कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत, डर है कि अब बिखरना शुरू ना हो जाए: भूपेंद्र हुड्डा

पंजाब में कैप्टन का इस्तीफा पहले ही हो चुका है, राजस्थान में भी पायलट गुट बनाम गहलोत गुट की लड़ाई जगजाहिर है. छत्तीसगढ़ में भी सीएम कुर्सी को लेकर दो पक्षों की तरफ से लगातार दांव चले जा रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस के लिए मुसीबत कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है.

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कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो) कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो)

राजदीप सरदेसाई

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST
  • भूपेंद्र हुड्डा ने भी कांग्रेस को दी नसीहत
  • फुल टाइम प्रेसिडेंट की जरूरत बताई

पंजाब कांग्रेस में तो पहले से ही दरार बढ़ती जा रही है, अब एक बार फिर पार्टी में ओल्ड गार्ड बनाम यंग गार्ड की लड़ाई भी मजबूत होती दिख रही है. जी 23 के नेता तो पहले ही खुलकर पार्टी के खिलाफ बगावती तेवर दिखा चुके हैं, कपिल सिब्बल ने भी कांग्रेस को आईना दिखाने की कोशिश की है. अब इसी कड़ी में हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस को नसीहत दे डाली है.

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भूपेंद्र ने दिखाया कांग्रेस को आईना

उनकी नजरों में पंजाब में स्थिति को और बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को अब आत्ममंथन करने की जरूरत है. मुझे डर है कि कांग्रेस कहीं अब बिखरना शुरू ना हो जाए. अब पार्टी को एक फुल टाइम प्रेसिडेंट की जरूरत है. अब यहां तक हुड्डा ने कांग्रेस को आईना दिखाने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी तरफ उन लोगों को आड़े हाथों भी लिया है जिन्होंने कपिल सिब्बल के घर के बाहर हंगामा किया था.

हुड्डा ने उस हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण बता दिया है. उनकी नजरों में सिब्बल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता हैं और सिर्फ अपनी राय रखने उनके खिलाफ ऐसा विरोध करना जायज नहीं है. इससे पहले भी कई मौकों पर हुड्डा ने कांग्रेस के जी 23 नेताओं का समर्थन किया है. वे भी लगातार एक फुल टाइम प्रेसिडेंट की बात कर रहे हैं.

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बिखरती कांग्रेस, नए अध्यक्ष की तलाश जारी

लेकिन ऐसी खबर है कि अभी अगले साल तक कांग्रेस के नए अध्यक्ष का चयन नहीं हो पाएगा. ऐसे में अभी सोनिया गांधी को ही इस पद की जिम्मेदारी संभालनी होगी. ये अलग बात है कि अभी जिन भी राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां पर अंदरूनी कलह बढ़ती जा रही है. पंजाब में कैप्टन का इस्तीफा पहले ही हो चुका है, राजस्थान में भी पायलट गुट बनाम गहलोत गुट की लड़ाई जगजाहिर है. छत्तीसगढ़ में भी सीएम कुर्सी को लेकर दो पक्षों की तरफ से लगातार दांव चले जा रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस के लिए मुसीबत कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है. चुनौती ये भी है कि ये अंदरूनी लड़ाई चुनाव से ठीक पहले सक्रिय हो गई है.

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