्मू-कश्मीर का प्रभारी, कृष्ण अल्लावरु को बिहार प्रभारी और सप्तगिरी उलाका जैसे युवा चेहरों को बड़ी राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है. यह राहुल गांधी की 'यूथ कांग्रेस' वाली मूल टीम के लोग हैं जो अब मुख्य संगठन को चला रहे हैं.

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आंध्र प्रदेश अध्यक्ष शर्मिला 46 साल की हैं और मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी 52 साल के हैं. इसके अलावा पंजाब में कांग्रेस की कमान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के हाथों में है, जिनकी उम्र 48 साल है. बिहार में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार (राजेश राम) हैं, जो 56 साल के हैं. इसी तरह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय 56 साल तो महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की उम्र 58 वर्ष है. 

इन सभी को प्रदेश अध्यक्ष बनवाने में राहुल गांधी का अहम रोल रहा है, क्योंकि ये सभी उनकी टीम के हिस्सा हैं. कांग्रेस में जिस तरह से लगातार सियासी बदलाव हो रहे हैं, उसके चलते ही राजस्थान में सचिन पायलट समेत अन्य राज्यों के युवा नेताओं का इंतजार भी जल्द समाप्त होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं.

'परिक्रमा' नहीं, 'पराक्रम' को तरजीह 
कांग्रेस के अतीत की सियासत में देखा गया है कि जब भी राहुल गांधी बदलाव करना चाहते थे, तो पार्टी के वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के पास जाकर अपना वीटो लगवा दिया करते थे, लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे के अध्यक्ष बनने और राहुल गांधी के 'नेता प्रतिपक्ष' की मजबूत भूमिका में आने के बाद समीकरण बदल गए हैं. खड़गे और राहुल की जुगलबंदी ने पुराने नेताओं के दबाव को पूरी तरह बेअसर कर दिया है, जिससे सांगठनिक फेरबदल में राहुल को पूरी तरह 'फ्री हैंड' मिल गया है.

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राहुल गांधी लंबे समय से कहते आए हैं कि पार्टी में चाटुकारिता की जगह कड़ी मेहनत और जनता से सीधे जुड़ाव को इनाम मिलना चाहिए. इसका सबसे बड़ा उदाहरण पवन खेड़ा का राज्यसभा जाना है. राहुल गांधी ने उन्हें कर्नाटक जैसी सुरक्षित सीट से राज्यसभा भेजकर कैडर को मैसेज दिया 'जो लड़ेगा, उसे हक मिलेगा. इसी तरह टीवी डिबेट्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी को फ्रंटफुट पर घेरने वाली नई पीढ़ी के नेताओं को संगठन और टिकटों में तरजीह दी जा रही है.

कांग्रेस पर राहुल गांधी की छाप

राहुल गांधी ने 'भारत जोड़ो यात्रा' के जरिए कांग्रेस की कार्यशैली को हमेशा के लिए बदल दिया है. जो कांग्रेस कभी बंद कमरों और कोर्ट-कचहरियों से राजनीति करती थी, उसके नेता अब सड़कों पर दिखने लगे हैं. कर्नाटक में सिद्धारमैया के बाद डीके शिवकुमार जैसे आक्रामक नेता को तैयार करना और केरल में वीडी सतीशन जैसे नए चेहरों को आगे बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा है. 

राहुल गांधी ने 2004 में संगठन के लोकतांत्रीकरण और युवाओं को आगे लाने की जो मुहिम 'यूथ कांग्रेस' के चुनावों से शुरू की थी, वह 2026 में आकर मुख्य कांग्रेस की मुख्यधारा बन चुकी है. आज की कांग्रेस बुजुर्गों के अनुभवों और युवाओं के आक्रामक तेवरों के मिश्रण से 2029 के रण की तैयारी करती दिख रही है.
 

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